अल-मुतफ्फिफीन · 2/36
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुतफ्फिफीन
الَّذِينَ إِذَا اكْتَالُوا عَلَى النَّاسِ يَسْتَوْفُونَ ۝٢
Allazeena izak taaloo `alan naasi yastawfoon
📖 हिंदी अर्थ
जो औरें से नाप कर लें तो पूरा पूरा लें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اكتالوا (इक्तालू): नाप तौल कर लेना, यानी दूसरों से कोई चीज़ नापकर या तौलकर लेना।
  • على الناس (अलान-नास): लोगों से, यानी जब वे लोगों से कुछ लेते हैं।
  • يستوفون (यस्तौफ़ून): पूरा-पूरा हक़ लेना, किसी कमी के बिना अपना पूरा नाप या तौल प्राप्त करना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की बुरी आदत को बयान कर रही है जो नाप-तौल में धोखा देते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये वे लोग हैं जो जब दूसरों से कोई चीज़ नापकर या तौलकर लेते हैं, तो अपना पूरा हक़ लेते हैं—न तो कम लेते हैं और न ही उसमें कोई कसर छोड़ते हैं। वे अपने लिए पूरी मात्रा चाहते हैं, पूरा-पूरा नाप और पूरा-पूरा तौल। लेकिन जब वे दूसरों को देते हैं, तो नाप-तौल में कमी करते हैं, जैसा कि अगली आयतों में बताया जाएगा।

यह आयत उन लोगों के दोहरे मापदंड को उजागर करती है—जब वे लेते हैं तो पूरा लेते हैं, लेकिन जब देते हैं तो कम देते हैं। यह एक बहुत बड़ी नैतिक कमज़ोरी और सामाजिक बुराई है, जो समाज में अविश्वास और दरार पैदा करती है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इस्लाम ने नाप-तौल में पूरी ईमानदारी का हुक्म दिया है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह लेते और देते दोनों समय पूरी ईमानदारी बरते। जैसे वह अपने हक़ के लिए पूरी मात्रा चाहता है, वैसे ही दूसरों को भी पूरी मात्रा दे। यही ईमानदारी और अमानतदारी का तक़ाज़ा है।

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों को सख़्त तनबीह कर रहे हैं जो इस बुराई में मुब्तिला हैं। यह एक गंभीर चेतावनी है कि याद रखो, अल्लाह तुम्हें देख रहा है और तुम्हें अपने कर्मों का हिसाब देना होगा। जो व्यक्ति दूसरों के हक़ में कमी करता है, वह वास्तव में अपने ही नुक़सान का सामान करता है।

इस आयत की रौशनी में हमें अपने जीवन का जायज़ा लेना चाहिए—क्या हम व्यापार, लेन-देन, नौकरी, या किसी भी मामले में दूसरों के हक़ को पूरा करते हैं? क्या हम किसी को धोखा देते हैं? यह आयत हमें सिखाती है कि ईमानदारी और दूसरों के हक़ का सम्मान करना ही सच्चे मुसलमान की पहचान है। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो अमानतदार और ईमानदार होते हैं, और वह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता करता है।



📜 आयत 1-4 — सूरा अल-मुतफ्फिफीन

1وَيْلٌ لِّلْمُطَفِّفِينَ
नाप तौल में कमी करने वालों की ख़राबी है
2الَّذِينَ إِذَا اكْتَالُوا عَلَى النَّاسِ يَسْتَوْفُونَ
जो औरें से नाप कर लें तो पूरा पूरा लें
3وَإِذَا كَالُوهُمْ أَو وَّزَنُوهُمْ يُخْسِرُونَ
और जब उनकी नाप या तौल कर दें तो कम कर दें
4أَلَا يَظُنُّ أُولَٰئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ
क्या ये लोग इतना भी ख्याल नहीं करते
अल-मुतफ्फिफीनकुरान सूची
36आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अल-मुतफ्फिफीन 2

सूरा अल-मुतफ्फिफीन आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो औरें से नाप कर लें तो पूरा पूरा लें

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Monday, September 28, 2026

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