अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عُذْتُ – मैंने पनाह मांगी, मैं सुरक्षा चाहता हूँ।
- تَرْجُمُونِ – तुम मुझे पत्थर मारकर क़त्ल कर दो, यानी मुझे मार डालो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन और उसकी क़ौम के सामने अपनी रिसालत का सच्चा सबूत पेश किया और उन्हें अल्लाह की तौहीद की दावत दी, तो उन्होंने धमकी दी कि वे उन्हें पत्थर मारकर क़त्ल कर देंगे। उस वक़्त हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने बड़े ही पुख्ता ईमान और भरोसे के साथ फ़रमाया: "मैंने अपने रब और तुम्हारे रब की पनाह ले ली है, उससे कि तुम मुझे पत्थर मारकर क़त्ल कर दो।"
यानी मैं उस अल्लाह की सुरक्षा में हूँ जो मेरा भी रब है और तुम्हारा भी रब है। वही मेरी हिफ़ाज़त करने वाला है, और उसकी पनाह में कोई मुझे नुक़्सान नहीं पहुँचा सकता। यह एक मुकम्मल ईमान का इज़हार था कि दावत देने वाला सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखता है, और उसकी हिफ़ाज़त में ख़ुद को महफ़ूज़ समझता है, चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि जब हम हक़ की दावत देते हैं, तो हमें अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ही सबसे बड़ा हाफ़िज़ है, और जो उसकी पनाह में आ जाए, उसे किसी का डर नहीं होता। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का यह अंदाज़ हमें सिखाता है कि सच्चाई पर क़ायम रहते हुए अल्लाह की राह में हर मुश्किल का सामना करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि दुश्मनों की धमकियाँ कभी भी हक़ की राह में रुकावट नहीं बननी चाहिए। जब हमारा भरोसा अल्लाह पर होता है, तो वह हमें हर बुराई से बचाता है। यही वह ताक़त है जो हर दौर में अल्लाह के नबियों और नेक बंदों के काम आई। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह की पनाह माँगें और उसी पर भरोसा रखें, क्योंकि वही सबसे बड़ा संरक्षक और मददगार है।
📜 आयत 18-22 — अद-दुखान
अनुवाद — अद-दुखान 20
सूरा अद-दुखान आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इस बात से कि तुम मुझे संगसार करो मैं…सूरा आयत 20/59 — अद-दुखान الدخان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अद-दुखान सुनें, अद-दुखान अनुवाद, अद-दुखान mp3, अद-दुखान pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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