Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَبَشَّرْتُمُونِي: क्या तुम मुझे शुभ सूचना दे रहे हो?
- مَسَّنِيَ الْكِبَرُ: मुझे बुढ़ापे ने छू लिया है, अर्थात मैं अत्यधिक वृद्ध हो गया हूँ।
- فَبِمَ تُبَشِّرُونَ: तो किस चीज़ के आधार पर (किस प्रकार) तुम मुझे यह शुभ सूचना दे रहे हो?
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह के फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास सूरत-ए-इंसानी में आए और उन्हें एक बुद्धिमान बेटे (इस्हाक़) की शुभ सूचना दी, तो हज़रत इब्राहीम ने अत्यधिक आश्चर्य के साथ कहा: "क्या तुम मुझे इस हालत में बेटे की ख़ुशख़बरी दे रहे हो जबकि मैं बहुत बूढ़ा हो चुका हूँ और मेरी पत्नी भी वृद्धा है? यह कैसे संभव है? किस चमत्कार के आधार पर तुम मुझे यह शुभ सूचना दे रहे हो?" यह कहना उनके अल्लाह की क़ुदरत पर विश्वास की कमी की वजह से नहीं था, बल्कि यह अत्यधिक हैरानी और अचरज का इज़हार था कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे यह कैसा अद्भुत काम हो रहा है। वे जानते थे कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, लेकिन इंसानी फ़ितरत के तहत उन्होंने यह सवाल किया। फ़रिश्तों ने जवाब में कहा कि हम तुम्हें अल्लाह के हुक्म से यह ख़ुशख़बरी दे रहे हैं, और अल्लाह की रहमत और क़ुदरत के आगे बुढ़ापा कोई चीज़ नहीं है।
फ़ायदे (निष्कर्ष):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की क़ुदरत असीमित है। वह जब चाहता है, प्रकृति के नियमों से हटकर भी काम कर सकता है। बुढ़ापे के बाद भी संतान देना उसकी क़ुदरत का एक नमूना है।
- हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का यह अंदाज़ हमें सिखाता है कि अल्लाह की नेमतों पर हैरानी जताना और उसकी क़ुदरत को याद करना एक अच्छी बात है, बशर्ते दिल में अल्लाह पर पूरा भरोसा हो।
- यह आयत हमें उम्मीद का पाठ पढ़ाती है — जब हालात नामुमकिन नज़र आएं, तब भी अल्लाह की रहमत से मायूस न हों। अल्लाह हर मुश्किल को आसान कर सकता है।
- फ़रिश्तों का इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को ख़ुशख़बरी देना इस बात की दलील है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को ख़ुशख़बरी देता है और उनकी दुआओं को क़बूल करता है। यह हमें अच्छे कर्मों और दुआ की तरफ़ राग़िब करता है।
📜 आयत 52-56 — सूरा अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 54
सूरा अल-हिज्र आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इब्राहिम ने कहा क्या मुझे ख़ुशख़बरी (बेटा होने की) देते…सूरा आयत 54/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-हिज्र
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


