अन-निसा · 117/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
إِن يَدْعُونَ مِن دُونِهِ إِلَّا إِنَاثًا وَإِن يَدْعُونَ إِلَّا شَيْطَانًا مَّرِيدًا ۝١١٧
iny yad`oona min dooniheee illaaa inaasanw wa iny yad`oona illaa Shaitaanam mareedaa
📖 हिंदी अर्थ
मुशरेकीन ख़ुदा को छोड़कर बस औरतों ही की परसतिश करते हैं (यानी बुतों की जो उनके) ख्याल में औरतें हैं (दर हक़ीक़त) ये लोग सरकश शैतान की परसतिश करते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِنَاثًا (इनासन): इससे अभिप्राय मूर्तियाँ हैं, जिन्हें मक्का के बहुदेववादी स्त्री-नामों (जैसे लात, उज़्ज़ा, मनात) से पुकारते थे।
  • شَيْطَانًا مَّرِيدًا (शैतानन मरीदन): सिरकश और सरकश शैतान, जो अल्लाह की आज्ञा से बाहर निकल गया और अपनी सरकशी में हद से आगे बढ़ गया।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मक्का के बहुदेववादियों के बारे में उतरी, जो अल्लाह को छोड़कर मूर्तियों की पूजा करते थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग अल्लाह के सिवा जिन चीज़ों को पुकारते और उनकी इबादत करते हैं, वे सिर्फ़ नाम-मात्र की मूर्तियाँ हैं, जिन्हें उन्होंने स्त्रियों के नामों (जैसे लात, उज़्ज़ा, मनात) से पुकार रखा है। ये मूर्तियाँ न किसी को नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही कोई फ़ायदा दे सकती हैं। असल में ये लोग अपनी इन मूर्तियों की पूजा के ज़रिए शैतान की इबादत कर रहे हैं, क्योंकि शैतान ही वह है जिसने उन्हें इन मूर्तियों की पूजा का आदेश दिया और उनके लिए इस काम को ख़ूबसूरत बनाकर पेश किया। यह शैतान अल्लाह की आज्ञा से सरकश है, अपनी सरकशी में हद से आगे निकल चुका है, और वह इंसानों को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ता।

फ़ायदे (सबक़):

  1. इस आयत से पता चलता है कि शिर्क (बहुदेववाद) असल में शैतान की पैरवी है, क्योंकि शैतान ही वह है जो इंसानों को अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत के लिए उकसाता है।
  2. मूर्तियाँ और झूठे माबूद न तो नुक़सान पहुँचा सकते हैं और न ही फ़ायदा, इसलिए इनसे किसी तरह की उम्मीद रखना बेकार है।
  3. अल्लाह की इबादत ही सच्ची इबादत है, और उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए। जो लोग अल्लाह को छोड़कर दूसरों की ओर मुड़ते हैं, वह दरअसल शैतान के जाल में फँसते हैं।
  4. यह आयत मुसलमानों को तौहीद (एकेश्वरवाद) पर क़ायम रहने की तरग़ीब देती है और उन्हें शिर्क से बचने की ताकीद करती है, क्योंकि शिर्क इंसान को अल्लाह की रहमत से महरूम कर देता है।


📜 आयत 115-119 — अन-निसा

115وَمَن يُشَاقِقِ الرَّسُولَ مِن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُ الْهُدَىٰ وَيَتَّبِعْ غَيْرَ سَبِيلِ الْمُؤْمِنِينَ نُوَلِّهِ مَا تَوَلَّىٰ وَنُصْلِهِ جَهَنَّمَ ۖ وَسَاءَتْ مَصِيرًا
और जो शख्स राहे रास्त के ज़ाहिर होने के बाद रसूल से सरकशी करे और मोमिनीन के तरीक़े के सिवा किसी और राह पर चले तो जिधर वह फिर गया है हम भी उधर ही फेर देंगे और (आख़िर) उसे जहन्नुम में झोंक देंगे और वह तो बहुत ही बुरा ठिकाना
116إِنَّ اللَّهَ لَا يَغْفِرُ أَن يُشْرَكَ بِهِ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَن يَشَاءُ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَالًا بَعِيدًا
ख़ुदा बेशक उसको तो नहीं बख्शता कि उसका कोई और शरीक बनाया जाए हॉ उसके सिवा जो गुनाह हो जिसको चाहे बख्श दे और (माज़ अल्लाह) जिसने किसी को ख़ुदा का शरीक बनाया तो वह बस भटक के बहुत दूर जा पड़ा
117إِن يَدْعُونَ مِن دُونِهِ إِلَّا إِنَاثًا وَإِن يَدْعُونَ إِلَّا شَيْطَانًا مَّرِيدًا
मुशरेकीन ख़ुदा को छोड़कर बस औरतों ही की परसतिश करते हैं (यानी बुतों की जो उनके) ख्याल में औरतें हैं (दर हक़ीक़त) ये लोग सरकश शैतान की परसतिश करते हैं
118لَّعَنَهُ اللَّهُ ۘ وَقَالَ لَأَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَصِيبًا مَّفْرُوضًا
जिसपर ख़ुदा ने लानत की है और जिसने (इब्तिदा ही में) कहा था कि (ख़ुदावन्दा) मैं तेरे बन्दों में से कुछ ख़ास लोगों को (अपनी तरफ) ज़रूर ले लूंगा
119وَلَأُضِلَّنَّهُمْ وَلَأُمَنِّيَنَّهُمْ وَلَآمُرَنَّهُمْ فَلَيُبَتِّكُنَّ آذَانَ الْأَنْعَامِ وَلَآمُرَنَّهُمْ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلْقَ اللَّهِ ۚ وَمَن يَتَّخِذِ الشَّيْطَانَ وَلِيًّا مِّن دُونِ اللَّهِ فَقَدْ خَسِرَ خُسْرَانًا مُّبِينًا
और फिर उन्हें ज़रूर गुमराह करूंगा और उन्हें बड़ी बड़ी उम्मीदें भी ज़रूर दिलाऊंगा और यक़ीनन उन्हें सिखा दूंगा फिर वो (बुतों के वास्ते) जानवरों के काम ज़रूर चीर फाड़ करेंगे और अलबत्ता उनसे कह दूंगा बस फिर वो (मेरी तालीम के मुवाफ़िक़) ख़ुदा की बनाई हुई सूरत को ज़रूर बदल डालेंगे और (ये याद रहे कि) जिसने ख़ुदा को छोड़कर शैतान को अपना सरपरस्त बनाया तो उसने खुल्लम खुल्ला सख्त घाटा उठाया
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अनुवाद — अन-निसा 117

सूरा अन-निसा आयत 117 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मुशरेकीन ख़ुदा को छोड़कर बस औरतों ही की परसतिश करते…

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Tuesday, August 18, 2026

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