अस-साफ्फात · 169/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
لَكُنَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ ۝١٦٩
Lakunna `ibaadal laahil mukhlaseen
📖 हिंदी अर्थ
तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَكُنَّا — हम होते
  • عِبَادَ اللَّهِ — अल्लाह के बंदे
  • الْمُخْلَصِينَ — जिन्हें अल्लाह ने ख़ालिस (शुद्ध) कर दिया हो, यानी अपनी इबादत में सच्चे और खरे

विस्तृत तफ़सीर:

मक्का के काफ़िर, आप ﷺ के आने से पहले यह कहा करते थे कि अगर हमारे पास भी वही किताब और रसूल आते जो पहले की उम्मतों के पास आए थे — जैसे तौरात और दूसरी आसमानी किताबें — तो हम भी अल्लाह के सच्चे और ख़ालिस बंदे होते। हम अपनी इबादत को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लेते और उसकी नाफ़रमानी न करते, जैसा कि पहले लोगों ने किया।

लेकिन अल्लाह तआला ने उनके इस दावे को झूठा बताया। जब अल्लाह ने उनके पास आख़िरी नबी मुहम्मद ﷺ को कुरआन के साथ भेजा — जो सबसे बेहतरीन किताब है और सबसे कामिल रसूल हैं — तो उन्होंने उसे मानने से इनकार कर दिया और कुफ़्र पर ही डटे रहे। यह साबित करता है कि उनका यह कहना सिर्फ़ बहाना था, सच्ची नीयत नहीं। अगर उनकी नीयत सच्ची होती तो वे कुरआन और रसूल ﷺ को क़बूल कर लेते।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है — हमें चाहिए कि अल्लाह की इबादत को ख़ालिस करें, उसमें किसी को शरीक न करें, और जो नेमतें अल्लाह ने हमें दी हैं — कुरआन और सुन्नत — उनकी क़द्र करें। यह हमारे लिए बड़ी ख़ुशक़िस्मती है कि अल्लाह ने हमें इस उम्मत में पैदा किया, जिसके पास आख़िरी और सबसे अफ़ज़ल किताब और रसूल हैं। हमें इस नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए ख़ालिस कर देना चाहिए। याद रखें, अल्लाह उन्हीं लोगों को अपना ख़ालिस बंदा बनाता है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करते हैं और अपने अमल को सिर्फ़ उसी की रज़ा के लिए करते हैं।



📜 आयत 167-171 — सूरा अस-साफ्फात

167وَإِن كَانُوا لَيَقُولُونَ
अगरचे ये कुफ्फार (इस्लाम के क़ब्ल) कहा करते थे
168لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًا مِّنَ الْأَوَّلِينَ
कि अगर हमारे पास भी अगले लोगों का तज़किरा (किसी किताबे खुदा में) होता
169لَكُنَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो जाते
170فَكَفَرُوا بِهِ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ
(मगर जब किताब आयी) तो उन लोगों ने उससे इन्कार किया ख़ैर अनक़रीब (उसका नतीजा) उन्हें मालूम हो जाएगा
171وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا الْمُرْسَلِينَ
और अपने ख़ास बन्दों पैग़म्बरों से हमारी बात पक्की हो चुकी है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
169आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 169

सूरा अस-साफ्फात आयत 169 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो…

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Saturday, October 3, 2026

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