अल-हाक़्का · 26/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ ۝٢٦
Wa lam adri maa hisaabiyah
📖 हिंदी अर्थ
और मुझे न मालूल होता कि मेरा हिसाब क्या है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حِسَابِيَهْ — मेरा हिसाब (लेखा-जोखा)।

तफ़सीर:

जब कोई व्यक्ति अपना आमालनामा बाएँ हाथ में पाता है, तो उस पर क़ियामत का दृश्य इतना भयावह होता है कि वह पछतावे और हैरानी से कहता है: "काश! मुझे मेरा नामा-ए-आमाल न दिया जाता, और काश! मैं जानता ही नहीं कि मेरा हिसाब क्या है।" यह वह क्षण है जब इंसान को अपने किए पर पूरा पछतावा होता है, लेकिन पछतावे का वह समय अब बिल्कुल बेकार है। वह दुनिया में जो कुछ भी करता रहा, उसका हर छोटा-बड़ा कर्म उसके सामने रख दिया गया है, और उसे समझ में भी नहीं आ रहा कि यह हिसाब कैसा होगा और उसका अंजाम क्या होगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि आज हमें अपने कर्मों की जाँच स्वयं करनी चाहिए, ताकि क़ियामत के दिन हमें शर्मिंदगी और पछतावे का सामना न करना पड़े। अल्लाह तआला ने हमें दुनिया में जीवन दिया है ताकि हम उसकी इबादत करें, उसके आदेशों का पालन करें और अपने आपको उसकी रहमत के काबिल बनाएँ। जो व्यक्ति आज अपने रब की तरफ रुजू करता है, अपने गुनाहों से तौबा करता है और अच्छे कर्म करता है, वह उस भयानक दिन से बच जाएगा। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है; उसने हमें मौका दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, अपने हिसाब को आसान बना लें, और उस दिन की शर्मिंदगी और पछतावे से खुद को बचा लें। क़ियामत का हिसाब सच है, और उस दिन हर इंसान को अपने कर्मों का सामना करना होगा। इसलिए आज ही अपने आपको सुधारें, नेकी की राह अपनाएँ, और अल्लाह की रहमत के साये में आ जाएँ — क्योंकि उसकी रहमत सबसे बड़ी नेमत है, और उसका इनाम हमेशा रहने वाली खुशियों से भरा है।



📜 आयत 24-28 — सूरा अल-हाक़्का

24كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا أَسْلَفْتُمْ فِي الْأَيَّامِ الْخَالِيَةِ
जो कारगुज़ारियाँ तुम गुज़िशता अय्याम में करके आगे भेज चुके हो उसके सिले में मज़े से खाओ पियो
25وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِشِمَالِهِ فَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُوتَ كِتَابِيَهْ
और जिसका नामए आमाल उनके बाएँ हाथ में दिया जाएगा तो वह कहेगा ऐ काश मुझे मेरा नामए अमल न दिया जाता
26وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ
और मुझे न मालूल होता कि मेरा हिसाब क्या है
27يَا لَيْتَهَا كَانَتِ الْقَاضِيَةَ
ऐ काश मौत ने (हमेशा के लिए मेरा) काम तमाम कर दिया होता
28مَا أَغْنَىٰ عَنِّي مَالِيَهْ ۜ
(अफ़सोस) मेरा माल मेरे कुछ भी काम न आया
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
26आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 26

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Friday, October 2, 2026

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