अन-नहल · 122/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَآتَيْنَاهُ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً ۖ وَإِنَّهُ فِي الْآخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِحِينَ ۝١٢٢
Wa aatainaahu fid dunyaa hasanah; wa innahoo fil Aakhirati laminas saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उन्हें दुनिया में भी (हर तरह की) बेहतरी अता की थी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حَسَنَةً: भलाई, उत्तम वस्तु, प्रशंसा और सद्गुण।
  • الصَّالِحِينَ: नेक लोग, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं और उसकी प्रसन्नता प्राप्त करते हैं।

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि हमने उन्हें दुनिया में भलाई प्रदान की। यह भलाई कई रूपों में थी—उन्हें नबुव्वत (पैग़म्बरी) दी गई, उनका नाम सदैव के लिए प्रशंसा के साथ जोड़ दिया गया, उन्हें नेक संतान दी गई जिसमें इस्माईल और इस्हाक़ जैसे पैग़म्बर शामिल थे, और उन्हें दुनिया भर के लोगों के लिए एक आदर्श और अनुकरणीय व्यक्तित्व बनाया गया। उनकी प्रशंसा इस क़दर फैली कि हर धर्म और समुदाय के लोग उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते हैं।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि आख़िरत में भी वह नेक लोगों में से होंगे। यानी उन्हें उच्च स्थान, जन्नत के ऊँचे दर्जे और अल्लाह की विशेष रहमत प्राप्त होगी। यह उनके लिए एक बड़ा सम्मान है कि दुनिया और आख़िरत दोनों में उन्हें भलाई और सफलता दी गई।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक और वफ़ादार बंदों को दुनिया में भी भलाई देता है और आख़िरत में भी उनके लिए उच्च दर्जे तैयार करता है।
  2. अच्छा नाम और सदैव रहने वाली प्रशंसा अल्लाह की ओर से एक बड़ा इनाम है, जो उसे मिलती है जो उसकी राह में सच्चे दिल से काम करता है।
  3. हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की क़ुर्बानी और अल्लाह के प्रति समर्पण हमारे लिए प्रेरणा है कि हम भी अपने जीवन को अल्लाह की आज्ञा के अनुसार ढालें ताकि हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में भलाई मिले।
  4. यह आयत मुसलमानों को यह उम्मीद देती है कि जो व्यक्ति अल्लाह पर ईमान रखता है और नेक कर्म करता है, उसे कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह उसे दोनों जहानों में सफलता प्रदान करेगा।
🎧 सुनें

📜 आयत 120-124 — अन-नहल

120إِنَّ إِبْرَاهِيمَ كَانَ أُمَّةً قَانِتًا لِّلَّهِ حَنِيفًا وَلَمْ يَكُ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
इसमें शक़ नहीं कि इबराहीम (लोगों के) पेशवा ख़ुदा के फरमाबरदार बन्दे और बातिल से कतरा कर चलने वाले थे और मुशरेकीन से हरगिज़ न थे
121شَاكِرًا لِّأَنْعُمِهِ ۚ اجْتَبَاهُ وَهَدَاهُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
उसकी नेअमतों के शुक्र गुज़ार उनको ख़ुदा ने मुनतख़िब कर लिया है और (अपनी) सीधी राह की उन्हें हिदायत की थी
122وَآتَيْنَاهُ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً ۖ وَإِنَّهُ فِي الْآخِرَةِ لَمِنَ الصَّالِحِينَ
और हमने उन्हें दुनिया में भी (हर तरह की) बेहतरी अता की थी
123ثُمَّ أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ أَنِ اتَّبِعْ مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۖ وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
और वह आख़िरत में भी यक़ीनन नेको कारों से होगें ऐ रसूल फिर तुम्हारे पास वही भेजी कि इबराहीम के तरीक़े की पैरवी करो जो बातिल से कतरा के चलते थे और मुशरेकीन से नहीं थे
124إِنَّمَا جُعِلَ السَّبْتُ عَلَى الَّذِينَ اخْتَلَفُوا فِيهِ ۚ وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَحْكُمُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
(ऐ रसूल) हफ्ते (के दिन) की ताज़ीम तो बस उन्हीं लोगों पर लाज़िम की गई थी (यहूद व नसारा इसके बारे में) एख्तिलाफ करते थे और कुछ शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार उनके दरमियान जिस अग्र में वह झगड़ा करते थे क़यामत के दिन फैसला कर देगा
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अनुवाद — अन-नहल 122

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Tuesday, August 18, 2026

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