अन-नज्म · 10/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
فَأَوْحَىٰ إِلَىٰ عَبْدِهِ مَا أَوْحَىٰ ۝١٠
Fa awhaaa ilaa `abdihee maaa awhaa
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने अपने बन्दे की तरफ जो 'वही' भेजी सो भेजी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأَوْحَىٰ: तो वह्य (प्रकाशना) भेजी।
  • إِلَىٰ عَبْدِهِ: अपने बंदे (मुहम्मद ﷺ) की ओर।
  • مَا أَوْحَىٰ: जो कुछ भी वह्य भेजी (उसकी महिमा और गरिमा का वर्णन अल्लाह ने खुद नहीं किया, बल्कि उसे रहस्यमय और अत्यंत उच्च बताया)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें उस महान घटना से अवगत करा रहे हैं जो मेराज (आसमानी सफर) के दौरान हुई। जब जिब्रील अमीन (अलैहिस्सलाम) अपने असली रूप में नबी करीम ﷺ के सामने आए, और वे अल्लाह के नबी के इतने करीब हुए कि उनके बीच की दूरी दो कमानों के बराबर या उससे भी कम रह गई। उस समय अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी ﷺ की ओर वह्य भेजी, जो उन्होंने जिब्रील के माध्यम से प्राप्त की।

यहाँ अल्लाह ने "مَا أَوْحَىٰ" (जो वह्य भेजी) कहकर उस वह्य की महिमा को बयान किया है, लेकिन उसकी तफसील नहीं बताई, क्योंकि वह इतनी उच्च और पवित्र थी कि उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। यह वह्य ही थी जिसमें अल्लाह ने अपने बंदे को अपने पास बुलाया, पांच वक्त की नमाज़ का हुक्म दिया, और अपनी महानता और रहमत के राज़ खोले।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का अपने नबी ﷺ से कितना गहरा रिश्ता है, और वह्य (प्रकाशना) कितनी बुलंद चीज़ है। यह हमारे लिए इमान की ताज़गी का ज़रिया है कि हम अपने नबी ﷺ की उस मंज़िल को याद करें जहाँ उन्होंने अल्लाह से सीधा कलाम सुना, और हमें उनकी उम्मत होने पर फख्र करना चाहिए।

दावती पहलू:

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और जो उसकी राह में अपना सब कुछ लगा देते हैं, उन्हें वह अपने खास क़ुर्ब (नज़दीकी) से नवाज़ता है। नबी ﷺ की यह मंज़िल हमारे लिए मशाल-ए-राह है कि हम भी अल्लाह की इबादत और उसके रसूल ﷺ की पैरवी में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें, ताकि हमें भी उसी रहमत की झलक मिले। यह वह्य सिर्फ नबी ﷺ के लिए नहीं थी, बल्कि उसका पैगाम हम तक पहुँचा है — कि अल्लाह की तरफ रुजू करो, उसकी रहमत को गले लगाओ, और उसके दीन को अपनी ज़िंदगी में उतारो। क़ुरआन की हर आयत हमें उसी मुहब्बत की तरफ बुलाती है जो अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को अता की।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — अन-नज्म

8ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ
(फिर जिबरील व मोहम्मद में) दो कमान का फ़ासला रह गया
9فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ
बल्कि इससे भी क़रीब था
10فَأَوْحَىٰ إِلَىٰ عَبْدِهِ مَا أَوْحَىٰ
ख़ुदा ने अपने बन्दे की तरफ जो 'वही' भेजी सो भेजी
11مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَىٰ
तो जो कुछ उन्होने देखा उनके दिल ने झूठ न जाना
12أَفَتُمَارُونَهُ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ
तो क्या वह (रसूल) जो कुछ देखता है तुम लोग उसमें झगड़ते हो
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अनुवाद — अन-नज्म 10

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Tuesday, August 18, 2026

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