Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَكُنَّا — हम होते
- عِبَادَ اللَّهِ — अल्लाह के बंदे
- الْمُخْلَصِينَ — जिन्हें अल्लाह ने ख़ालिस (शुद्ध) कर दिया हो, यानी अपनी इबादत में सच्चे और खरे
विस्तृत तफ़सीर:
मक्का के काफ़िर, आप ﷺ के आने से पहले यह कहा करते थे कि अगर हमारे पास भी वही किताब और रसूल आते जो पहले की उम्मतों के पास आए थे — जैसे तौरात और दूसरी आसमानी किताबें — तो हम भी अल्लाह के सच्चे और ख़ालिस बंदे होते। हम अपनी इबादत को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लेते और उसकी नाफ़रमानी न करते, जैसा कि पहले लोगों ने किया।
लेकिन अल्लाह तआला ने उनके इस दावे को झूठा बताया। जब अल्लाह ने उनके पास आख़िरी नबी मुहम्मद ﷺ को कुरआन के साथ भेजा — जो सबसे बेहतरीन किताब है और सबसे कामिल रसूल हैं — तो उन्होंने उसे मानने से इनकार कर दिया और कुफ़्र पर ही डटे रहे। यह साबित करता है कि उनका यह कहना सिर्फ़ बहाना था, सच्ची नीयत नहीं। अगर उनकी नीयत सच्ची होती तो वे कुरआन और रसूल ﷺ को क़बूल कर लेते।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है — हमें चाहिए कि अल्लाह की इबादत को ख़ालिस करें, उसमें किसी को शरीक न करें, और जो नेमतें अल्लाह ने हमें दी हैं — कुरआन और सुन्नत — उनकी क़द्र करें। यह हमारे लिए बड़ी ख़ुशक़िस्मती है कि अल्लाह ने हमें इस उम्मत में पैदा किया, जिसके पास आख़िरी और सबसे अफ़ज़ल किताब और रसूल हैं। हमें इस नेमत का शुक्र अदा करना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए ख़ालिस कर देना चाहिए। याद रखें, अल्लाह उन्हीं लोगों को अपना ख़ालिस बंदा बनाता है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करते हैं और अपने अमल को सिर्फ़ उसी की रज़ा के लिए करते हैं।
📜 आयत 167-171 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 169
सूरा अस-साफ्फात आयत 169 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हम भी खुदा के निरे खरे बन्दे ज़रूर हो…सूरा आयत 169/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 167–171. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


