अन-निसा · 156/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَبِكُفْرِهِمْ وَقَوْلِهِمْ عَلَىٰ مَرْيَمَ بُهْتَانًا عَظِيمًا ۝١٥٦
Wa bikufrihim wa qawlihim `alaa Maryama buh taanan `azeema
📖 हिंदी अर्थ
और उनके काफ़िर होने और मरियम पर बहुत बड़ा बोहतान बॉधने कि वजह से
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بُهْتَانًا: झूठा आरोप, बदनामी, वह बात जो सच्चाई के विपरीत हो।
  • عَظِيمًا: बहुत बड़ा, अत्यंत गंभीर।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने यहूदियों के उन कुकर्मों का उल्लेख किया है जिनके कारण उन्हें रहमत से दूर कर दिया गया और उन पर लानत भेजी गई। उनका पहला अपराध यह था कि उन्होंने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को नबी मानने से इनकार किया और उनकी रिसालत को झुठलाया। दूसरा अपराध यह था कि उन्होंने हज़रत मरियम (अलैहिस्सलाम) पर बहुत बड़ा झूठा आरोप लगाया — उन्होंने उन पर व्यभिचार का आरोप लगाया, जबकि वह पूर्ण पवित्रता वाली महिला थीं। यह आरोप न केवल झूठ था बल्कि अत्यंत घृणित और गंभीर था, क्योंकि अल्लाह ने स्वयं उन्हें पवित्र घोषित किया था। यहूदियों ने न केवल ईसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया बल्कि उनकी माता की इज़्ज़त पर भी हमला किया। इस प्रकार उनका कुफ्र और उनकी बदज़बानी दोनों उनके लिए अल्लाह की रहमत से महरूम होने का कारण बने। अल्लाह ने उनके इन कुकर्मों के कारण उन्हें लानत और अपनी रहमत से दूर कर दिया।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि नबियों और उनके परिवार की इज़्ज़त करना हर मुसलमान का ईमानी फ़र्ज़ है। किसी भी नबी या उनके खानदान के खिलाफ बोलना या उन पर आरोप लगाना बहुत बड़ा गुनाह है।
  2. झूठे आरोप लगाना और किसी की इज़्ज़त को ठेस पहुंचाना अल्लाह के यहां बहुत बड़ा अपराध है, चाहे वह किसी पर भी लगाया जाए।
  3. यहूदियों का अंजाम हमारे लिए सबक है कि जो लोग सच्चाई को जानते हुए भी उसका इनकार करते हैं और नबियों के खिलाफ ज़ुबान चलाते हैं, वे अल्लाह की रहमत से महरूम हो जाते हैं।
  4. इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपनी ज़ुबान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और किसी के बारे में बिना सबूत के बुरी बात नहीं कहनी चाहिए। इस्लाम हमें पाकीज़गी और सच्चाई की तरफ बुलाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 154-158 — अन-निसा

154وَرَفَعْنَا فَوْقَهُمُ الطُّورَ بِمِيثَاقِهِمْ وَقُلْنَا لَهُمُ ادْخُلُوا الْبَابَ سُجَّدًا وَقُلْنَا لَهُمْ لَا تَعْدُوا فِي السَّبْتِ وَأَخَذْنَا مِنْهُم مِّيثَاقًا غَلِيظًا
और हमने उनके एहद व पैमान की वजह से उनके (सर) पर (कोहे) तूर को लटका दिया और हमने उनसे कहा कि (शहर के) दरवाज़े में सजदा करते हुए दाख़िल हो और हमने (ये भी) कहा कि तुम हफ्ते के दिन (हमारे हुक्म से) तजावुज़ न करना और हमने उनसे बहुत मज़बूत एहदो पैमान ले लिया
155فَبِمَا نَقْضِهِم مِّيثَاقَهُمْ وَكُفْرِهِم بِآيَاتِ اللَّهِ وَقَتْلِهِمُ الْأَنبِيَاءَ بِغَيْرِ حَقٍّ وَقَوْلِهِمْ قُلُوبُنَا غُلْفٌ ۚ بَلْ طَبَعَ اللَّهُ عَلَيْهَا بِكُفْرِهِمْ فَلَا يُؤْمِنُونَ إِلَّا قَلِيلًا
फिर उनके अपने एहद तोड़ डालने और एहकामे ख़ुदा से इन्कार करने और नाहक़ अम्बिया को क़त्ल करने और इतरा कर ये कहने की वजह से कि हमारे दिलों पर ग़िलाफ़ चढे हुए हैं (ये तो नहीं) बल्कि ख़ुदा ने उनके कुफ़्र की वजह से उनके दिलों पर मोहर कर दी है तो चन्द आदमियों के सिवा ये लोग ईमान नहीं लाते
156وَبِكُفْرِهِمْ وَقَوْلِهِمْ عَلَىٰ مَرْيَمَ بُهْتَانًا عَظِيمًا
और उनके काफ़िर होने और मरियम पर बहुत बड़ा बोहतान बॉधने कि वजह से
157وَقَوْلِهِمْ إِنَّا قَتَلْنَا الْمَسِيحَ عِيسَى ابْنَ مَرْيَمَ رَسُولَ اللَّهِ وَمَا قَتَلُوهُ وَمَا صَلَبُوهُ وَلَٰكِن شُبِّهَ لَهُمْ ۚ وَإِنَّ الَّذِينَ اخْتَلَفُوا فِيهِ لَفِي شَكٍّ مِّنْهُ ۚ مَا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ إِلَّا اتِّبَاعَ الظَّنِّ ۚ وَمَا قَتَلُوهُ يَقِينًا
और उनके यह कहने की वजह से कि हमने मरियम के बेटे ईसा (स.) ख़ुदा के रसूल को क़त्ल कर डाला हालॉकि न तो उन लोगों ने उसे क़त्ल ही किया न सूली ही दी उनके लिए (एक दूसरा शख्स ईसा) से मुशाबेह कर दिया गया और जो लोग इस बारे में इख्तेलाफ़ करते हैं यक़ीनन वह लोग (उसके हालत) की तरफ़ से धोखे में (आ पड़े) हैं उनको उस (वाक़िये) की ख़बर ही नहीं मगर फ़क्त अटकल के पीछे (पड़े) हैं और ईसा को उन लोगों ने यक़ीनन क़त्ल नहीं किया
158بَل رَّفَعَهُ اللَّهُ إِلَيْهِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَزِيزًا حَكِيمًا
बल्कि ख़ुदा ने उन्हें अपनी तरफ़ उठा लिया और ख़ुदा तो बड़ा ज़बरदस्त तदबीर वाला है
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अनुवाद — अन-निसा 156

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Tuesday, August 18, 2026

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