अन-निसा · 86/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَإِذَا حُيِّيتُم بِتَحِيَّةٍ فَحَيُّوا بِأَحْسَنَ مِنْهَا أَوْ رُدُّوهَا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَسِيبًا ۝٨٦
Wa izaa huyyeetum bitahiy yatin fahaiyoo bi ahsana minhaaa aw ruddoohaa; innal laaha kaana `alaa kulli shai`in Haseeba
📖 हिंदी अर्थ
और जब कोई शख्स सलाम करे तो तुम भी उसके जवाब में उससे बेहतर तरीक़े से सलाम करो या वही लफ्ज़ जवाब में कह दो बेशक ख़ुदा हर चीज़ का हिसाब करने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حُيِّيتُم بِتَحِيَّةٍ: अर्थात जब कोई तुम्हें सलाम या दुआ दे।
  • فَحَيُّوا: तो तुम भी उसका उत्तर दो।
  • بِأَحْسَنَ مِنْهَا: उससे बेहतर शब्दों और अंदाज़ में।
  • أَوْ رُدُّوهَا: या कम से कम उतना ही लौटाओ जितना उसने कहा।
  • حَسِيبًا: हिसाब लेने वाला, हर चीज़ का जवाब देने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब कोई मुसलमान तुम्हें सलाम करे या कोई अच्छी दुआ दे, तो तुम पर उसका जवाब देना अनिवार्य है। यह जवाब या तो उससे बेहतर शब्दों में हो — जैसे वह "अस्सलामु अलैकुम" कहे और तुम "वअलैकुमुस्सलाम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु" कहो — या कम से कम उतने ही शब्दों में लौटाओ जितने उसने कहे। बेहतर जवाब देना अधिक उत्तम है, क्योंकि इसमें मुसलमानों के बीच प्रेम और भाईचारा बढ़ता है। यह भी ध्यान रखें कि सलाम का जवाब केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि चेहरे की खुशी और विनम्रता के साथ होना चाहिए। अल्लाह तआला हर छोटे-बड़े काम का हिसाब लेने वाला है — वह सलाम करने वाले और जवाब देने वाले दोनों के कर्मों को जानता है और हर एक को उसका पूरा बदला देगा। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नज़र में छोटी से छोटी अच्छाई भी बेकार नहीं जाती।

फ़ायदे (सीख):

  1. सलाम का जवाब देना इस्लाम में एक अधिकार और सुन्नत है, जो मुसलमानों के बीच मुहब्बत और एकता को मज़बूत करता है।
  2. बेहतर जवाब देने की तालीम देकर इस्लाम हमें नेकी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की प्रेरणा देता है — यहाँ तक कि साधारण बातचीत में भी।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखता है, इसलिए हमें अपने हर काम — यहाँ तक कि सलाम-कलाम — में भी अच्छाई और भलाई का रास्ता अपनाना चाहिए।
  4. इससे पता चलता है कि इस्लाम में अच्छे अख़लाक़ (शिष्टाचार) की कितनी अहमियत है — एक साधारण सलाम भी इबादत बन सकता है जब उसे अल्लाह की रज़ा के लिए किया जाए।
  5. यह आयत मुसलमानों को आपसी मेल-मिलाप और नरमी से बात करने की तरग़ीब देती है, जिससे समाज में शांति और भाईचारा पैदा होता है।


📜 आयत 84-88 — अन-निसा

84فَقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ لَا تُكَلَّفُ إِلَّا نَفْسَكَ ۚ وَحَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ ۖ عَسَى اللَّهُ أَن يَكُفَّ بَأْسَ الَّذِينَ كَفَرُوا ۚ وَاللَّهُ أَشَدُّ بَأْسًا وَأَشَدُّ تَنكِيلًا
पस (ऐ रसूल) तुम ख़ुदा की राह में जिहाद करो और तुम अपनी ज़ात के सिवा किसी और के ज़िम्मेदार नहीं हो और ईमानदारों को (जेहाद की) तरग़ीब दो और अनक़रीब ख़ुदा काफ़िरों की हैबत रोक देगा और ख़ुदा की हैबत सबसे ज्यादा है और उसकी सज़ा बहुत सख्त है
85مَّن يَشْفَعْ شَفَاعَةً حَسَنَةً يَكُن لَّهُ نَصِيبٌ مِّنْهَا ۖ وَمَن يَشْفَعْ شَفَاعَةً سَيِّئَةً يَكُن لَّهُ كِفْلٌ مِّنْهَا ۗ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ مُّقِيتًا
जो शख्स अच्छे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उस काम के सवाब से कुछ हिस्सा मिलेगा और जो बुरे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उसी काम की सज़ा का कुछ हिस्सा मिलेगा और ख़ुदा तो हर चीज़ पर निगेहबान है
86وَإِذَا حُيِّيتُم بِتَحِيَّةٍ فَحَيُّوا بِأَحْسَنَ مِنْهَا أَوْ رُدُّوهَا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ حَسِيبًا
और जब कोई शख्स सलाम करे तो तुम भी उसके जवाब में उससे बेहतर तरीक़े से सलाम करो या वही लफ्ज़ जवाब में कह दो बेशक ख़ुदा हर चीज़ का हिसाब करने वाला है
87اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ لَيَجْمَعَنَّكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ ۗ وَمَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ حَدِيثًا
अल्लाह तो वही परवरदिगार है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं वह तुमको क़यामत के दिन जिसमें ज़रा भी शक नहीं ज़रूर इकट्ठा करेगा और ख़ुदा से बढ़कर बात में सच्चा कौन होगा
88۞ فَمَا لَكُمْ فِي الْمُنَافِقِينَ فِئَتَيْنِ وَاللَّهُ أَرْكَسَهُم بِمَا كَسَبُوا ۚ أَتُرِيدُونَ أَن تَهْدُوا مَنْ أَضَلَّ اللَّهُ ۖ وَمَن يُضْلِلِ اللَّهُ فَلَن تَجِدَ لَهُ سَبِيلًا
(मुसलमानों) फिर तुमको क्या हो गया है कि तुम मुनाफ़िक़ों के बारे में दो फ़रीक़ हो गए हो (एक मुवाफ़िक़ एक मुख़ालिफ़) हालॉकि ख़ुद ख़ुदा ने उनके करतूतों की बदौलत उनकी अक्लों को उलट पुलट दिया है क्या तुम ये चाहते हो कि जिसको ख़ुदा ने गुमराही में छोड़ दिया है तुम उसे राहे रास्त पर ले आओ हालॉकि ख़ुदा ने जिसको गुमराही में छोड़ दिया है उसके लिए तुममें से कोई शख्स रास्ता निकाल ही नहीं सकता
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अनुवाद — अन-निसा 86

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Tuesday, August 18, 2026

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