إِنَاثًا (इनासन): इससे अभिप्राय मूर्तियाँ हैं, जिन्हें मक्का के बहुदेववादी स्त्री-नामों (जैसे लात, उज़्ज़ा, मनात) से पुकारते थे।
شَيْطَانًا مَّرِيدًا (शैतानन मरीदन): सिरकश और सरकश शैतान, जो अल्लाह की आज्ञा से बाहर निकल गया और अपनी सरकशी में हद से आगे बढ़ गया।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मक्का के बहुदेववादियों के बारे में उतरी, जो अल्लाह को छोड़कर मूर्तियों की पूजा करते थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग अल्लाह के सिवा जिन चीज़ों को पुकारते और उनकी इबादत करते हैं, वे सिर्फ़ नाम-मात्र की मूर्तियाँ हैं, जिन्हें उन्होंने स्त्रियों के नामों (जैसे लात, उज़्ज़ा, मनात) से पुकार रखा है। ये मूर्तियाँ न किसी को नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही कोई फ़ायदा दे सकती हैं। असल में ये लोग अपनी इन मूर्तियों की पूजा के ज़रिए शैतान की इबादत कर रहे हैं, क्योंकि शैतान ही वह है जिसने उन्हें इन मूर्तियों की पूजा का आदेश दिया और उनके लिए इस काम को ख़ूबसूरत बनाकर पेश किया। यह शैतान अल्लाह की आज्ञा से सरकश है, अपनी सरकशी में हद से आगे निकल चुका है, और वह इंसानों को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ता।
फ़ायदे (सबक़):
इस आयत से पता चलता है कि शिर्क (बहुदेववाद) असल में शैतान की पैरवी है, क्योंकि शैतान ही वह है जो इंसानों को अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत के लिए उकसाता है।
मूर्तियाँ और झूठे माबूद न तो नुक़सान पहुँचा सकते हैं और न ही फ़ायदा, इसलिए इनसे किसी तरह की उम्मीद रखना बेकार है।
अल्लाह की इबादत ही सच्ची इबादत है, और उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए। जो लोग अल्लाह को छोड़कर दूसरों की ओर मुड़ते हैं, वह दरअसल शैतान के जाल में फँसते हैं।
यह आयत मुसलमानों को तौहीद (एकेश्वरवाद) पर क़ायम रहने की तरग़ीब देती है और उन्हें शिर्क से बचने की ताकीद करती है, क्योंकि शिर्क इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देता है।
और जो शख्स राहे रास्त के ज़ाहिर होने के बाद रसूल से सरकशी करे और मोमिनीन के तरीक़े के सिवा किसी और राह पर चले तो जिधर वह फिर गया है हम भी उधर ही फेर देंगे और (आख़िर) उसे जहन्नुम में झोंक देंगे और वह तो बहुत ही बुरा ठिकाना
ख़ुदा बेशक उसको तो नहीं बख्शता कि उसका कोई और शरीक बनाया जाए हॉ उसके सिवा जो गुनाह हो जिसको चाहे बख्श दे और (माज़ अल्लाह) जिसने किसी को ख़ुदा का शरीक बनाया तो वह बस भटक के बहुत दूर जा पड़ा
और फिर उन्हें ज़रूर गुमराह करूंगा और उन्हें बड़ी बड़ी उम्मीदें भी ज़रूर दिलाऊंगा और यक़ीनन उन्हें सिखा दूंगा फिर वो (बुतों के वास्ते) जानवरों के काम ज़रूर चीर फाड़ करेंगे और अलबत्ता उनसे कह दूंगा बस फिर वो (मेरी तालीम के मुवाफ़िक़) ख़ुदा की बनाई हुई सूरत को ज़रूर बदल डालेंगे और (ये याद रहे कि) जिसने ख़ुदा को छोड़कर शैतान को अपना सरपरस्त बनाया तो उसने खुल्लम खुल्ला सख्त घाटा उठाया
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