अल-अनआम · 67/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
لِّكُلِّ نَبَإٍ مُّسْتَقَرٌّ ۚ وَسَوْفَ تَعْلَمُونَ ۝٦٧
Likulli naba im mustaqar runw wa sawfa ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और जब तुम उन लोगों को देखो जो हमारी आयतों में बेहूदा बहस कर रहे हैं तो उन (के पास) से टल जाओ यहाँ तक कि वह लोग उसके सिवा किसी और बात में बहस करने लगें और अगर (हमारा ये हुक्म) तुम्हें शैतान भुला दे तो याद आने के बाद ज़ालिम लोगों के साथ हरगिज़ न बैठना
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • नबअ (خبر): कोई समाचार या बात।
  • मुस्तक़र्र: वह स्थान या समय जहाँ वह बात ठहरकर पूरी हो, उसका अंजाम और नतीजा।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हर ख़बर और हर बात के लिए एक निश्चित समय और एक अंतिम परिणाम है, जिस पर वह ठहरकर पूरी होती है। चाहे वह बात सच्ची हो या झूठी, अच्छी हो या बुरी — उसका एक अंजाम ज़रूर सामने आएगा। जब वह समय आएगा, तो सच और झूठ साफ़ हो जाएगा, और हक़ बातिल से अलग दिख जाएगा।

यह आयत उन काफ़िरों को धमकी दे रही है जो नबी (ﷺ) की बातों को झुठलाते थे और मज़ाक उड़ाते थे। उनसे कहा जा रहा है कि जो ख़बरें तुम्हें सुनाई जा रही हैं — चाहे वह अज़ाब की धमकी हो या क़यामत की घटनाएँ — उनका एक समय और स्थान निश्चित है, जब वे पूरी होकर दिख जाएँगी। फिर तुम ख़ुद जान लोगे कि कौन सच्चा था और कौन झूठा। यह बात उनके लिए एक कड़ी चेतावनी है कि जब अल्लाह का अज़ाब आएगा या क़यामत का दिन आएगा, तो तुम्हें अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन तब पछताना बेकार होगा।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह की हर बात और हर वादा सच्चा है, और उसका पूरा होना निश्चित है — चाहे वह जल्दी हो या देर से।
  2. हमें सिखाती है कि सब्र रखें और जल्दबाज़ी न करें; हर सच्चाई का एक वक़्त है, और अल्लाह का इंतज़ाम बेहतरीन है।
  3. यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और उसकी तरफ़ लौटने की तरग़ीब देती है, ताकि हम उन लोगों की तरह न हों जो हक़ को झुठलाकर पछतावे में रह गए।
  4. हमें यह भी सिखाती है कि हर बात का अंजाम सामने आएगा, इसलिए हमें हमेशा सच बोलना चाहिए और झूठ से बचना चाहिए, क्योंकि झूठ का परदा ज़रूर फटेगा।
🎧 सुनें

📜 आयत 65-69 — अल-अनआम

65قُلْ هُوَ الْقَادِرُ عَلَىٰ أَن يَبْعَثَ عَلَيْكُمْ عَذَابًا مِّن فَوْقِكُمْ أَوْ مِن تَحْتِ أَرْجُلِكُمْ أَوْ يَلْبِسَكُمْ شِيَعًا وَيُذِيقَ بَعْضَكُم بَأْسَ بَعْضٍ ۗ انظُرْ كَيْفَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ لَعَلَّهُمْ يَفْقَهُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि वही उस पर अच्छी तरह क़ाबू रखता है कि अगर (चाहे तो) तुम पर अज़ाब तुम्हारे (सर के) ऊपर से नाज़िल करे या तुम्हारे पॉव के नीचे से (उठाकर खड़ा कर दे) या एक गिरोह को दूसरे से भिड़ा दे और तुम में से कुछ लोगों को बाज़ आदमियों की लड़ाई का मज़ा चखा दे ज़रा ग़ौर तो करो हम किस किस तरह अपनी आयतों को उलट पुलट के बयान करते हैं ताकि लोग समझे
66وَكَذَّبَ بِهِ قَوْمُكَ وَهُوَ الْحَقُّ ۚ قُل لَّسْتُ عَلَيْكُم بِوَكِيلٍ
और उसी (क़ुरान) को तुम्हारी क़ौम ने झुठला दिया हालॉकि वह बरहक़ है (ऐ रसूल) तुम उनसे कहो कि मैं तुम पर कुछ निगेहबान तो हूं नहीं हर ख़बर (के पूरा होने) का एक ख़ास वक्त मुक़र्रर है और अनक़रीब (जल्दी) ही तुम जान लोगे
67لِّكُلِّ نَبَإٍ مُّسْتَقَرٌّ ۚ وَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
और जब तुम उन लोगों को देखो जो हमारी आयतों में बेहूदा बहस कर रहे हैं तो उन (के पास) से टल जाओ यहाँ तक कि वह लोग उसके सिवा किसी और बात में बहस करने लगें और अगर (हमारा ये हुक्म) तुम्हें शैतान भुला दे तो याद आने के बाद ज़ालिम लोगों के साथ हरगिज़ न बैठना
68وَإِذَا رَأَيْتَ الَّذِينَ يَخُوضُونَ فِي آيَاتِنَا فَأَعْرِضْ عَنْهُمْ حَتَّىٰ يَخُوضُوا فِي حَدِيثٍ غَيْرِهِ ۚ وَإِمَّا يُنسِيَنَّكَ الشَّيْطَانُ فَلَا تَقْعُدْ بَعْدَ الذِّكْرَىٰ مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
और ऐसे लोगों (के हिसाब किताब) का जवाब देही कुछ परहेज़गारो पर तो है नहीं मगर (सिर्फ नसीहतन) याद दिलाना (चाहिए) ताकि ये लोग भी परहेज़गार बनें
69وَمَا عَلَى الَّذِينَ يَتَّقُونَ مِنْ حِسَابِهِم مِّن شَيْءٍ وَلَٰكِن ذِكْرَىٰ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
और जिन लोगों ने अपने दीन को खेल और तमाशा बना रखा है और दुनिया की ज़िन्दगी ने उन को धोके में डाल रखा है ऐसे लोगों को छोड़ो और क़ुरान के ज़रिए से उनको नसीहत करते रहो (ऐसा न हो कि कोई) शख़्श अपने करतूत की बदौलत मुब्तिलाए बला हो जाए (क्योंकि उस वक्त) तो ख़ुदा के सिवा उसका न कोई सरपरस्त होगा न सिफारिशी और अगर वह अपने गुनाह के ऐवज़ सारे (जहाँन का) बदला भी दे तो भी उनमें से एक न लिया जाएगा जो लोग अपनी करनी की बदौलत मुब्तिलाए बला हुए है उनको पीने के लिए खौलता हुआ गर्म पानी (मिलेगा) और (उन पर) दर्दनाक अज़ाब होगा क्योंकर वह कुफ़्र किया करते थे
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
67आयत

अनुवाद — अल-अनआम 67

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सूरा आयत 67/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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