Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الأَعْمَىٰ (अंधा): यहाँ इससे आशय काफ़िर और सत्य से अंधे व्यक्ति से है।
- البَصِيرُ (देखने वाला): यहाँ इससे आशय मोमिन और सत्य को देखने वाले व्यक्ति से है।
तफ़सीर (व्याख्या):
जिस प्रकार अंधा व्यक्ति और आँखों वाला व्यक्ति कभी बराबर नहीं हो सकते, उसी प्रकार काफ़िर और मोमिन भी कभी बराबर नहीं हो सकते। अंधा व्यक्ति न तो सूर्य के प्रकाश को देख सकता है और न ही रास्ते की रुकावटों से बच सकता है, जबकि आँखों वाला व्यक्ति सब कुछ स्पष्ट देखता है और सीधे रास्ते पर चलता है। इसी तरह, जिस व्यक्ति का दिल अल्लाह के दीन से अंधा है, वह सत्य को नहीं पहचान सकता, जबकि जिसे अल्लाह ने ईमान की आँख दी है, वह हक़ को देखता है और उसका अनुसरण करता है।
यहाँ अल्लाह तआला हमें बताना चाहते हैं कि कुफ़्र का अंधेरा और ईमान का नूर कभी एक जैसे नहीं हो सकते। जिस प्रकार अंधेरे में इंसान ठोकरें खाता है और गिरता है, उसी प्रकार कुफ़्र में इंसान गुमराही की वादियों में भटकता रहता है। और जिस प्रकार रोशनी में इंसान साफ़ देखता है और सही रास्ता पाता है, उसी प्रकार ईमान की रोशनी इंसान को सीधे रास्ते पर चलाती है।
यह भी समझ लीजिए कि जिस प्रकार छाया और तेज़ गर्म हवा एक जैसी नहीं होतीं, उसी प्रकार जीते दिल (जो ईमान से ज़िंदा है) और मुर्दा दिल (जो कुफ़्र से मुर्दा है) कभी बराबर नहीं हो सकते। ईमान वाला दिल अल्लाह के ज़िक्र से ज़िंदा रहता है और नेक कामों की तरफ़ रग़बत रखता है, जबकि काफ़िर का दिल मुर्दा है, जिसमें न कोई हिदायत की रोशनी है और न ही नेकी की तरफ़ कोई रुचि।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किस रास्ते पर चल रहे हैं। क्या हम अंधों की तरह भटक रहे हैं या आँखों वालों की तरह साफ़ देखकर चल रहे हैं? अल्लाह ने हमें अक़्ल दी है, क़ुरआन दिया है, और रसूल भेजे हैं ताकि हम सत्य को पहचानें। जो व्यक्ति इन नेअमतों से फ़ायदा उठाता है और ईमान की रोशनी अपनाता है, वही असली देखने वाला है। और जो इनसे मुँह मोड़ता है, वह अंधों से भी बदतर है, क्योंकि अंधा तो मजबूरी में नहीं देखता, लेकिन यह अपनी मर्ज़ी से आँखें बंद कर लेता है।
अल्लाह तआला ने हमें यह बड़ी नेअमत दी है कि हमें ईमान की रोशनी दिखाई। हमें इस नेअमत की क़द्र करनी चाहिए और अपने दिलों को ईमान से ज़िंदा रखना चाहिए। याद रखिए, क़यामत के दिन अंधे और देखने वाले कभी बराबर नहीं होंगे — जिस तरह दुनिया में उनका दर्जा अलग है, उसी तरह आख़िरत में भी उनका अंजाम अलग होगा। अल्लाह हम सबको सच्ची आँखें अता करे और हमें अंधों की तरह भटकने से बचाए। आमीन।
📜 आयत 17-21 — सूरा फातिर
अनुवाद — फातिर 19
सूरा फातिर आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अन्धा (क़ाफिर) और ऑंखों वाला (मोमिन किसी तरह) बराबर…सूरा आयत 19/45 — सूरा फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा फातिर सुनें, सूरा फातिर अनुवाद, सूरा फातिर mp3, सूरा फातिर pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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