अन-नज्म · 35/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
أَعِندَهُ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰ ۝٣٥
A`indahoo `ilmul ghaibi fahuwa yaraa
📖 हिंदी अर्थ
क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • عِلْمُ الْغَيْبِ: छिपी हुई बातों का ज्ञान, वह ज्ञान जो केवल अल्लाह के पास है।
  • فَهُوَ يَرَىٰ: तो वह उसे देख रहा है, अर्थात वह उस छिपी हुई चीज़ को प्रत्यक्ष रूप से जानता और देखता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति के बारे में है जिसने अपने रिश्तेदारों और ज़रूरतमंदों की मदद करना बंद कर दिया और अपना धन ख़र्च करने से कंजूसी की। अल्लाह तआला पूछते हैं: क्या उस व्यक्ति के पास छिपी हुई चीज़ों (ग़ैब) का ज्ञान है कि वह जानता है कि उसका धन ख़त्म हो जाएगा, इसलिए उसने ख़र्च करना बंद कर दिया? क्या वह भविष्य को देख सकता है? क्या उसे यह पता है कि उसके पास जो कुछ है वह समाप्त होने वाला है, इसलिए उसने अपनी भलाई और दान से हाथ रोक लिया?

हरगिज़ नहीं! यह बात बिल्कुल गलत है। उसने दान, सदक़ा, भलाई और रिश्तेदारों से जुड़ाव (सिला-रहमी) इसलिए नहीं छोड़ा कि उसे ग़ैब का ज्ञान है, बल्कि उसने ऐसा केवल कंजूसी और हवस की वजह से किया। वह अल्लाह पर झूठ बोल रहा है और उस चीज़ का दावा कर रहा है जो उसके पास नहीं है। वह यह दिखावा करता है कि उसे ग़ैब की जानकारी है, जबकि ग़ैब का ज्ञान केवल अल्लाह को है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने धन और रिज़्क़ पर अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ही रिज़्क़ देने वाला है और वही उसे बढ़ाने और घटाने की शक्ति रखता है। कंजूसी और हवस कभी भी रिज़्क़ नहीं रोकती, बल्कि अल्लाह की राह में ख़र्च करने से रिज़्क़ में बरकत होती है।

इस आयत में एक बड़ी शिक्षा है कि हमें उन लोगों की तरह नहीं बनना चाहिए जो अपने धन को लेकर इतने चिंतित हो जाते हैं कि अल्लाह के हुक्मों को भूल जाते हैं। अल्लाह ने हमें जो दिया है, उसमें से दूसरों का हक़ अदा करना चाहिए। जो व्यक्ति अल्लाह की राह में ख़र्च करता है, अल्लाह उसे और अधिक देता है, और जो कंजूसी करता है, वह केवल अपने आप को नुक़सान पहुँचाता है।

याद रखिए! ग़ैब का ज्ञान केवल अल्लाह के पास है। हमें अपने भविष्य की चिंता में अल्लाह के आदेशों की अवहेलना नहीं करनी चाहिए। अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी राह में ख़र्च करें, और वह हमें कभी निराश नहीं करेगा। यही सच्ची सफलता का मार्ग है।



📜 आयत 33-37 — सूरा अन-नज्म

33أَفَرَأَيْتَ الَّذِي تَوَلَّىٰ
भला (ऐ रसूल) तुमने उस शख़्श को भी देखा जिसने रदगिरदानी की
34وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰ
और थोड़ा सा (ख़ुदा की राह में) दिया और फिर बन्द कर दिया
35أَعِندَهُ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰ
क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है
36أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِي صُحُفِ مُوسَىٰ
क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है
37وَإِبْرَاهِيمَ الَّذِي وَفَّىٰ
और इबराहीम के (सहीफ़ों में)
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — अन-नज्म 35

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Wednesday, September 30, 2026

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