अस-साफ्फात · 149/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
فَاسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ الْبَنَاتُ وَلَهُمُ الْبَنُونَ ۝١٤٩
Fastaftihim ali Rabbikal banaatu wa lahumul banoon
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَاسْتَفْتِهِمْ: उनसे पूछो, उन्हें सवाल का सामना करो।
  • أَلِرَبِّكَ الْبَنَاتُ: क्या तुम्हारे रब के लिए बेटियाँ हैं?
  • وَلَهُمُ الْبَنُونَ: और उनके (मुशरिकों के) लिए बेटे हैं?

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! इन मुशरिकों से पूछो — यह कैसा हास्यास्पद और अन्यायपूर्ण विभाजन है? वे कहते हैं कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं, जबकि वे खुद बेटियों को तुच्छ समझते हैं और उनके जन्म पर शर्मिंदा होते हैं। वे अपने लिए बेटों को पसंद करते हैं, लेकिन अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हैं — जबकि अल्लाह हर कमी और दोष से पाक है, और वह किसी औलाद का मोहताज नहीं।

यह सवाल उन्हें उनकी बुद्धि और फ़ितरत के सामने लाता है — क्या यह उचित है कि जिस रब ने उन्हें पैदा किया, उन्हें रिज़्क़ दिया, और उन्हें इंसानियत का शरफ़ अता किया, उसके लिए वे सबसे कमतर चीज़ ठहराएँ, और अपने लिए सबसे प्यारी और अच्छी चीज़ चुनें? यह कैसा न्याय है?

यह आयत उनके इस झूठे अक़ीदे की जड़ काटती है और उन्हें सोचने पर मजबूर करती है। अगर वे अपनी बेटियों को इज़्ज़त नहीं देते, तो अल्लाह के लिए बेटियाँ कैसे मान लीं? क्या अल्लाह उनसे कमतर है? हरगिज़ नहीं! अल्लाह तआला हर ऐब से पाक है, और यह उनकी जहालत और हठधर्मिता की सबसे बड़ी गवाही है।

दावत और नसीहत:

ऐ इंसान! ज़रा अपने दिल से पूछो — जो रब तुम्हें पालता है, तुम्हें खिलाता है, और तुम्हारी हर ज़रूरत पूरी करता है, क्या उसके लिए तुम ऐसी बातें गढ़ते हो जो तुम खुद अपने लिए पसंद नहीं करते? यह तो अल्लाह की बरगाह में सबसे बड़ी बेअदबी है।

इस आयत से हमें सबक मिलता है कि अल्लाह के बारे में हमें सिर्फ़ वही कहना चाहिए जो उसने खुद बताया है, और उसकी पाक ज़ात को हर उस चीज़ से पाक मानना चाहिए जो उसके लिए लायक़ नहीं। अल्लाह की इज़्ज़त और बुज़ुर्गी को समझो, और उसके दीन को क़ुबूल करो — क्योंकि सच्चाई यही है कि अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, और उसका कोई शरीक नहीं।

जो लोग इस हक़ीक़त को समझ जाएँ, उनके लिए दुनिया और आख़िरत की भलाई है। अल्लाह तआला हमें सीधी राह पर चलाए और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी पाक ज़ात को उसी तरह पहचानते हैं जैसा उसने खुद बयान किया है। आमीन।



📜 आयत 147-151 — सूरा अस-साफ्फात

147وَأَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ مِائَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ
और (इसके बाद) हमने एक लाख बल्कि (एक हिसाब से) ज्यादा आदमियों की तरफ (पैग़म्बर बना कर भेजा)
148فَآمَنُوا فَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ
तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा
149فَاسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ الْبَنَاتُ وَلَهُمُ الْبَنُونَ
तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे
150أَمْ خَلَقْنَا الْمَلَائِكَةَ إِنَاثًا وَهُمْ شَاهِدُونَ
(क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे
151أَلَا إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ
ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
149आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 149

सूरा अस-साफ्फात आयत 149 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे…

सूरा आयत 149/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 147–151. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए