अल-आराफ · 116/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالَ أَلْقُوا ۖ فَلَمَّا أَلْقَوْا سَحَرُوا أَعْيُنَ النَّاسِ وَاسْتَرْهَبُوهُمْ وَجَاءُوا بِسِحْرٍ عَظِيمٍ ۝١١٦
Qaala alqoo falam maaa alqaw saharooo a`yunannaasi wastarhaboohum wa jaaa`oo bisihrin `azeem
📖 हिंदी अर्थ
मूसा ने कहा (अच्छा पहले) तुम ही फेक (के अपना हौसला निकालो) तो तब जो ही उन लोगों ने (अपनी रस्सियाँ) डाली तो लोगों की नज़र बन्दी कर दी (कि सब सापँ मालूम होने लगे) और लोगों को डरा दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَحَرُوا أَعْيُنَ النَّاسِ: उन्होंने लोगों की आँखों पर जादू कर दिया, यानी उनकी आँखों को सच्चाई देखने से रोक दिया और उन्हें धोखा दिया।
  • وَاسْتَرْهَبُوهُمْ: उन्होंने लोगों को बहुत डराया और उनके दिलों में खौफ पैदा कर दिया।
  • سِحْرٍ عَظِيمٍ: बहुत बड़ा और शक्तिशाली जादू, जो अपनी तरकीब और दिखावे में अत्यंत प्रभावशाली था।

तफसीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि जादूगरों ने पहले अपना जादू दिखाने की जिद की है, तो उन्होंने अल्लाह पर पूरा भरोसा करते हुए और उनकी धमकियों की परवाह किए बिना कहा: "तुम ही पहले फेंको।" जब जादूगरों ने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ फेंकीं, तो उन्होंने लोगों की आँखों पर जादू कर दिया—यानी उनकी नज़रों को धोखा दिया और उन्हें यह भ्रम पैदा किया कि रस्सियाँ और लाठियाँ साँप बनकर चल रही हैं, जबकि वास्तव में वह सिर्फ एक झूठा दिखावा और धोखा था। उन्होंने लोगों के दिलों में इतना डर पैदा कर दिया कि वे सहम गए, और वे अपनी कला में एक बहुत बड़ा और अद्भुत जादू लेकर आए, जिसने देखने वालों को हैरान कर दिया।

फ़ायदे (उपदेश):

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि सत्य के पैरोकारों को कभी भी असत्य की ताकत से नहीं घबराना चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जादूगरों के विशाल जादू और उनके डरावने दिखावे के बावजूद अल्लाह पर भरोसा बनाए रखा और उनकी चुनौती को बेखौफ होकर स्वीकार किया। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह पर पूरा भरोसा और सच्चाई पर स्थिर रहना ही असली कामयाबी की कुंजी है। साथ ही, यह भी सबक है कि दुनिया का दिखावा और जादू—चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो—अल्लाह की शक्ति के सामने बेकार है, और अंततः सच्चाई ही जीतती है। यह आयत मुसलमानों को हौसला देती है कि वे कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अल्लाह की मदद पर भरोसा रखें और सत्य के मार्ग से विचलित न हों।



📜 आयत 114-118 — अल-आराफ

114قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ لَمِنَ الْمُقَرَّبِينَ
फिरऔन ने कहा (हॉ इनाम ही नहीं) बल्कि फिर तो तुम हमारे दरबार के मुक़र्रेबीन में से होगें
115قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِمَّا أَن تُلْقِيَ وَإِمَّا أَن نَّكُونَ نَحْنُ الْمُلْقِينَ
और मुक़र्रर वक्त पर सब जमा हुए तो बोल उठे कि ऐ मूसा या तो तुम्हें (अपने मुन्तसिर (मंत्र)) या हम ही (अपने अपने मंत्र फेके)
116قَالَ أَلْقُوا ۖ فَلَمَّا أَلْقَوْا سَحَرُوا أَعْيُنَ النَّاسِ وَاسْتَرْهَبُوهُمْ وَجَاءُوا بِسِحْرٍ عَظِيمٍ
मूसा ने कहा (अच्छा पहले) तुम ही फेक (के अपना हौसला निकालो) तो तब जो ही उन लोगों ने (अपनी रस्सियाँ) डाली तो लोगों की नज़र बन्दी कर दी (कि सब सापँ मालूम होने लगे) और लोगों को डरा दिया
117۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَلْقِ عَصَاكَ ۖ فَإِذَا هِيَ تَلْقَفُ مَا يَأْفِكُونَ
और उन लोगों ने बड़ा (भारी जादू दिखा दिया और हमने मूसा के पास वही भेजी कि (बैठे क्या हो) तुम भी अपनी छड़ी डाल दो तो क्या देखते हैं कि वह छड़ी उनके बनाए हुए (झूठे साँपों को) एक एक करके निगल रही है
118فَوَقَعَ الْحَقُّ وَبَطَلَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
अल किस्सा हक़ बात तो जम के बैठी और उनकी सारी कारस्तानी मटियामेट हो गई
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अनुवाद — अल-आराफ 116

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Tuesday, August 18, 2026

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