अन-निसा · 118/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
لَّعَنَهُ اللَّهُ ۘ وَقَالَ لَأَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَصِيبًا مَّفْرُوضًا ۝١١٨
La`anahul laah; wa qaala la attakhizanna min `ibaadika naseebam mafroodaa
📖 हिंदी अर्थ
जिसपर ख़ुदा ने लानत की है और जिसने (इब्तिदा ही में) कहा था कि (ख़ुदावन्दा) मैं तेरे बन्दों में से कुछ ख़ास लोगों को (अपनी तरफ) ज़रूर ले लूंगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَعَنَهُ اللهُ: अल्लाह ने उसे अपनी रहमत से दूर कर दिया।
  • نَصِيبًا مَفْرُوضًا: एक निश्चित हिस्सा, जो मुक़र्रर और मालूम हो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने शैतान को अपनी रहमत से निकाल कर मलऊन (लानत किया हुआ) बना दिया। इसके बाद शैतान ने अल्लाह के सामने क़सम खाकर कहा कि वह तेरे बंदों में से एक निश्चित और मुक़र्रर हिस्सा अपने लिए ज़रूर अलग कर लेगा। यानी वह अल्लाह के बंदों में से एक बड़ी तादाद को अपनी तरफ़ माइल कर लेगा और उन्हें सीधे रास्ते से भटकाएगा। यह हिस्सा उन लोगों पर मुश्तमिल है जो उसकी बात मानते हैं, उसके क़दमों पर चलते हैं और अल्लाह की इताअत के बजाय उसकी पैरवी करते हैं। शैतान का यह दावा सिर्फ़ बात नहीं था, बल्कि उसने अपने इस इरादे पर अमल भी किया और हर ज़माने में वह लोगों को गुमराह करता रहा, जब तक कि क़यामत न आ जाए।

फ़ायदे:

  1. शैतान अल्लाह का दुश्मन है और उसने अपनी दुश्मनी का ऐलान कर दिया है, इसलिए मुसलमान को चाहिए कि वह उससे सावधान रहे और उसके धोखों में न आए।
  2. शैतान की कोशिशें सिर्फ़ कुछ लोगों तक महदूद नहीं हैं, बल्कि वह हर उस इंसान को गुमराह करने की कोशिश करता है जो अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल होता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पनाह माँगना और उसकी रहमत के तले आना ही शैतान के शर से बचने का ज़रिया है।
  4. इंसान को अपनी ताक़त और होशियारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि अल्लाह की मदद और हिफ़ाज़त पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि शैतान का दायरा बहुत वसीअ है और उसके जाल से सिर्फ़ अल्लाह ही बचा सकता है।
  5. यह आयत उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो शैतान की पैरवी करते हैं कि उनका अंजाम शैतान के साथ जहन्नम की आग है।


📜 आयत 116-120 — अन-निसा

116إِنَّ اللَّهَ لَا يَغْفِرُ أَن يُشْرَكَ بِهِ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَن يَشَاءُ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَالًا بَعِيدًا
ख़ुदा बेशक उसको तो नहीं बख्शता कि उसका कोई और शरीक बनाया जाए हॉ उसके सिवा जो गुनाह हो जिसको चाहे बख्श दे और (माज़ अल्लाह) जिसने किसी को ख़ुदा का शरीक बनाया तो वह बस भटक के बहुत दूर जा पड़ा
117إِن يَدْعُونَ مِن دُونِهِ إِلَّا إِنَاثًا وَإِن يَدْعُونَ إِلَّا شَيْطَانًا مَّرِيدًا
मुशरेकीन ख़ुदा को छोड़कर बस औरतों ही की परसतिश करते हैं (यानी बुतों की जो उनके) ख्याल में औरतें हैं (दर हक़ीक़त) ये लोग सरकश शैतान की परसतिश करते हैं
118لَّعَنَهُ اللَّهُ ۘ وَقَالَ لَأَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَصِيبًا مَّفْرُوضًا
जिसपर ख़ुदा ने लानत की है और जिसने (इब्तिदा ही में) कहा था कि (ख़ुदावन्दा) मैं तेरे बन्दों में से कुछ ख़ास लोगों को (अपनी तरफ) ज़रूर ले लूंगा
119وَلَأُضِلَّنَّهُمْ وَلَأُمَنِّيَنَّهُمْ وَلَآمُرَنَّهُمْ فَلَيُبَتِّكُنَّ آذَانَ الْأَنْعَامِ وَلَآمُرَنَّهُمْ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلْقَ اللَّهِ ۚ وَمَن يَتَّخِذِ الشَّيْطَانَ وَلِيًّا مِّن دُونِ اللَّهِ فَقَدْ خَسِرَ خُسْرَانًا مُّبِينًا
और फिर उन्हें ज़रूर गुमराह करूंगा और उन्हें बड़ी बड़ी उम्मीदें भी ज़रूर दिलाऊंगा और यक़ीनन उन्हें सिखा दूंगा फिर वो (बुतों के वास्ते) जानवरों के काम ज़रूर चीर फाड़ करेंगे और अलबत्ता उनसे कह दूंगा बस फिर वो (मेरी तालीम के मुवाफ़िक़) ख़ुदा की बनाई हुई सूरत को ज़रूर बदल डालेंगे और (ये याद रहे कि) जिसने ख़ुदा को छोड़कर शैतान को अपना सरपरस्त बनाया तो उसने खुल्लम खुल्ला सख्त घाटा उठाया
120يَعِدُهُمْ وَيُمَنِّيهِمْ ۖ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ إِلَّا غُرُورًا
शैतान उनसे अच्छे अच्छे वायदे भी करता है (और बड़ी बड़ी) उम्मीदें भी दिलाता है और शैतान उनसे जो कुछ वायदे भी करता है वह बस निरा धोखा (ही धोखा) है
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अनुवाद — अन-निसा 118

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Tuesday, August 18, 2026

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