अल-मुतफ्फिफीन · 31/36
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुतफ्फिफीन
وَإِذَا انقَلَبُوا إِلَىٰ أَهْلِهِمُ انقَلَبُوا فَكِهِينَ ۝٣١
Wa izan qalabooo ilaaa ahlihimun qalaboo fakiheen
📖 हिंदी अर्थ
और जब अपने लड़के वालों की तरफ़ लौट कर आते थे तो इतराते हुए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انقَلَبُوا (वापस लौटे) — यानी अपने घरों और परिवारों की ओर लौटे।
  • فَكِهِينَ (मज़े करते हुए, प्रसन्न) — यानी खुश और मगन होकर, अपनी हँसी-मज़ाक और ठट्ठे के साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन अपराधियों (काफ़िरों) का हाल बयान कर रही है जो दुनिया में ईमानवालों का मज़ाक उड़ाया करते थे। जब ये लोग अपने घरों और अपने लोगों के पास लौटते थे, तो वे खुश और प्रसन्न होकर लौटते थे, और अपने परिवार वालों के साथ मिलकर मोमिनों की बुराई करते, उन पर हँसते और उनका ठट्ठा उड़ाते थे। उनकी यह खुशी उनके कुफ्र और अहंकार की वजह से थी, क्योंकि वे अपने आपको बेहतर समझते थे और ईमानवालों को गुमराह समझते थे।

यह उनकी उस मानसिकता का चित्रण है जब वे आपस में बैठकर मोमिनों का मज़ाक उड़ाते और कहते थे कि ये लोग मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पैरवी करके राह से भटक गए हैं। हालाँकि, उन्हें यह ज़िम्मेदारी नहीं दी गई थी कि वे मोमिनों के रखवाले बनें और उनके ईमान का हिसाब लें।

लेकिन क़ुरआन हमें यह सिखाता है कि यह दुनिया का खेल है — आज ये काफ़िर मोमिनों पर हँसते हैं, मगर क़ियामत के दिन हालात बदल जाएँगे। उस दिन ईमानवाले इन काफ़िरों पर हँसेंगे, जैसे ये दुनिया में उन पर हँसते थे। यह अल्लाह का न्याय है — जो आज हँसता है, उसकी हँसी कल रोने में बदल जाएगी, और जो आज सब्र करता है, उसकी आँखें कल खुशी से चमक उठेंगी।

दावत और नसीहत:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि मोमिन को अपने ईमान और अच्छे कामों पर डटा रहना चाहिए, चाहे दुनिया में लोग उसका मज़ाक उड़ाएँ। किसी की हँसी और ताने हमें अल्लाह की राह से नहीं भटका सकते। याद रखिए! यह दुनिया फ़ानी है, और असली कामयाबी उस दिन मिलेगी जब अल्लाह के सामने हाज़िरी होगी। जो लोग आज ईमानवालों पर हँसते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है। इसलिए हमें अपने दिल को अल्लाह की याद से जोड़े रखना चाहिए, और अपने अख़लाक़ (आचरण) को इतना ऊँचा रखना चाहिए कि दुनिया की तानों का असर हम पर न हो। अल्लाह उन्हीं को इज़्ज़त देता है जो उसकी राह पर साबित क़दम रहते हैं।



📜 आयत 29-33 — सूरा अल-मुतफ्फिफीन

29إِنَّ الَّذِينَ أَجْرَمُوا كَانُوا مِنَ الَّذِينَ آمَنُوا يَضْحَكُونَ
बेशक जो गुनाहगार मोमिनों से हँसी किया करते थे
30وَإِذَا مَرُّوا بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ
और जब उनके पास से गुज़रते तो उन पर चशमक करते थे
31وَإِذَا انقَلَبُوا إِلَىٰ أَهْلِهِمُ انقَلَبُوا فَكِهِينَ
और जब अपने लड़के वालों की तरफ़ लौट कर आते थे तो इतराते हुए
32وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوا إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَضَالُّونَ
और जब उन मोमिनीन को देखते तो कह बैठते थे कि ये तो यक़ीनी गुमराह हैं
33وَمَا أُرْسِلُوا عَلَيْهِمْ حَافِظِينَ
हालॉकि ये लोग उन पर कुछ निगराँ बना के तो भेजे नहीं गए थे
अल-मुतफ्फिफीनकुरान सूची
36आयत
मक्कीअवतरण स्थान
31आयत

अनुवाद — अल-मुतफ्फिफीन 31

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Thursday, October 1, 2026

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