अस-साफ्फात · 62/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ ۝٦٢
Azaalika khairun nuzulan am shajaratuz Zaqqom
📖 हिंदी अर्थ
भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • नुज़ुलन (نُزُلًا): अतिथि के लिए तैयार किया गया भोजन और आतिथ्य-सत्कार।
  • शजरतुज़ ज़क़्क़ूम (شَجَرَةُ الزَّقُّومِ): जहन्नम (नरक) का वह पेड़ जो जहन्नम की तलहटी में उगता है, जिसका फल काफ़िरों का भोजन होगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न उठा रहे हैं ताकि इंसान अपनी बुद्धि से सोचे और सही रास्ता चुने। वह फ़रमाते हैं: क्या वह सब कुछ जो पहले वर्णित किया गया — यानी जन्नत के नेमतें, वहाँ के सुंदर बाग़, बहती नहरें, स्वादिष्ट भोजन, सुंदर हूरें, और सबसे बड़ी नेमत यानी अल्लाह का दीदार और उसकी रज़ा — क्या यह सब बेहतर है मेहमानों के लिए तैयार किए गए सम्मान और आतिथ्य के रूप में, या फिर वह ज़क़्क़ूम का पेड़ जो नरक के लिए तैयार किया गया है?

यह प्रश्न स्वयं ही उत्तर दे देता है। ज़क़्क़ूम का पेड़ वह घिनौना पेड़ है जो जहन्नम की आग में उगता है, उसका फल ऐसा होगा जैसे शैतानों के सिर — बदसूरत, कड़वा और जलाने वाला। यह उन लोगों का भोजन होगा जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी की और उसके रसूलों को झुठलाया। यह भोजन न तो उन्हें तृप्त करेगा, न ही उनकी भूख मिटाएगा, बल्कि उनकी पीड़ा और बढ़ाएगा।

इस आयत में अल्लाह तआला ने इंसान को सोचने की दावत दी है कि वह अपने लिए कौन सा मार्ग चुनता है। क्या वह उस आतिथ्य को पसंद करता है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है, या उस यातना को जो विद्रोहियों के लिए है? यह चुनाव पूरी तरह इंसान के अपने हाथ में है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अत्यंत दयालु है और अपने बंदों को सीधे रास्ते पर लाना चाहता है। वह हमें पहले ही सचेत कर रहा है ताकि हम उसके आतिथ्य को चुनें, न कि उस यातना को। आइए हम अपने जीवन को देखें — क्या हम ऐसे काम कर रहे हैं जो हमें उस सुंदर आतिथ्य की ओर ले जाएँ, या ऐसे काम जो हमें ज़क़्क़ूम की ओर ले जा रहे हैं? अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल दी है, क़ुरआन दिया है, और रसूल भेजे हैं — अब फ़ैसला हमें करना है। अल्लाह हमें सही रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 60-64 — सूरा अस-साफ्फात

60إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
(तो तुम्हें यक़ीन न होता था) ये यक़ीनी बहुत बड़ी कामयाबी है
61لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ الْعَامِلُونَ
ऐसी (ही कामयाबी) के वास्ते काम करने वालों को कारगुज़ारी करनी चाहिए
62أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ الزَّقُّومِ
भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़ का दरख्त (जो जहन्नुमियों के वास्ते होगा)
63إِنَّا جَعَلْنَاهَا فِتْنَةً لِّلظَّالِمِينَ
जिसे हमने यक़ीनन ज़ालिमों की आज़माइश के लिए बनाया है
64إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِي أَصْلِ الْجَحِيمِ
ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
62आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 62

सूरा अस-साफ्फात आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला मेहमानी के वास्ते ये (सामान) बेहतर है या थोहड़…

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Saturday, October 3, 2026

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