अल-फज्र · 25/30
अनुवाद उच्चारण — अल-फज्र
فَيَوْمَئِذٍ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُ أَحَدٌ ۝٢٥
Fa Yawma izil laa yu`azzibu `azaabahooo ahad
📖 हिंदी अर्थ
तो उस दिन ख़ुदा ऐसा अज़ाब करेगा कि किसी ने वैसा अज़ाब न किया होगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَيَوْمَئِذٍ – उस दिन (यानी क़ियामत के दिन)
  • لَا يُعَذِّبُ – कोई अज़ाब नहीं देगा
  • عَذَابَهُ – उसके (अल्लाह के) अज़ाब जैसा अज़ाब
  • أَحَدٌ – कोई भी (व्यक्ति या ताक़त)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत क़ियामत के उस भयानक दिन का वर्णन कर रही है जब अल्लाह तआला अपने नाफ़रमान बंदों को सज़ा देगा। उस दिन अल्लाह का अज़ाब इतना सख्त, भयानक और बेमिसाल होगा कि कोई भी मख़लूक़ — चाहे वह फ़रिश्ता हो, इंसान हो या जिन्न — उसके अज़ाब जैसा अज़ाब देने पर क़ादिर नहीं होगी। न कोई उसके अज़ाब की शिद्दत तक पहुँच सकता है, न उसकी पकड़ जैसी पकड़ कर सकता है, और न उसके बंधन जैसा बंधन बाँध सकता है। अल्लाह का अज़ाब सबसे सख्त, सबसे दर्दनाक और हमेशा रहने वाला है, जबकि दुनिया में किसी भी हुक्मरान या ज़ालिम का अज़ाब सीमित और फ़ानी है।

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसके इंतक़ाम (बदला लेने) की हैसियत का एहसास दिलाती है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और उसके अज़ाब से बेख़ौफ़ हो जाते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ से बचने की कोई ताक़त नहीं है। लेकिन साथ ही, यह आयत मोमिनों के लिए एक प्यारा पैग़ाम भी है — कि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसीअ है। जो लोग इस दुनिया में तौबा कर लें, अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करें और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें, उनके लिए उस दिन डरने की कोई बात नहीं। अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता है कि वह बड़ा माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है। प्यारे भाइयों और बहनों! आओ, हम इस दुनिया में रहते हुए अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें और उसकी रहमत के साये में आने की कोशिश करें, ताकि उस भयानक दिन के अज़ाब से महफ़ूज़ रहें और जन्नत की नेअमतों से नवाज़े जाएँ।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अल-फज्र

23وَجِيءَ يَوْمَئِذٍ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍ يَتَذَكَّرُ الْإِنسَانُ وَأَنَّىٰ لَهُ الذِّكْرَىٰ
और उस दिन जहन्नुम सामने कर दी जाएगी उस दिन इन्सान चौंकेगा मगर अब चौंकना कहाँ (फ़ायदा देगा)
24يَقُولُ يَا لَيْتَنِي قَدَّمْتُ لِحَيَاتِي
(उस वक्त) क़हेगा कि काश मैने अपनी (इस) ज़िन्दगी के वास्ते कुछ पहले भेजा होता
25فَيَوْمَئِذٍ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُ أَحَدٌ
तो उस दिन ख़ुदा ऐसा अज़ाब करेगा कि किसी ने वैसा अज़ाब न किया होगा
26وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُ أَحَدٌ
और न कोई उसके जकड़ने की तरह जकड़ेगा
27يَا أَيَّتُهَا النَّفْسُ الْمُطْمَئِنَّةُ
(और कुछ लोगों से कहेगा) ऐ इत्मेनान पाने वाली जान
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अनुवाद — अल-फज्र 25

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Tuesday, August 18, 2026

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