अल-मुतफ्फिफीन · 32/36
अनुवाद उच्चारण — अल-मुतफ्फिफीन
وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوا إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَضَالُّونَ ۝٣٢
Wa izaa ra awhum qaalooo inna haaa`ulaaa`i ladaaal loon
📖 हिंदी अर्थ
और जब उन मोमिनीन को देखते तो कह बैठते थे कि ये तो यक़ीनी गुमराह हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • رَأَوْهُمْ: उन्होंने उन्हें देखा (यानी काफ़िरों ने मोमिनों को देखा)
  • لَضَالُّونَ: ये लोग ज़रूर गुमराह हैं, रास्ते से भटके हुए हैं

तफ़सीर:

यह आयत उन काफ़िरों के हाल का वर्णन करती है जो दुनिया में मोमिनों का मज़ाक उड़ाया करते थे। जब ये काफ़िर मोमिनों को देखते थे, तो आपस में कहते थे कि "ये लोग ज़रूर गुमराह हैं" — यानी ये मोमिन अपने दीन को छोड़कर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैरवी में भटक गए हैं। उनकी यह बात उनके अहंकार और घमंड से पैदा हुई थी, क्योंकि उन्होंने अपने बाप-दादा के दीन को ही सच्चा मान रखा था और हक़ को कबूल करने से इनकार कर दिया था।

ग़ौरतलब है कि ये काफ़िर मोमिनों की निगरानी के लिए नहीं भेजे गए थे, न उन्हें यह हक़ था कि वे मोमिनों के ईमान और अमल पर फ़ैसला सुनाएँ। यह तो उनकी अपनी नादानी और सरकशी थी कि वे हक़ को गुमराही समझ रहे थे। लेकिन अल्लाह तआला ने मोमिनों को दिलासा दी कि उनकी इन बातों से घबराना नहीं, क्योंकि असली फ़ैसला क़ियामत के दिन होगा।

क़ियामत के दिन हालात बिल्कुल उलट जाएँगे। जिस तरह दुनिया में काफ़िर मोमिनों का मज़ाक उड़ाते थे, उसी तरह आख़िरत में मोमिन काफ़िरों पर हँसेंगे और उनका मज़ाक उड़ाएँगे। यह अल्लाह का इंसाफ़ है कि जो लोग दुनिया में हक़ पर चलने वालों का उपहास करते हैं, वे आख़िरत में रुसवा होंगे और मोमिनों को वह इज़्ज़त मिलेगी जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार की है।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि मोमिन को चाहिए कि वह लोगों की बातों और उनके मज़ाक से विचलित न हो। जब हम सच्चे रास्ते पर हों, तो दुनिया के तमाम लोग भी हमें गुमराह कहें, तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। अल्लाह की रज़ा और उसका इनाम ही असली कामयाबी है। यह भी याद रखें कि आख़िरत में सच्चाई ज़ाहिर होगी और हर इंसान को उसके अमल का पूरा बदला मिलेगा। मोमिनों के लिए यह बड़ी ख़ुशख़बरी है कि उनका अंजाम जन्नत है, चाहे दुनिया में उन्हें कितना ही नीचा दिखाया जाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — अल-मुतफ्फिफीन

30وَإِذَا مَرُّوا بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ
और जब उनके पास से गुज़रते तो उन पर चशमक करते थे
31وَإِذَا انقَلَبُوا إِلَىٰ أَهْلِهِمُ انقَلَبُوا فَكِهِينَ
और जब अपने लड़के वालों की तरफ़ लौट कर आते थे तो इतराते हुए
32وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوا إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَضَالُّونَ
और जब उन मोमिनीन को देखते तो कह बैठते थे कि ये तो यक़ीनी गुमराह हैं
33وَمَا أُرْسِلُوا عَلَيْهِمْ حَافِظِينَ
हालॉकि ये लोग उन पर कुछ निगराँ बना के तो भेजे नहीं गए थे
34فَالْيَوْمَ الَّذِينَ آمَنُوا مِنَ الْكُفَّارِ يَضْحَكُونَ
तो आज (क़यामत में) ईमानदार लोग काफ़िरों से हँसी करेंगे
अल-मुतफ्फिफीनकुरान सूची
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अनुवाद — अल-मुतफ्फिफीन 32

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Tuesday, August 18, 2026

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