अल-हिज्र · 55/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ الْقَانِطِينَ ۝٥٥
Qaaloo bashsharnaaka bilhaqqi falaa takum minal qaaniteen
📖 हिंदी अर्थ
तो फिर अब काहे की खुशख़बरी देते हो वह फरिश्ते बोले हमने आप को बिल्कुल ठीक खुशख़बरी दी है तो आप (बारगाह ख़ुदा बन्दी से) ना उम्मीद न हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, जो निश्चित और अटल है।
  • الْقَانِطِينَ: निराश होने वाले, आशा खो देने वाले।

व्याख्या:

जब अल्लाह के फ़रिश्ते हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास आए और उन्हें एक बेटे (हज़रत इशाक़) की खुशखबरी दी, तो हज़रत इब्राहीम ने आश्चर्य और हैरानी से कहा कि क्या मुझे खुशखबरी दी जा रही है जबकि मैं बूढ़ा हो चुका हूँ? इस पर फ़रिश्तों ने जवाब दिया: "हमने आपको सत्य के साथ खुशखबरी दी है" — यानी यह खुशखबरी कोई मज़ाक या झूठ नहीं है, बल्कि यह अल्लाह का वादा है जो सच्चा और निश्चित है। अल्लाह की क़ुदरत के लिए कुछ भी असंभव नहीं है। फिर उन्होंने कहा: "आप निराश लोगों में से न हों" — यानी अल्लाह की रहमत और उसके वादे से कभी निराश न हों, क्योंकि अल्लाह जो चाहता है उसे करके रहता है, चाहे वह कितना ही असंभव क्यों न लगे। यह बात हज़रत इब्राहीम के लिए एक तसल्ली और सिखाने वाली थी कि अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह की रहमत और उसके वादे से कभी निराश नहीं होना चाहिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।
  2. अल्लाह की क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है; वह बूढ़े और बांझ लोगों को भी संतान दे सकता है, इसलिए उसकी ताक़त पर पूरा भरोसा रखना चाहिए।
  3. खुशखबरी देने वालों को सच्चाई और स्पष्टता के साथ बात करनी चाहिए, और सुनने वाले को भी अल्लाह के वादे पर यक़ीन करना चाहिए।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबत और बुढ़ापे में भी अल्लाह से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए, क्योंकि अल्लाह की मेहरबानी किसी भी वक़्त आ सकती है।
  5. निराशा एक बुरी आदत है जो इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देती है; इसलिए मोमिन को हमेशा अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए।


📜 आयत 53-57 — सूरा अल-हिज्र

53قَالُوا لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ عَلِيمٍ
उन्होंने कहा आप मुत्तालिक़ ख़ौफ न कीजिए (क्योंकि) हम तो आप को एक (दाना व बीना) फरज़न्द (के पैदाइश) की खुशख़बरी देते हैं
54قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِي عَلَىٰ أَن مَّسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ
इब्राहिम ने कहा क्या मुझे ख़ुशख़बरी (बेटा होने की) देते हो जब मुझे बुढ़ापा छा गया
55قَالُوا بَشَّرْنَاكَ بِالْحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ الْقَانِطِينَ
तो फिर अब काहे की खुशख़बरी देते हो वह फरिश्ते बोले हमने आप को बिल्कुल ठीक खुशख़बरी दी है तो आप (बारगाह ख़ुदा बन्दी से) ना उम्मीद न हो
56قَالَ وَمَن يَقْنَطُ مِن رَّحْمَةِ رَبِّهِ إِلَّا الضَّالُّونَ
इबराहीम ने कहा गुमराहों के सिवा और ऐसा कौन है जो अपने परवरदिगार की रहमत से ना उम्मीद हो
57قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ
(फिर) इबराहीम ने कहा ऐ (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्तों) तुम्हें आख़िर क्या मुहिम दर पेश है
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अनुवाद — अल-हिज्र 55

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सूरा आयत 55/99 — सूरा अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हिज्र सुनें, सूरा अल-हिज्र अनुवाद, सूरा अल-हिज्र mp3, सूरा अल-हिज्र pdf. आयत 53–57. हिंदी अर्थ: اردو.





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Friday, October 2, 2026

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