Qaala innahoo yaqoolu innahaa baqaratul laa zaloolun tuseerul arda wa laa tasqil harsa musallamatullaa shiyata feehaa; qaalul `aana jita bilhaqq; fazabahoohaa wa maa kaado yaf`aloon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
मूसा ने कहा खुदा ज़रूर फरमाता है कि वह गाय न तो इतनी सधाई हो कि ज़मीन जोते न खेती सीचें भली चंगी एक रंग की कि उसमें कोई धब्बा तक न हो, वह बोले अब (जा के) ठीक-ठीक बयान किया, ग़रज़ उन लोगों ने वह गाय हलाल की हालाँकि उनसे उम्मीद न थी वह कि वह ऐसा करेंगे
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موسیٰ نے کہا کہ خدا فرماتا ہے کہ وہ بیل کام میں لگا ہوا نہ ہو، نہ تو زمین جوتتا ہو اور نہ کھیتی کو پانی دیتا ہو۔ اس میں کسی طرح کا داغ نہ ہو۔ کہنے لگے، اب تم نے سب باتیں درست بتا دیں۔ غرض (بڑی مشکل سے) انہوں نے اس بیل کو ذبح کیا، اور وہ ایسا کرنے والے تھے نہیں
मूसा ने कहा खुदा ज़रूर फरमाता है कि वह गाय न तो इतनी सधाई हो कि ज़मीन जोते न खेती सीचें भली चंगी एक रंग की कि उसमें कोई धब्बा तक न हो, वह बोले अब (जा के) ठीक-ठीक बयान किया, ग़रज़ उन लोगों ने वह गाय हलाल की हालाँकि उनसे उम्मीद न थी वह कि वह ऐसा करेंगे
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
لَا ذَلُولٌ: जो काम में लाकर वश में न की गई हो, अर्थात् सिखाई-पढ़ाई न हो।
تُثِيرُ الْأَرْضَ: ज़मीन को जोतती हो (खेती के लिए हल चलाती हो)।
تَسْقِي الْحَرْثَ: खेत को पानी देती हो (सिंचाई करती हो)।
مُسَلَّمَةٌ: हर दोष से मुक्त, सलामत और बेदाग।
لَا شِيَةَ فِيهَا: उसमें कोई दूसरा रंग या निशान न हो, पूरी तरह एक रंग की हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब बनी इसराइल ने बार-बार टाल-मटोल की और गाय की विशेषताओं के बारे में अधिक जानकारी माँगी, तो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें बताया कि अल्लाह का फ़रमान है: वह गाय ऐसी है जो काम करने के लिए वश में नहीं की गई, न ही उससे ज़मीन जोती जाती है और न ही वह खेतों को पानी देती है। वह पूरी तरह सलामत और बेदाग है, उसके शरीर पर कोई दूसरा रंग या निशान नहीं है। यह सुनकर बनी इसराइल ने कहा: "अब तुम सच्चाई और पूरी तरह साफ़-साफ़ बयान लेकर आए हो।" फिर उन्होंने उस गाय को ढूँढकर ज़बह किया, हालाँकि वे ऐसा करते-करते लगभग न कर पाते, क्योंकि वे बहुत दिनों तक झिझकते और बहस करते रहे थे, और उन्होंने अपनी हठधर्मी की वजह से मामले को मुश्किल बना लिया था। अगर वे पहले ही किसी भी गाय को ज़बह कर देते, तो उनके लिए काफ़ी होता, लेकिन उन्होंने सवालों और बहस से अपने ऊपर सख्ती ले ली।
फ़ायदे (सबक़):
अल्लाह के हुक्म को बिना देर किए और बिना बहस किए मानना चाहिए; जितनी देर और बहस करोगे, उतना ही मामला मुश्किल होता जाता है।
दीन में सख्ती और बारीक सवाल पूछने से अल्लाह की तरफ से सख्ती आती है, इसलिए आसानी और सादगी अपनानी चाहिए।
अल्लाह का हर हुक्म भलाई और हिकमत पर आधारित होता है, भले ही हमें उसकी वजह समझ न आए।
ईमानदारी और सच्चाई का रास्ता अपनाने से अल्लाह की मदद मिलती है, और जब सच्चाई सामने आती है तो लोग उसे मानने पर मजबूर हो जाते हैं।
इस्लाम सिखाता है कि अल्लाह के फरमान के आगे सर झुकाना ही असली इंसानियत है, और यही कामयाबी की कुंजी है।
वह कहने लगे (वाह) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें ये बता दे कि उसका रंग आख़िर क्या हो मूसा ने कहा बेशक खुदा फरमाता है कि वह गाय खूब गहरे ज़र्द रंग की हो देखने वाले उसे देखकर खुश हो जाए
तब कहने लगे कि तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें ज़रा ये तो बता दे कि वह (गाय) और कैसी हो (वह) गाय तो और गायों में मिल जुल गई और खुदा ने चाहा तो हम ज़रूर (उसका) पता लगा लेगे
मूसा ने कहा खुदा ज़रूर फरमाता है कि वह गाय न तो इतनी सधाई हो कि ज़मीन जोते न खेती सीचें भली चंगी एक रंग की कि उसमें कोई धब्बा तक न हो, वह बोले अब (जा के) ठीक-ठीक बयान किया, ग़रज़ उन लोगों ने वह गाय हलाल की हालाँकि उनसे उम्मीद न थी वह कि वह ऐसा करेंगे
खुदा को उसका ज़ाहिर करना मंजूर था पस हमने कहा कि उस गाय को कोई टुकड़ा लेकर इस (की लाश) पर मारो यूँ खुदा मुर्दे को ज़िन्दा करता है और तुम को अपनी कुदरत की निशानियाँ दिखा देता है
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