अल-हज · 69/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
اللَّهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ ۝٦٩
Allaahu yahkumu bainakum Yawmal Qiyaamati feemaa kuntum feehi takhtalifoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन बातों में तुम बाहम झगड़ा करते थे क़यामत के दिन ख़ुदा तुम लोगों के दरमियान (ठीक) फ़ैसला कर देगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَحْكُمُ: न्याय करेगा, फैसला सुनाएगा।
  • تَخْتَلِفُونَ: तुम विवाद करते थे, मतभेद रखते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को बता रहे हैं कि जो लोग दुनिया में धर्म के मामले में झगड़ते हैं, एक दूसरे को गुमराह कहते हैं, और अपनी जिद्द और हठधर्मी पर अड़े रहते हैं, उनके इस विवाद का अंतिम फैसला अल्लाह ही करेगा। यह फैसला क़यामत के दिन होगा, जब हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।

यह आयत मुसलमानों को एक बहुत ही सुंदर शिक्षा देती है — कि जब कोई व्यक्ति हठधर्मिता और अहंकार के कारण झगड़ा करे, तो उसका सबसे अच्छा उत्तर यही है कि उसे अल्लाह के फैसले की ओर टाल दिया जाए। क्योंकि दुनिया में तर्क-वितर्क से अक्सर सच्चाई नहीं निकलती, बल्कि जिद और बहस बढ़ती है। लेकिन क़यामत का दिन वह दिन होगा जब सारे पर्दे उठ जाएंगे, और हर व्यक्ति को साफ़-साफ़ दिख जाएगा कि सच्चाई क्या थी और झूठ क्या था।

इस आयत में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि अल्लाह तआला ने यहाँ मुसलमानों को सिखाया है कि जब वे किसी झगड़ालू और हठधर्म व्यक्ति से सामना करें, तो उन्हें घबराना नहीं चाहिए और न ही उसी की तरह ज़ोर-ज़बरदस्ती से जवाब देना चाहिए। बल्कि उन्हें यह कहना चाहिए कि "अल्लाह ही हमारे और तुम्हारे बीच फैसला करेगा।" यह एक बहुत ही उच्च स्तर की शालीनता और बुद्धिमानी है, जो इस्लाम हमें सिखाता है।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें याद दिलाती है कि इस दुनिया में हम जो भी करते हैं, वह अकारण नहीं जाता। अल्लाह तआला न्याय का पूर्ण स्वामी है। जो लोग सच्चाई पर हैं, उन्हें किसी की जिद और झूठ से डरने की ज़रूरत नहीं। क़यामत का दिन आएगा और अल्लाह हर एक का हिसाब लेगा — चाहे वह कितना ही बड़ा विद्वान हो, चाहे कितना ही ताकतवर हो, चाहे कितना ही अमीर हो। सबको अल्लाह के सामने खड़ा होना है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने धर्म को समझें, सच्चाई पर स्थिर रहें, और बहस-झगड़े से बचें। क्योंकि सच्चाई को छिपाने वाले और जानबूझकर झूठ पर अड़े रहने वाले लोग क़यामत के दिन शर्मिंदा होंगे, जबकि सच्चे मोमिनों को अल्लाह की रहमत और जन्नत की खुशखबरी मिलेगी। याद रखिए, अल्लाह का फैसला सबसे बेहतर और सबसे न्यायपूर्ण है। हमें उसी पर भरोसा रखना चाहिए और उसी की राह पर चलना चाहिए।



📜 आयत 67-71 — अल-हज

67لِّكُلِّ أُمَّةٍ جَعَلْنَا مَنسَكًا هُمْ نَاسِكُوهُ ۖ فَلَا يُنَازِعُنَّكَ فِي الْأَمْرِ ۚ وَادْعُ إِلَىٰ رَبِّكَ ۖ إِنَّكَ لَعَلَىٰ هُدًى مُّسْتَقِيمٍ
इसमें शक नहीं कि इन्सान बड़ा ही नाशुक्रा है (ऐ रसूल) हमने हर उम्मत के वास्ते एक तरीक़ा मुक़र्रर कर दिया कि वह इस पर चलते हैं फिर तो उन्हें इस दीन (इस्लाम) में तुम से झगड़ा न करना चाहिए और तुम (लोगों को) अपने परवरदिगार की तरफ बुलाए जाओ
68وَإِن جَادَلُوكَ فَقُلِ اللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ
बेशक तुम सीधे रास्ते पर हो और अगर (इस पर भी) लोग तुमसे झगड़ा करें तो तुक कह दो कि जो कुछ तुम कर रहे हो खुदा उससे खूब वाक़िफ़ है
69اللَّهُ يَحْكُمُ بَيْنَكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كُنتُمْ فِيهِ تَخْتَلِفُونَ
जिन बातों में तुम बाहम झगड़ा करते थे क़यामत के दिन ख़ुदा तुम लोगों के दरमियान (ठीक) फ़ैसला कर देगा
70أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۗ إِنَّ ذَٰلِكَ فِي كِتَابٍ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
(ऐ रसूल) क्या तुम नहीं जानते कि जो कुछ आसमान और ज़मीन में है खुदा यक़ीनन जानता है उसमें तो शक नहीं कि ये सब (बातें) किताब (लौहे महफूज़) में (लिखी हुईमौजूद) हैं
71وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِ سُلْطَانًا وَمَا لَيْسَ لَهُم بِهِ عِلْمٌ ۗ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِن نَّصِيرٍ
बेशक ये (सब कुछ) खुदा पर आसान है और ये लोग खुदा को छोड़कर उन लोगों की इबादत करते हैं जिनके लिए न तो ख़ुदा ही ने कोई सनद नाज़िल की है और न उस (के हक़ होने) का खुद उन्हें इल्म है और क़यामत में तो ज़ालिमों का कोई मददगार भी नहीं होगा
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अनुवाद — अल-हज 69

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Tuesday, August 18, 2026

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