अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- حِسَابِيَهْ — मेरा हिसाब (लेखा-जोखा)।
तफ़सीर:
जब कोई व्यक्ति अपना आमालनामा बाएँ हाथ में पाता है, तो उस पर क़ियामत का दृश्य इतना भयावह होता है कि वह पछतावे और हैरानी से कहता है: "काश! मुझे मेरा नामा-ए-आमाल न दिया जाता, और काश! मैं जानता ही नहीं कि मेरा हिसाब क्या है।" यह वह क्षण है जब इंसान को अपने किए पर पूरा पछतावा होता है, लेकिन पछतावे का वह समय अब बिल्कुल बेकार है। वह दुनिया में जो कुछ भी करता रहा, उसका हर छोटा-बड़ा कर्म उसके सामने रख दिया गया है, और उसे समझ में भी नहीं आ रहा कि यह हिसाब कैसा होगा और उसका अंजाम क्या होगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि आज हमें अपने कर्मों की जाँच स्वयं करनी चाहिए, ताकि क़ियामत के दिन हमें शर्मिंदगी और पछतावे का सामना न करना पड़े। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में जीवन दिया है ताकि हम उसकी इबादत करें, उसके आदेशों का पालन करें और अपने आपको उसकी रहमत के काबिल बनाएँ। जो व्यक्ति आज अपने रब की तरफ रुजू करता है, अपने गुनाहों से तौबा करता है और अच्छे कर्म करता है, वह उस भयानक दिन से बच जाएगा। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है; उसने हमें मौका दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, अपने हिसाब को आसान बना लें, और उस दिन की शर्मिंदगी और पछतावे से खुद को बचा लें। क़ियामत का हिसाब सच है, और उस दिन हर इंसान को अपने कर्मों का सामना करना होगा। इसलिए आज ही अपने आपको सुधारें, नेकी की राह अपनाएँ, और अल्लाह की रहमत के साये में आ जाएँ — क्योंकि उसकी रहमत सबसे बड़ी नेमत है, और उसका इनाम हमेशा रहने वाली खुशियों से भरा है।
📜 आयत 24-28 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 26
सूरा अल-हाक़्का आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुझे न मालूल होता कि मेरा हिसाब क्या हैसूरा आयत 26/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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