अल-हिज्र · 44/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَابٍ لِّكُلِّ بَابٍ مِّنْهُمْ جُزْءٌ مَّقْسُومٌ ۝٤٤
Lahaa sab`atu abwaab; likulli baabim minhum juz`um maqsoom
📖 हिंदी अर्थ
हर (दरवाज़े में जाने) के लिए उन गुमराहों की अलग अलग टोलियाँ होगीं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَابٍ: उस (जहन्नम) के सात दरवाज़े हैं।
  • لِكُلِّ بَابٍ: हर एक दरवाज़े के लिए।
  • جُزْءٌ مَقْسُومٌ: एक निर्धारित और बाँटा हुआ हिस्सा।

तफ़सीर:

यह आयत बताती है कि जहन्नम की आग ही इबलीस और उसके सभी अनुयायियों के लिए नियत स्थान है। इस जहन्नम के सात दरवाज़े हैं, जो एक के ऊपर एक स्तरों में हैं—हर दरवाज़ा नीचे की ओर जाता है और हर स्तर पिछले से अधिक भयानक है। ये दरवाज़े अलग-अलग प्रकार के पापियों के लिए हैं। इबलीस और उसके पैरोकारों में से हर एक गिरोह के लिए इन दरवाज़ों में से एक निर्धारित दरवाज़ा है, और उनके कर्मों के अनुसार उनका हिस्सा बाँटा गया है। यानी हर दरवाज़े से एक विशेष समूह प्रवेश करेगा, जो उनके कुकर्मों की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप होगा। यह विभाजन अल्लाह की ओर से पूर्व निर्धारित और न्यायपूर्ण है, जिसमें कोई कमी या बेशी नहीं होगी।

फ़ायदे:

  • यह आयत हमें यह चेतावनी देती है कि शैतान की پیروی کرنے والوں का अंजाम बहुत भयानक है, और हर इंसान को अपने कर्मों के अनुसार ही सज़ा या इनाम मिलेगा।
  • अल्लाह का न्याय पूर्ण है—वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर किसी को उसके कर्मों का सटीक बदला देता है।
  • यह आयत हमें शैतान के धोखे से बचने की ताक़ीद करती है और यह सिखाती है कि सच्ची भलाई अल्लाह की आज्ञा का पालन करने में है, न कि शैतान के बहकावे में आने में।
  • जहन्नम के सात दरवाज़ों का ज़िक्र हमें यह समझाता है कि पापों की गंभीरता के अनुसार सज़ा के अलग-अलग स्तर हैं, जो अल्लाह के असीम ज्ञान और न्याय को दर्शाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 42-46 — अल-हिज्र

42إِنَّ عِبَادِي لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَانٌ إِلَّا مَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْغَاوِينَ
जो मेरे मुख़लिस (ख़ास बन्दे) बन्दे हैं उन पर तुझसे किसी तरह की हुकूमत न होगी मगर हाँ गुमराहों में से जो तेरी पैरवी करे (उस पर तेरा वार चल जाएगा)
43وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ أَجْمَعِينَ
और हाँ ये भी याद रहे कि उन सब के वास्ते (आख़िरी) वायदा बस जहन्न ुम है जिसके सात दरवाजे होगे
44لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَابٍ لِّكُلِّ بَابٍ مِّنْهُمْ جُزْءٌ مَّقْسُومٌ
हर (दरवाज़े में जाने) के लिए उन गुमराहों की अलग अलग टोलियाँ होगीं
45إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
और परहेज़गार तो बेहश्त के बाग़ों और चश्मों मे यक़ीनन होंगे
46ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ آمِنِينَ
(दाख़िले के वक्त फ़रिश्ते कहेगें कि) उनमें सलामती इत्मिनान से चले चलो
अल-हिज्रकुरान सूची
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मक्कीRevelation
44आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 44

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Tuesday, August 18, 2026

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