साद · 86/88
अनुवाद उच्चारण — साद
قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُتَكَلِّفِينَ ۝٨٦
Qul maaa as`alukum `alaihi min ajrinw wa maaa ana minal mutakallifeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो तुमसे न इस (तबलीग़े रिसालत) की मज़दूरी माँगता हूँ और न मैं (झूठ मूठ) बनावट करने वाला हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِنَ الْمُتَكَلِّفِينَ — वे लोग जो बिना किसी आधार के अपनी ओर से बातें गढ़ लेते हैं, या ऐसे कार्य करते हैं जिनका उन्हें आदेश नहीं दिया गया।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि मैं तुम्हें इस्लाम की ओर बुलाने और रिसालत (पैग़म्बरी) का संदेश पहुँचाने के बदले में तुमसे कोई मेहनताना या बदला नहीं माँगता। मेरी दावत पूरी तरह निःस्वार्थ है। मैं तुम्हारी भलाई और हिदायत के सिवा और कुछ नहीं चाहता। मेरा उद्देश्य केवल अल्लाह की रज़ा और उसका आदेश पूरा करना है।

और मैं उन लोगों में से नहीं हूँ जो अपनी तरफ़ से कोई बात गढ़ लें या दिखावे के लिए ऐसे काम करें जिनका उन्हें हुक्म न दिया गया हो। मैं केवल उसी का पालन करता हूँ जो अल्लाह मेरी ओर वह़ी (प्रकाशना) के रूप में भेजता है। मैं न तो कुरआन को अपनी ओर से बनाता हूँ और न ही अपनी इच्छा से कुछ कहता हूँ। मेरा हर शब्द, हर अमल अल्लाह के हुक्म के अनुसार है।

यह आयत हमें सिखाती है कि दीन का काम पूरी निष्ठा और ख़ुलूस (ईमानदारी) के साथ करना चाहिए। जो लोग अल्लाह के दीन की ख़िदमत करते हैं, वे किसी सांसारिक लाभ या बदले के मोहताज नहीं होते। उनका अज्र और इनाम अल्लाह के पास सुरक्षित है, जो सबसे बड़ा देने वाला है।

इस आयत में नबी करीम ﷺ की महान शख्सियत का एक और पहलू सामने आता है — आप ﷺ ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में कभी किसी से दुनियावी मुआवज़ा नहीं माँगा। आप ﷺ की सच्चाई का यह प्रमाण है कि जब आप ﷺ ने इस्लाम की दावत दी, तो दुश्मनों ने भी यह स्वीकार किया कि आप ﷺ झूठे नहीं हैं, बल्कि सच्चे और अमानतदार हैं।

हमें भी चाहिए कि अपने अच्छे कामों में रियाकारी (दिखावे) से बचें और केवल अल्लाह की रज़ा के लिए काम करें। जब हमारा इरादा खालिस होगा, तो अल्लाह हमारे कामों में बरकत देगा और हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता करेगा। याद रखिए, अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो सच्चे और नेक इरादे वाले होते हैं।



📜 आयत 84-88 — साद

84قَالَ فَالْحَقُّ وَالْحَقَّ أَقُولُ
और मैं तो हक़ ही कहा करता हूँ
85لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكَ وَمِمَّن تَبِعَكَ مِنْهُمْ أَجْمَعِينَ
कि मैं तुझसे और जो लोग तेरी ताबेदारी करेंगे उन सब से जहन्नुम को ज़रूर भरूँगा
86قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ وَمَا أَنَا مِنَ الْمُتَكَلِّفِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो तुमसे न इस (तबलीग़े रिसालत) की मज़दूरी माँगता हूँ और न मैं (झूठ मूठ) बनावट करने वाला हूँ
87إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ
ये (क़ुरान) तो बस सारे जहाँन के लिए नसीहत है
88وَلَتَعْلَمُنَّ نَبَأَهُ بَعْدَ حِينٍ
और कुछ दिनों बाद तुमको इसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी
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अनुवाद — साद 86

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Tuesday, August 18, 2026

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