अन-निसा · 120/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
يَعِدُهُمْ وَيُمَنِّيهِمْ ۖ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ إِلَّا غُرُورًا ۝١٢٠
Ya`iduhum wa yuman neehim wa maa ya`iduhumush Shaitaanu illaa ghurooraa
📖 हिंदी अर्थ
शैतान उनसे अच्छे अच्छे वायदे भी करता है (और बड़ी बड़ी) उम्मीदें भी दिलाता है और शैतान उनसे जो कुछ वायदे भी करता है वह बस निरा धोखा (ही धोखा) है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَعِدُهُمْ (वादा करता है उनसे): शैतान अपने अनुयायियों से झूठे वादे करता है।
  • يُمَنِّيهِمْ (आशाएँ दिलाता है): उन्हें खोखली और झूठी आशाएँ देता है, जिनका कोई वास्तविक आधार नहीं होता।
  • غُرُورًا (धोखा): पूर्णतः भ्रामक और बातिल चीज़, जो सिर्फ धोखा देने के लिए हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत शैतान की उस फितनत-भरी चाल को उजागर करती है जो वह इंसानों के साथ करता है। शैतान अपने पैरोकारों को लगातार वादे करता है—कभी लंबी उम्र का, कभी दुनिया की दौलत का, कभी सुख-सुविधाओं का—और उन्हें ऐसी आशाओं में उलझाए रखता है जो कभी पूरी नहीं होतीं। वह उन्हें कल पर टालने, बुरे कामों को खूबसूरत दिखाने और आख़िरत को भुलाने का काम करता है।

लेकिन सच्चाई यह है कि शैतान के सारे वादे सिर्फ धोखा हैं। उसके पास न तो कोई सच्चाई है, न कोई ताकत, और न ही वह अपने वादों को पूरा कर सकता है। वह एक झूठा वादा करने वाला है जो इंसान को अंधेरे में ले जाता है और जब इंसान उसके पीछे चलता है, तो उसे कुछ नहीं मिलता सिवाय पछतावे के।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें शैतान के वादों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। वह हमें गुनाह की राह दिखाता है, लेकिन उसका अंजाम सिर्फ दुख और अफसोस है। अल्लाह तआला ने हमें सच्चा रास्ता दिखाया है—सब्र, नेकी और तक़वा का रास्ता—जो दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है। शैतान की बातों में कोई भलाई नहीं, जबकि अल्लाह का वादा सच्चा है और उसकी रहमत असीम है।

इसलिए ऐ इंसान! शैतान के धोखे में न आ, उसकी झूठी आशाओं पर भरोसा न कर। अल्लाह की तरफ रुजू कर, उसकी इबादत कर और उसके दिए हुए रास्ते पर चल। यही सच्ची कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो तुझे जन्नत की तरफ ले जाएगा। शैतान का अंजाम हमेशा नुकसान है, जबकि अल्लाह का वादा हमेशा सच्चा और भलाई वाला है।



📜 आयत 118-122 — अन-निसा

118لَّعَنَهُ اللَّهُ ۘ وَقَالَ لَأَتَّخِذَنَّ مِنْ عِبَادِكَ نَصِيبًا مَّفْرُوضًا
जिसपर ख़ुदा ने लानत की है और जिसने (इब्तिदा ही में) कहा था कि (ख़ुदावन्दा) मैं तेरे बन्दों में से कुछ ख़ास लोगों को (अपनी तरफ) ज़रूर ले लूंगा
119وَلَأُضِلَّنَّهُمْ وَلَأُمَنِّيَنَّهُمْ وَلَآمُرَنَّهُمْ فَلَيُبَتِّكُنَّ آذَانَ الْأَنْعَامِ وَلَآمُرَنَّهُمْ فَلَيُغَيِّرُنَّ خَلْقَ اللَّهِ ۚ وَمَن يَتَّخِذِ الشَّيْطَانَ وَلِيًّا مِّن دُونِ اللَّهِ فَقَدْ خَسِرَ خُسْرَانًا مُّبِينًا
और फिर उन्हें ज़रूर गुमराह करूंगा और उन्हें बड़ी बड़ी उम्मीदें भी ज़रूर दिलाऊंगा और यक़ीनन उन्हें सिखा दूंगा फिर वो (बुतों के वास्ते) जानवरों के काम ज़रूर चीर फाड़ करेंगे और अलबत्ता उनसे कह दूंगा बस फिर वो (मेरी तालीम के मुवाफ़िक़) ख़ुदा की बनाई हुई सूरत को ज़रूर बदल डालेंगे और (ये याद रहे कि) जिसने ख़ुदा को छोड़कर शैतान को अपना सरपरस्त बनाया तो उसने खुल्लम खुल्ला सख्त घाटा उठाया
120يَعِدُهُمْ وَيُمَنِّيهِمْ ۖ وَمَا يَعِدُهُمُ الشَّيْطَانُ إِلَّا غُرُورًا
शैतान उनसे अच्छे अच्छे वायदे भी करता है (और बड़ी बड़ी) उम्मीदें भी दिलाता है और शैतान उनसे जो कुछ वायदे भी करता है वह बस निरा धोखा (ही धोखा) है
121أُولَٰئِكَ مَأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ وَلَا يَجِدُونَ عَنْهَا مَحِيصًا
यही तो वह लोग हैं जिनका ठिकाना बस जहन्नुम है और वहॉ से भागने की जगह भी न पाएंगे
122وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ وَمَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلًا
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें हम अनक़रीब ही (बेहिश्त के) उन (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुंचाएगें जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग उसमें हमेशा आबादुल आबाद तक रहेंगे (ये उनसे) ख़ुदा का पक्का वायदा है और ख़ुदा से ज्यादा (अपनी) बात में सच्चा कौन होगा
अन-निसाकुरान सूची
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अनुवाद — अन-निसा 120

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Tuesday, August 18, 2026

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