Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَأَغْوَيْنَاكُمْ: हमने तुम्हें गुमराह किया, पथभ्रष्ट किया।
- غَاوِينَ: गुमराह, पथभ्रष्ट, हिदायत से भटके हुए।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस भयानक दृश्य का हिस्सा है जब जहन्नुम के नेता और उनके अनुयायी आपस में झगड़ रहे होंगे। यहाँ उन बड़ों और सरदारों का जवाब है जो अपने मातहतों से कहते हैं: "हमने तुम्हें गुमराह किया, यह सच है, लेकिन हम खुद भी तो गुमराह थे। हम जान-बूझकर सच्चाई से भटके हुए थे, और अपनी इसी गुमराही में तुम्हें भी शामिल कर लिया। हमने तुम्हें सीधे रास्ते से हटाकर कुफ्र और गुमराही की तरफ बुलाया, और तुमने हमारी बात मान ली।"
यह वह क्षण है जब सारे पर्दे उठ जाएंगे और हर कोई अपनी असलियत देख लेगा। ये नेता अपने पीछे चलने वालों को साफ-साफ बता रहे हैं कि हम तुम्हें धोखा दे रहे थे, लेकिन हम खुद भी उसी अंधेरे में थे। यह कोई बहाना नहीं है, बल्कि एक दर्दनाक इक़रार है — हम गुमराह थे और हमने तुम्हें भी गुमराह किया।
इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। यह हमें आगाह करती है कि हम कभी किसी की अंधी पैरवी न करें, चाहे वह कितना ही बड़ा, विद्वान या प्रभावशाली क्यों न हो। हर इंसान की बात को कुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखना हमारा फर्ज़ है। अगर कोई हमें गलत रास्ते पर ले जा रहा है, तो क़यामत के दिन वह हमारे किसी काम नहीं आएगा — न उसकी सिफारिश काम आएगी, न उसका साथ।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चाई को पहचानना और उस पर चलना कितना ज़रूरी है। अल्लाह ने हमें अक्ल दी है, कुरआन दिया है, और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत दी है — ताकि हम किसी के धोखे में न आएं। जो लोग हिदायत पर चलते हैं, वे दुनिया में भी कामयाब होते हैं और आख़िरत में भी। और जो गुमराही पर चलते हैं, वे दोनों जगह नुकसान उठाते हैं।
आओ, हम अपने जीवन को कुरआन और सुन्नत के अनुसार ढालें, किसी इंसान की बात को हिदायत पर हमेशा तरजीह न दें, और अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें सीधे रास्ते पर चलाए और हमें गुमराह करने वालों के चंगुल से बचाए। याद रखें, क़यामत के दिन हर इंसान अपने आमाल का ज़िम्मेदार खुद होगा — न कोई किसी का बोझ उठाएगा, न कोई किसी को बचा सकेगा।
📜 आयत 30-34 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 32
सूरा अस-साफ्फात आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह कियासूरा आयत 32/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


