अस-साफ्फात · 87/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ الْعَالَمِينَ ۝٨٧
Famaa zannukum bi Rabbil`aalameen
📖 हिंदी अर्थ
फिर सारी खुदाई के पालने वाले के साथ तुम्हारा क्या ख्याल है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَنّ: यहाँ इसका अर्थ है विश्वास, गुमान या अंदाज़ा।
  • رَبّ: पालनहार, परवरदिगार।
  • العَالَمِين: सारे जहान, समस्त सृष्टि, सभी लोक।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से यह सवाल किया, जब उन्होंने देखा कि लोग पत्थरों और मूर्तियों की पूजा कर रहे हैं, जबकि वे न तो सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, और न ही किसी को नुक़सान या फ़ायदा पहुँचा सकती हैं। उन्होंने अपनी क़ौम को समझाते हुए कहा: "तुम्हारा अपने रब के बारे में क्या गुमान है? तुम्हें क्या लगता है कि जब तुम उसके सामने खड़े होंगे, और तुमने उसके साथ दूसरों को शरीक किया होगा, तो वह तुम्हारे साथ क्या सलूक करेगा?"

यह एक बहुत ही गहरा और प्रभावशाली सवाल है। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) यह बताना चाहते थे कि जो लोग अपने रब को नहीं पहचानते, वे उसकी क़ुदरत, उसकी रहमत और उसके इंसाफ़ का सही अंदाज़ा ही नहीं लगा सकते। अगर वे सच में यह मानते कि यह कायनात का मालिक कितना महान है, कितना शक्तिशाली है, और कितना दयावान है, तो वे उसके सिवा किसी और की इबादत की जुर्रत कभी न करते।

यह सवाल हर उस इंसान के लिए है जो अपनी ज़िंदगी में किसी और को अपना माबूद बना लेता है — चाहे वह मूर्ति हो, धन-दौलत हो, शोहरत हो, या अपनी नफ़्सियात। क्या हमने कभी सोचा है कि जिस दिन हम अपने रब के सामने खड़े होंगे, उस दिन हमारा क्या हाल होगा? क्या हम उससे यह उम्मीद कर सकते हैं कि वह हमें माफ़ कर दे, जबकि हमने उसके साथ शिर्क किया?

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा अपने रब के साथ क्या रिश्ता है। क्या हम उसे पहचानते हैं? क्या हम उसकी इबादत सिर्फ उसी के लिए करते हैं? क्या हम उससे डरते हैं और उसी से उम्मीद रखते हैं?

प्यारे भाइयों और बहनों! यह सवाल आज भी उतना ही ज़िंदा है जितना हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के ज़माने में था। आइए, हम अपने दिलों में इस सवाल का जवाब ढूँढें, और अपने रब के साथ अपने रिश्ते को सुधारें। याद रखिए, जो लोग अपने रब को पहचान लेते हैं, वे कभी उसके सिवा किसी और के आगे सिर नहीं झुकाते। और जो लोग उसे पहचान लेते हैं, उनके लिए इस दुनिया में सुकून है और आख़िरत में जन्नत की खुशियाँ।



📜 आयत 85-89 — अस-साफ्फात

85إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَاذَا تَعْبُدُونَ
जब उन्होंने अपने (मुँह बोले) बाप और अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग किस चीज़ की परसतिश करते हो
86أَئِفْكًا آلِهَةً دُونَ اللَّهِ تُرِيدُونَ
क्या खुदा को छोड़कर दिल से गढ़े हुए माबूदों की तमन्ना रखते हो
87فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ الْعَالَمِينَ
फिर सारी खुदाई के पालने वाले के साथ तुम्हारा क्या ख्याल है
88فَنَظَرَ نَظْرَةً فِي النُّجُومِ
फिर (एक ईद में उन लोगों ने चलने को कहा) तो इबराहीम ने सितारों की तरफ़ एक नज़र देखा
89فَقَالَ إِنِّي سَقِيمٌ
और कहा कि मैं (अनक़रीब) बीमार पड़ने वाला हूँ
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अनुवाद — अस-साफ्फात 87

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Tuesday, August 18, 2026

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