अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَنْحِتُونَ – तुम तराशते हो / काटते हो
- مِنَ الْجِبَالِ – पहाड़ों से
- بُيُوتًا – घर
- فَارِهِينَ – अत्यधिक कुशलता और निपुणता के साथ, या अभिमान और इतराते हुए
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने समूद की क़ौम की उन नेअमतों का ज़िक्र किया जो उन्हें दुनिया में दी गई थीं, ताकि वे उन पर अल्लाह का एहसान मानें और उसकी इबादत करें। उन नेअमतों में से एक बड़ी नेअमत यह थी कि वे पहाड़ों को तराशकर अपने लिए मज़बूत और खूबसूरत घर बनाते थे। वे इस काम में इतने माहिर थे कि पहाड़ों को काटकर उनमें बड़ी कुशलता से घर बना लेते थे। यह उनकी ताक़त, हुनर और तरक़्क़ी की निशानी थी, लेकिन अफ़सोस कि उन्होंने इन नेअमतों का शुक्र अदा नहीं किया, बल्कि उन्हें अपने अभिमान और घमंड का ज़रिया बना लिया। वे इतराते और अकड़ते थे कि हमने ये मकान बनाए हैं, हमें कौन मिटा सकता है? उन्होंने यह नहीं सोचा कि यह सब कुछ अल्लाह की देन है, और अल्लाह जब चाहे उन्हें उनकी नेअमतों से महरूम कर सकता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की दी हुई नेअमतें और ताक़तें हमारे लिए इम्तिहान हैं, न कि घमंड करने का सामान। जिस तरह समूद की क़ौम ने अपने हुनर और ताक़त पर इतराकर अल्लाह के नबी की बात नहीं मानी और अंजाम में उन पर अज़ाब आया, उसी तरह आज अगर हम अपनी तरक़्क़ी, माल, औलाद या हुनर पर घमंड करें और अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों से मुँह मोड़ें, तो हम भी उसी अंजाम से नहीं बच सकते। याद रखिए, ये दुनिया की नेअमतें फ़ानी हैं, और असल कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की राह में चले और उसकी नेअमतों का शुक्र अदा करे। अल्लाह हमें घमंड से बचाए और अपनी नेअमतों का सही इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 147-151 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 149
सूरा अश-शुआरा आयत 149 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (इस वजह से) पूरी महारत और तकलीफ के साथ…सूरा आयत 149/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 147–151. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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