अस-साफ्फात · 153/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
أَصْطَفَى الْبَنَاتِ عَلَى الْبَنِينَ ۝١٥٣
Astafal banaati `alal baneen
📖 हिंदी अर्थ
क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَصْطَفَى: चुन लिया, विशेष रूप से चुन लिया।
  • الْبَنَاتِ: बेटियाँ।
  • الْبَنِينَ: बेटे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की बात का खंडन करती है जो अल्लाह के बारे में बड़ी ही अजीब और बेतुकी बातें कहते थे। वे कहते थे कि अल्लाह ने फ़रिश्तों को अपनी बेटियाँ बना लिया है, जबकि वे खुद बेटियों को पसंद नहीं करते थे और उनके जन्म को अपने लिए शर्म की बात समझते थे। अल्लाह तआला उनसे पूछता है: क्या तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए बेटे चुने और अपने लिए बेटियाँ? यह कैसा बंटवारा है? क्या उसने बेटियों को बेटों पर प्राथमिकता दी?

यह प्रश्न उनके इस झूठे और बेतुके विश्वास को बेनकाब करता है। वे खुद बेटियों को तुच्छ समझते थे, उन्हें दफ़ना देते थे, लेकिन अल्लाह के लिए बेटियाँ साबित करते थे। यह उनकी नासमझी और अज्ञानता की सबसे बड़ी मिसाल है। अल्लाह तआला ऐसी सारी बातों से पाक और मुक़द्दस है। वह किसी का पिता नहीं है, न उसकी कोई संतान है, न पत्नी। वह एक है, अकेला है, बेजरूरत है।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ा सबक है कि हम अल्लाह के बारे में कोई ऐसी बात न कहें जो उसकी शान के खिलाफ हो। अल्लाह की पाकी और उसकी बड़ाई को समझें। साथ ही यह भी सीख मिलती है कि बेटियाँ अल्लाह की बड़ी नेमत हैं। जिसे अल्लाह बेटी देता है, वह उसे संभाल कर रखे, उसकी परवरिश अच्छे तरीके से करे। बेटियों को तुच्छ समझना जाहिलियत की आदत है, जिसे इस्लाम ने जड़ से मिटा दिया। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "जिसकी बेटी हो, वह उसे ज़िंदा दफ़न न करे, न उसे तुच्छ समझे और न अपने बेटों पर उसे तरजीह दे।" (यानी उसके साथ अच्छा सलूक करे) — तो अल्लाह उसे जन्नत में दाखिल करेगा।

हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेमतों पर शुक्र करें, चाहे वह बेटा हो या बेटी। दोनों अल्लाह की अमानत हैं। और हमेशा याद रखें कि अल्लाह हर उस बात से पाक है जो ज़ालिम लोग उसके बारे में कहते हैं। वही सबसे बड़ा है, सबसे ऊँचा है, और उसकी शान के लायक़ कोई बात नहीं कही जा सकती।

🎧 सुनें

📜 आयत 151-155 — अस-साफ्फात

151أَلَا إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ
ख़बरदार (याद रखो कि) ये लोग यक़ीनन अपने दिल से गढ़-गढ़ के कहते हैं कि खुदा औलाद वाला है
152وَلَدَ اللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
और ये लोग यक़ीनी झूठे हैं
153أَصْطَفَى الْبَنَاتِ عَلَى الْبَنِينَ
क्या खुदा ने (अपने लिए) बेटियों को बेटों पर तरजीह दी है
154مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ
(अरे कम्बख्तों) तुम्हें क्या जुनून हो गया है तुम लोग (बैठे-बैठे) कैसा फैसला करते हो
155أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते
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अनुवाद — अस-साफ्फात 153

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Tuesday, August 18, 2026

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