अस-साफ्फात · 150/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
أَمْ خَلَقْنَا الْمَلَائِكَةَ إِنَاثًا وَهُمْ شَاهِدُونَ ۝١٥٠
Am khalaqnal malaaa`i kata inaasanw wa hm shaahidoon
📖 हिंदी अर्थ
(क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَمْ: यहाँ इसका अर्थ है "क्या" (प्रश्नवाचक), जो डाँट और फटकार के लिए आया है।
  • خَلَقْنَا: हमने पैदा किया।
  • الْمَلَائِكَةَ: फ़रिश्ते।
  • إِنَاثًا: लड़कियाँ (स्त्रीलिंग)।
  • وَهُمْ شَاهِدُونَ: और वे (मुशरिकीन) उस समय मौजूद थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बुतपरस्तों) को उनके बेतुके और अक़्ल से परे दावे पर डाँट रहे हैं। उनका कहना था कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं — और वे भी लड़कियाँ! यह कितनी बड़ी बदतमीज़ी और जिगर-ख़ून करने वाली बात है कि इंसान अपने लिए बेटों को पसंद करता है, लेकिन अल्लाह के लिए बेटियाँ मान लेता है।

अल्लाह फ़रमाता है: "क्या हमने फ़रिश्तों को लड़कियाँ बनाया और तुम उस वक़्त मौजूद थे?" यानी तुमने यह बात किस आधार पर कही? क्या तुम हमारी ख़िलक़त (सृष्टि) के गवाह थे? क्या तुमने हमें फ़रिश्तों को स्त्री रूप में पैदा करते देखा? हरगिज़ नहीं! तुम्हारे पास कोई इल्म नहीं, सिर्फ़ अटकल और झूठ है।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त तन्बीह (चेतावनी) है जो अल्लाह के बारे में बग़ैर इल्म के बातें करते हैं। अल्लाह ने फ़रिश्तों को नूर (रोशनी) से पैदा किया, वे न तो नर हैं और न मादा — वे अल्लाह के मुक़र्रब बंदे हैं, उसके हुक्म के पाबंद हैं, और उसकी तस्बीह (पवित्रता का बयान) करते रहते हैं।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह के बारे में कोई भी बात बग़ैर क़ुरआन और सही हदीस के नहीं कहनी चाहिए। अल्लाह की शान उसकी अपनी बताई हुई शान है — वह हर ऐब और नुक़्स से पाक है, और उसके लिए कोई औलाद नहीं, न बेटा और न बेटी।

और यह भी याद रखें कि अल्लाह तआला ने हमें इसलिए पैदा किया कि हम उसकी इबादत करें, उसे अकेला जानें, और उसके नामों और सिफ़ात को उसी तरह पेश करें जैसे उसने ख़ुद बयान किए हैं। जो लोग अल्लाह पर बुहतान बाँधते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है — लेकिन जो लोग अल्लाह की पाकी बयान करते हैं और उसके रसूल (ﷺ) की लाई हुई हिदायत पर चलते हैं, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है।

आओ, हम अपने अक़ीदे को क़ुरआन और सुन्नत के मुताबिक़ बनाएँ, और अल्लाह की बड़ाई और पाकी बयान करें — क्योंकि वही सबसे बड़ा, सबसे पाक और सबसे बेहतर है।



📜 आयत 148-152 — अस-साफ्फात

148فَآمَنُوا فَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ
तो वह लोग (उन पर) ईमान लाए फिर हमने (भी) एक ख़ास वक्त तक उनको चैन से रखा
149فَاسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ الْبَنَاتُ وَلَهُمُ الْبَنُونَ
तो (ऐ रसूल) उन कुफ्फ़ार से पूछो कि क्या तुम्हारे परवरदिगार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे
150أَمْ خَلَقْنَا الْمَلَائِكَةَ إِنَاثًا وَهُمْ شَاهِدُونَ
(क्या वाक़ई) हमने फरिश्तों की औरतें बनाया है और ये लोग (उस वक्त) मौजूद थे
151أَلَا إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ
ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है
152وَلَدَ اللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
और ये लोग यक़ीनी झूठे हैं
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अनुवाद — अस-साफ्फात 150

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Tuesday, August 18, 2026

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