अल-हिज्र · 54/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِي عَلَىٰ أَن مَّسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ ۝٥٤
Qaala abashshartumoonee `alaaa am massaniyal kibaru fabima tubashshiroon
📖 हिंदी अर्थ
इब्राहिम ने कहा क्या मुझे ख़ुशख़बरी (बेटा होने की) देते हो जब मुझे बुढ़ापा छा गया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَبَشَّرْتُمُونِي: क्या तुम मुझे शुभ सूचना दे रहे हो?
  • مَسَّنِيَ الْكِبَرُ: मुझे बुढ़ापे ने छू लिया है, अर्थात मैं अत्यधिक वृद्ध हो गया हूँ।
  • فَبِمَ تُبَشِّرُونَ: तो किस चीज़ के आधार पर (किस प्रकार) तुम मुझे यह शुभ सूचना दे रहे हो?

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह के फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास सूरत-ए-इंसानी में आए और उन्हें एक बुद्धिमान बेटे (इस्हाक़) की शुभ सूचना दी, तो हज़रत इब्राहीम ने अत्यधिक आश्चर्य के साथ कहा: "क्या तुम मुझे इस हालत में बेटे की ख़ुशख़बरी दे रहे हो जबकि मैं बहुत बूढ़ा हो चुका हूँ और मेरी पत्नी भी वृद्धा है? यह कैसे संभव है? किस चमत्कार के आधार पर तुम मुझे यह शुभ सूचना दे रहे हो?" यह कहना उनके अल्लाह की क़ुदरत पर विश्वास की कमी की वजह से नहीं था, बल्कि यह अत्यधिक हैरानी और अचरज का इज़हार था कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे यह कैसा अद्भुत काम हो रहा है। वे जानते थे कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, लेकिन इंसानी फ़ितरत के तहत उन्होंने यह सवाल किया। फ़रिश्तों ने जवाब में कहा कि हम तुम्हें अल्लाह के हुक्म से यह ख़ुशख़बरी दे रहे हैं, और अल्लाह की रहमत और क़ुदरत के आगे बुढ़ापा कोई चीज़ नहीं है।

फ़ायदे (निष्कर्ष):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की क़ुदरत असीमित है। वह जब चाहता है, प्रकृति के नियमों से हटकर भी काम कर सकता है। बुढ़ापे के बाद भी संतान देना उसकी क़ुदरत का एक नमूना है।
  2. हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का यह अंदाज़ हमें सिखाता है कि अल्लाह की नेमतों पर हैरानी जताना और उसकी क़ुदरत को याद करना एक अच्छी बात है, बशर्ते दिल में अल्लाह पर पूरा भरोसा हो।
  3. यह आयत हमें उम्मीद का पाठ पढ़ाती है — जब हालात नामुमकिन नज़र आएं, तब भी अल्लाह की रहमत से मायूस न हों। अल्लाह हर मुश्किल को आसान कर सकता है।
  4. फ़रिश्तों का इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को ख़ुशख़बरी देना इस बात की दलील है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को ख़ुशख़बरी देता है और उनकी दुआओं को क़बूल करता है। यह हमें अच्छे कर्मों और दुआ की तरफ़ राग़िब करता है।


📜 आयत 52-56 — सूरा अल-हिज्र

52إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًا قَالَ إِنَّا مِنكُمْ وَجِلُونَ
कि जब ये इबराहीम के पास आए तो (पहले) उन्होंने सलाम किया इबराहीम ने (जवाब सलाम के बाद) कहा हमको तो तुम से डर मालूम होता है
53قَالُوا لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ عَلِيمٍ
उन्होंने कहा आप मुत्तालिक़ ख़ौफ न कीजिए (क्योंकि) हम तो आप को एक (दाना व बीना) फरज़न्द (के पैदाइश) की खुशख़बरी देते हैं
54قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِي عَلَىٰ أَن مَّسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ
इब्राहिम ने कहा क्या मुझे ख़ुशख़बरी (बेटा होने की) देते हो जब मुझे बुढ़ापा छा गया
55قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ الْقَانِطِينَ
तो फिर अब काहे की खुशख़बरी देते हो वह फरिश्ते बोले हमने आप को बिल्कुल ठीक खुशख़बरी दी है तो आप (बारगाह ख़ुदा बन्दी से) ना उम्मीद न हो
56قَالَ وَمَن يَقْنَطُ مِن رَّحْمَةِ رَبِّهِ إِلَّا الضَّالُّونَ
इबराहीम ने कहा गुमराहों के सिवा और ऐसा कौन है जो अपने परवरदिगार की रहमत से ना उम्मीद हो
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अनुवाद — अल-हिज्र 54

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Friday, October 2, 2026

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