अद-दुखान · 42/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
إِلَّا مَن رَّحِمَ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ هُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝٤٢
Illaa mar rahimal laah` innahoo huwal `azeezur raheem
📖 हिंदी अर्थ
मगर जिन पर ख़ुदा रहम फरमाए बेशक वह (ख़ुदा) सब पर ग़ालिब बड़ा रहम करने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَّا مَن رَّحِمَ اللَّهُ: लेकिन जिस पर अल्लाह ने रहम (दया) की।
  • الْعَزِيزُ: वह सर्वशक्तिमान है, जिसे कोई हरा नहीं सकता, और जो अपने दुश्मनों से बदला लेने में पूरी ताकत रखता है।
  • الرَّحِيمُ: वह अत्यंत दयालु है, जो अपने बंदों पर रहमत (कृपा) करता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन (क़ियामत) के हालात बयान कर रही है, जब कोई किसी के काम नहीं आएगा। न कोई दोस्त किसी दोस्त की मदद कर सकेगा, न कोई रिश्तेदार किसी रिश्तेदार को बचा सकेगा। हर इंसान उस दिन सिर्फ अपनी ही फिक्र में डूबा होगा। लेकिन इस सख्त हालात के बीच अल्लाह तआला एक रहमत की खिड़की खोलता है — "मगर जिस पर अल्लाह ने रहम (दया) की।" यानी जिन मोमिनीन (ईमान वालों) पर अल्लाह की खास रहमत होगी, वे एक-दूसरे की शफ़ाअत (सिफारिश) कर सकेंगे, लेकिन यह भी अल्लाह की इजाज़त से ही होगा। यह अल्लाह का खास इनाम है उन लोगों के लिए जिन्होंने दुनिया में ईमान और नेक अमल (अच्छे काम) अपनाए।

फिर अल्लाह तआला अपनी दो सिफ़ात (विशेषताओं) का ज़िक्र करता है: "बेशक वही अल-अज़ीज़ (सर्वशक्तिमान) और अर-रहीम (अत्यंत दयालु) है।" यानी अल्लाह की ताकत और उसकी रहमत दोनों ही कामिल (पूर्ण) हैं। वह अपने दुश्मनों पर अपनी ताकत दिखाने में किसी से नहीं डरता, और अपने नेक बंदों पर रहमत करने में कोई उसे रोक नहीं सकता। यही उसकी शान है — जिस पर वह चाहे रहम करे, उसे कोई अज़ाब नहीं दे सकता, और जिसे वह अज़ाब देना चाहे, उसे कोई बचा नहीं सकता।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि क़ियामत के दिन कोई भी इंसानी ताकत, रिश्ते, या दौलत काम नहीं आएगी — सिर्फ अल्लाह की रहमत ही काम आएगी। इसलिए हमें चाहिए कि इस दुनिया में ही अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें। यह रहमत कैसे मिलेगी? ईमान लाकर, अच्छे काम करके, और अल्लाह के बताए रास्ते पर चलकर। अल्लाह की रहमत इतनी वसी (विस्तृत) है कि वह तौबा (पश्चाताप) करने वालों को भी गले लगाती है। जो भी अपने गुनाहों से तौबा करके अल्लाह की तरफ लौटता है, अल्लाह उस पर रहमत करता है। यही सबसे बड़ी खुशखबरी है — अल्लाह की रहमत उसकी ताकत से भी बड़ी है, और वह अपने बंदों को माफ करना पसंद करता है। आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रहमत के काबिल बनाएं, ताकि उस दिन हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन पर रहमत की जाएगी।



📜 आयत 40-44 — अद-दुखान

40إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ مِيقَاتُهُمْ أَجْمَعِينَ
बेशक फ़ैसला (क़यामत) का दिन उन सब (के दोबार ज़िन्दा होने) का मुक़र्रर वक्त है
41يَوْمَ لَا يُغْنِي مَوْلًى عَن مَّوْلًى شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
जिस दिन कोई दोस्त किसी दोस्त के कुछ काम न आएगा और न उन की मदद की जाएगी
42إِلَّا مَن رَّحِمَ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ هُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
मगर जिन पर ख़ुदा रहम फरमाए बेशक वह (ख़ुदा) सब पर ग़ालिब बड़ा रहम करने वाला है
43إِنَّ شَجَرَتَ الزَّقُّومِ
(आख़ेरत में) थोहड़ का दरख्त
44طَعَامُ الْأَثِيمِ
ज़रूर गुनेहगार का खाना होगा
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
42आयत

अनुवाद — अद-दुखान 42

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Tuesday, August 18, 2026

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