अस-साफ्फात · 32/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَأَغْوَيْنَاكُمْ إِنَّا كُنَّا غَاوِينَ ۝٣٢
Fa aghwainaakum innaa kunnaa ghaaween
📖 हिंदी अर्थ
हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَغْوَيْنَاكُمْ: हमने तुम्हें गुमराह किया, पथभ्रष्ट किया।
  • غَاوِينَ: गुमराह, पथभ्रष्ट, हिदायत से भटके हुए।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दृश्य का हिस्सा है जब जहन्नुम के नेता और उनके अनुयायी आपस में झगड़ रहे होंगे। यहाँ उन बड़ों और सरदारों का जवाब है जो अपने मातहतों से कहते हैं: "हमने तुम्हें गुमराह किया, यह सच है, लेकिन हम खुद भी तो गुमराह थे। हम जान-बूझकर सच्चाई से भटके हुए थे, और अपनी इसी गुमराही में तुम्हें भी शामिल कर लिया। हमने तुम्हें सीधे रास्ते से हटाकर कुफ्र और गुमराही की तरफ बुलाया, और तुमने हमारी बात मान ली।"

यह वह क्षण है जब सारे पर्दे उठ जाएंगे और हर कोई अपनी असलियत देख लेगा। ये नेता अपने पीछे चलने वालों को साफ-साफ बता रहे हैं कि हम तुम्हें धोखा दे रहे थे, लेकिन हम खुद भी उसी अंधेरे में थे। यह कोई बहाना नहीं है, बल्कि एक दर्दनाक इक़रार है — हम गुमराह थे और हमने तुम्हें भी गुमराह किया।

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है। यह हमें आगाह करती है कि हम कभी किसी की अंधी पैरवी न करें, चाहे वह कितना ही बड़ा, विद्वान या प्रभावशाली क्यों न हो। हर इंसान की बात को कुरआन और सुन्नत की कसौटी पर परखना हमारा फर्ज़ है। अगर कोई हमें गलत रास्ते पर ले जा रहा है, तो क़यामत के दिन वह हमारे किसी काम नहीं आएगा — न उसकी सिफारिश काम आएगी, न उसका साथ।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्चाई को पहचानना और उस पर चलना कितना ज़रूरी है। अल्लाह ने हमें अक्ल दी है, कुरआन दिया है, और रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत दी है — ताकि हम किसी के धोखे में न आएं। जो लोग हिदायत पर चलते हैं, वे दुनिया में भी कामयाब होते हैं और आख़िरत में भी। और जो गुमराही पर चलते हैं, वे दोनों जगह नुकसान उठाते हैं।

आओ, हम अपने जीवन को कुरआन और सुन्नत के अनुसार ढालें, किसी इंसान की बात को हिदायत पर हमेशा तरजीह न दें, और अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें सीधे रास्ते पर चलाए और हमें गुमराह करने वालों के चंगुल से बचाए। याद रखें, क़यामत के दिन हर इंसान अपने आमाल का ज़िम्मेदार खुद होगा — न कोई किसी का बोझ उठाएगा, न कोई किसी को बचा सकेगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — अस-साफ्फात

30وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَانٍ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًا طَاغِينَ
और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे
31فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَا ۖ إِنَّا لَذَائِقُونَ
फिर अब तो लोगों पर हमारे परवरदिगार का (अज़ाब का) क़ौल पूरा हो गया कि अब हम सब यक़ीनन अज़ाब का मज़ा चखेंगे
32فَأَغْوَيْنَاكُمْ إِنَّا كُنَّا غَاوِينَ
हम खुद गुमराह थे तो तुम को भी गुमराह किया
33فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍ فِي الْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ
ग़रज़ ये लोग सब के सब उस दिन अज़ाब में शरीक होगें
34إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ
और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे
अस-साफ्फातकुरान सूची
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अनुवाद — अस-साफ्फात 32

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Tuesday, August 18, 2026

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