अश-शुआरा · 198/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَلَوْ نَزَّلْنَاهُ عَلَىٰ بَعْضِ الْأَعْجَمِينَ ۝١٩٨
Wa law nazzalnaahu `alaa ba`dil a`jameen
📖 हिंदी अर्थ
और अगर हम इस क़ुरान को किसी दूसरी ज़बान वाले पर नाज़िल करते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नज़्ज़ल्ना: हमने उतारा।
  • अ'जमी: वह व्यक्ति जो अरबी भाषा नहीं बोलता, चाहे वह किसी भी जाति या देश का हो। (बहुवचन: अ'जमीन)

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर हम यह क़ुरआन किसी ग़ैर-अरब व्यक्ति पर उतारते, जो अरबी ज़बान नहीं जानता, और वह इसे तुम्हारे सामने पढ़ता, तो भी ये काफ़िर लोग इस पर ईमान नहीं लाते। यानी उनका इनकार किसी कमी की वजह से नहीं है, बल्कि यह उनकी अपनी हठधर्मिता और जिद है।

अल्लाह तआला यह बताना चाहते हैं कि क़ुरआन की सच्चाई और उसकी अज़मत का अंदाज़ा अरबी ज़बान जानने वालों को अच्छी तरह हो सकता है। जब खुद अरबी भाषा के लोग, जो फ़साहत और बलाग़त में माहिर थे, इस किताब के सामने झुक गए और उन्होंने इसकी सच्चाई को पहचान लिया, तो फिर इनकार करने वालों का बहाना बिल्कुल बेबुनियाद है। अगर यह किताब किसी ग़ैर-अरब पर उतारी जाती, तो ये लोग कहते कि यह तो अरबी ज़बान में है और हम इसे समझ नहीं सकते। लेकिन अल्लाह ने इसे अरबी में उतारा, उसी ज़बान में जो इन काफ़िरों की अपनी ज़बान थी, फिर भी उन्होंने इसे नहीं माना।

यह आयत हमें सिखाती है कि हिदायत का दारोमदार सिर्फ अल्लाह के हाथ में है। इंसान चाहे कितनी भी सच्चाई पेश कर दे, लेकिन जिसके दिल में अल्लाह ने हिदायत नहीं डाली, वह कभी ईमान नहीं लाएगा। इसलिए हमें अपना काम सिर्फ अल्लाह का पैग़ाम पहुंचाना है, और हिदायत के लिए अल्लाह से दुआ करनी चाहिए।

दावती पहलू:

यह आयत हम मुसलमानों के लिए एक बहुत बड़ी नेमत की याद दिलाती है कि अल्लाह ने क़ुरआन को हमारी समझ में आने वाली ज़बान में उतारा। हमें चाहिए कि इस किताब को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। क़ुरआन हर ज़माने और हर जगह के लिए हिदायत है। जो लोग इसे ठुकराते हैं, वह अपना ही नुक़सान करते हैं। हमें दूसरों तक अल्लाह का पैग़ाम पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन याद रखें कि हिदायत सिर्फ अल्लाह देता है। हमारा काम सिर्फ पहुंचाना है, और अल्लाह से दुआ करना है कि वह लोगों के दिलों को खोल दे।

🎧 सुनें

📜 आयत 196-200 — अश-शुआरा

196وَإِنَّهُ لَفِي زُبُرِ الْأَوَّلِينَ
और बेशक इसकी ख़बर अगले पैग़म्बरों की किताबों मे (भी मौजूद) है
197أَوَلَمْ يَكُن لَّهُمْ آيَةً أَن يَعْلَمَهُ عُلَمَاءُ بَنِي إِسْرَائِيلَ
क्या उनके लिए ये कोई (काफ़ी) निशानी नहीं है कि इसको उलेमा बनी इसराइल जानते हैं
198وَلَوْ نَزَّلْنَاهُ عَلَىٰ بَعْضِ الْأَعْجَمِينَ
और अगर हम इस क़ुरान को किसी दूसरी ज़बान वाले पर नाज़िल करते
199فَقَرَأَهُ عَلَيْهِم مَّا كَانُوا بِهِ مُؤْمِنِينَ
और वह उन अरबो के सामने उसको पढ़ता तो भी ये लोग उस पर ईमान लाने वाले न थे
200كَذَٰلِكَ سَلَكْنَاهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ
इसी तरह हमने (गोया ख़ुद) इस इन्कार को गुनाहगारों के दिलों में राह दी
अश-शुआराकुरान सूची
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198आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 198

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Tuesday, August 18, 2026

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