अस-साफ्फात · 168/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًا مِّنَ الْأَوَّلِينَ ۝١٦٨
Law anna `indana zikram minal awwaleen
📖 हिंदी अर्थ
कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذِكْرًا: यहाँ इसका अर्थ है "किताब" या "ज़िक्र" यानी ऐसी किताब जो नसीहत और याद दिलाने वाली हो।
  • مِنَ الْأَوَّلِينَ: पहले गुज़रे हुए लोगों (अगली उम्मतों) की किताबों में से।

तफसीर (व्याख्या):

मक्का के काफ़िर, नबी करीम ﷺ की बे'सत (पैग़म्बरी) से पहले कहा करते थे: "काश! हमारे पास भी वह ज़िक्र (किताब) होती जो पहले गुज़री हुई उम्मतों (जैसे बनी इसराईल) के पास आई थी — जैसे तौरात — तो हम भी अल्लाह के सच्चे और ख़ालिस बंदे होते, और अपनी इबादत में उसे ख़ालिस कर देते।"

लेकिन अल्लाह तआला ने उनके इस दावे को झूठा बताया, क्योंकि जब अल्लाह ने उनके पास सबसे आख़िरी और सबसे कामिल किताब — क़ुरआन — भेजी, और उनके पास मुहम्मद ﷺ को रसूल बनाकर भेजा, तो उन्होंने उसे मानने से इनकार कर दिया और कुफ़्र किया। अगर वे सच्चे होते तो इस किताब को क़बूल कर लेते, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। इसलिए उन्हें अनक़रीब (क़यामत के दिन) अपने इस झूठ और कुफ़्र का अंजाम भुगतना होगा — यानी दर्दनाक अज़ाब।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें एक बड़ा सबक़ सिखाती है — कि अक्सर इंसान कल को टालता है और बहाने बनाता है। कोई कहता है कि "अगर मेरे पास हिदायत का ज़रिया होता तो मैं सबसे अच्छा बंदा बनता।" लेकिन अल्लाह ने हमें क़ुरआन जैसी नूरानी किताब दी है, और रसूलुल्लाह ﷺ का सुन्नत का ख़ज़ाना दिया है। अब हमारे पास कोई बहाना नहीं बचा।

तो आज ही से अज़ीम फ़ैसला करें — क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यही सच्ची कामयाबी है। अल्लाह हमें अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 166-170 — अस-साफ्फात

166وَإِنَّا لَنَحْنُ الْمُسَبِّحُونَ
और हम तो यक़ीनी (उसकी) तस्बीह पढ़ा करते हैं
167وَإِن كَانُوا لَيَقُولُونَ
अगरचे ये कुफ्फार (इस्लाम के क़ब्ल) कहा करते थे
168لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًا مِّنَ الْأَوَّلِينَ
कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता
169لَكُنَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते
170فَكَفَرُوا بِهِ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
(मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब (उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा
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अनुवाद — अस-साफ्फात 168

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Tuesday, August 18, 2026

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