Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَإِنْ كَانُوا: "और वे थे" – यहाँ "إِنْ" निषेधार्थक नहीं, बल्कि "كَانَ" के साथ "لَيَقُولُونَ" पर ज़ोर देने के लिए आया है, अर्थात "वे निश्चित रूप से कहा करते थे।"
- لَيَقُولُونَ: "वे कहते थे" – यहाँ यह उनके उस कथन की ओर संकेत है जो वे अपने दिलों में दोहराते थे।
तफ़सीर:
यह आयत मक्का के काफ़िरों की उस मानसिकता को उजागर करती है जो वे पैग़म्बर मुहम्मद (ﷺ) की बे'सत से पहले रखते थे। वे अक्सर कहा करते थे: "अगर हमारे पास भी पिछली क़ौमों की तरह कोई किताब (जैसे तौरात) या कोई नबी आ जाए, तो हम सच्चे ईमान वाले और ख़ालिस इबादत करने वाले बन जाएँगे।" वे अपने आप को दूसरों से बेहतर समझते थे और सोचते थे कि अगर उन्हें मौक़ा मिले तो वे सबसे अच्छे मुसलमान साबित होंगे।
लेकिन अल्लाह ने उनके इस दावे को झूठा साबित कर दिया। जब उनके पास आख़िरी नबी मुहम्मद (ﷺ) कुरआन लेकर आए – जो सबसे बेहतरीन और पूरी किताब है – तो उन्होंने उसे ठुकरा दिया और उस पर ईमान नहीं लाए। यह उनकी ज़ुबानी दावों की सच्चाई की परीक्षा थी, और वे इसमें नाकाम रहे। उनका यह कथन सिर्फ़ एक बहाना था, क्योंकि सच्चाई उनके सामने आ गई थी, लेकिन उन्होंने उसे नहीं अपनाया।
इस आयत में हमारे लिए एक बड़ा सबक़ है: कई बार हम सोचते हैं कि अगर हमारे पास सही हिदायत होती, तो हम उस पर अमल करते। लेकिन जब सच्चाई हमारे सामने आती है, तो हम अपनी आदतों, अहंकार या दुनियावी मोहब्बत की वजह से उसे ठुकरा देते हैं। अल्लाह ने हमें कुरआन और सुन्नत जैसी रोशनी दी है – क्या हम उस पर सच्चे दिल से अमल कर रहे हैं? यह आयत हमें आत्म-परीक्षण की दावत देती है कि हम अपने दावों को सच्चाई में बदलें और अल्लाह की इबादत को ख़ालिस करें, क्योंकि अल्लाह के पास हमारे दिलों का हाल है और वही हमारे अमल का हिसाब लेगा।
याद रखें, अल्लाह ने हमें सबसे आख़िरी और पूरी किताब कुरआन दी है, और हमारे पास सबसे अफ़ज़ल नबी (ﷺ) की सीख है। यह हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत है – क्या हम इसे पहचानते हैं और उस पर चलते हैं? यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 165-169 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 167
सूरा अस-साफ्फात आयत 167 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगरचे ये कुफ्फार (इस्लाम के क़ब्ल) कहा करते थेसूरा आयत 167/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 165–169. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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