Allaahu laaa ilaaha illaa huwa la yajma`annakum ilaa Yawmil Qiyaamati laa raiba feeh; wa man asdaqu mminallaahi hadeesaa
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
अल्लाह तो वही परवरदिगार है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं वह तुमको क़यामत के दिन जिसमें ज़रा भी शक नहीं ज़रूर इकट्ठा करेगा और ख़ुदा से बढ़कर बात में सच्चा कौन होगा
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خدا (وہ معبود برحق ہے کہ) اس کے سوا کوئی عبادت کے لائق نہیں وہ قیامت کے دن تم سب کو ضرور جمع کرے گا اور خدا سے بڑھ کر بات کا سچا کون ہے؟
अल्लाह तो वही परवरदिगार है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं वह तुमको क़यामत के दिन जिसमें ज़रा भी शक नहीं ज़रूर इकट्ठा करेगा और ख़ुदा से बढ़कर बात में सच्चा कौन होगा
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
لَيَجْمَعَنَّكُمْ: अल्लाह की क़सम खाकर कहा गया है कि वह निश्चित रूप से तुम सबको एकत्र करेगा।
إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ: क़यामत के दिन की ओर, यानी क़ब्रों से उठाकर हिसाब के लिए ले जाना।
لَا رَيْبَ فِيهِ: उस दिन के आने में कोई संदेह नहीं है।
حَدِيثًا: बात या वचन।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह ही एकमात्र सच्चा माबूद (पूज्य) है, उसके अलावा कोई भी इबादत के योग्य नहीं। वह अकेला ही सारी मख़लूक़ात (सृष्टि) का ख़ालिक़ और मालिक है। अल्लाह ने अपनी क़सम खाकर वादा किया है कि वह तुम सबको — चाहे तुम पहले आए हो या बाद में — क़यामत के दिन ज़रूर एकत्र करेगा। वह दिन ऐसा है जिसमें कोई शक नहीं, और उस दिन तुम्हें तुम्हारे सारे अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा-पूरा हिसाब दिया जाएगा।
अल्लाह ने जो कुछ भी बताया है — चाहे वह क़यामत के आने की ख़बर हो, मौत के बाद जी उठने की हो, या जन्नत और जहन्नम के बारे में हो — उसकी बात से बढ़कर सच्ची और स्पष्ट कोई बात नहीं हो सकती। क्योंकि अल्लाह न तो झूठ बोलता है, न उसे किसी की परवाह है, और न ही उसके वचन में कोई कमी या परिवर्तन आ सकता है। इसलिए उसकी हर ख़बर पर बिना किसी संदेह के ईमान लाना चाहिए।
फ़ायदे (सबक):
तौहीद की पुख्ता नींव: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के अलावा कोई सच्चा माबूद नहीं है, और यही इस्लाम की सबसे बुनियादी शिक्षा है। जब दिल इस हक़ीक़त पर जम जाता है तो इंसान की ज़िंदगी में सुकून और स्थिरता आती है।
आख़िरत पर यक़ीन: क़यामत के दिन का आना अल्लाह का पक्का वादा है। इस यक़ीन से इंसान की ज़िंदगी का हर काम संवर जाता है — वह जानता है कि उसका हर अच्छा काम बेकार नहीं जाएगा और हर बुराई का सामना उसे करना होगा। यही विश्वास इंसान को नेकी की तरफ़ खींचता है और गुनाह से रोकता है।
अल्लाह का सच्चा वचन: अल्लाह की बात से बढ़कर सच्ची कोई बात नहीं। जब हमें यह मालूम है कि अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता, तो हमें उस पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। यह भरोसा इंसान को मुश्किलों में सब्र और आसानियों में शुक्र करना सिखाता है।
अमल की तरग़ीब: यह आयत हमें बताती है कि हमारी ज़िंदगी का हर पल हिसाब में आएगा। इसलिए हमें अपने कर्मों को सुधारना चाहिए, नेकी में जल्दी करनी चाहिए और अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखते हुए उसके अज़ाब से डरना चाहिए।
जो शख्स अच्छे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उस काम के सवाब से कुछ हिस्सा मिलेगा और जो बुरे काम की सिफ़ारिश करे तो उसको भी उसी काम की सज़ा का कुछ हिस्सा मिलेगा और ख़ुदा तो हर चीज़ पर निगेहबान है
अल्लाह तो वही परवरदिगार है जिसके सिवा कोई क़ाबिले परस्तिश नहीं वह तुमको क़यामत के दिन जिसमें ज़रा भी शक नहीं ज़रूर इकट्ठा करेगा और ख़ुदा से बढ़कर बात में सच्चा कौन होगा
(मुसलमानों) फिर तुमको क्या हो गया है कि तुम मुनाफ़िक़ों के बारे में दो फ़रीक़ हो गए हो (एक मुवाफ़िक़ एक मुख़ालिफ़) हालॉकि ख़ुद ख़ुदा ने उनके करतूतों की बदौलत उनकी अक्लों को उलट पुलट दिया है क्या तुम ये चाहते हो कि जिसको ख़ुदा ने गुमराही में छोड़ दिया है तुम उसे राहे रास्त पर ले आओ हालॉकि ख़ुदा ने जिसको गुमराही में छोड़ दिया है उसके लिए तुममें से कोई शख्स रास्ता निकाल ही नहीं सकता
उन लोगों की ख्वाहिश तो ये है कि जिस तरह वह काफ़िर हो गए तुम भी काफ़िर हो जाओ ताकि तुम उनके बराबर हो जाओ पस जब तक वह ख़ुदा की राह में हिजरत न करें तो उनमें से किसी को दोस्त न बनाओ फिर अगर वह उससे भी मुंह मोड़ें तो उन्हें गिरफ्तार करो और जहॉ पाओ उनको क़त्ल करो और उनमें से किसी को न अपना दोस्त बनाओ न मददगार
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