अन-नज्म · 11/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَىٰ ۝١١
Maa kazabal fu`aadu maa ra aa
📖 हिंदी अर्थ
तो जो कुछ उन्होने देखा उनके दिल ने झूठ न जाना

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا كَذَبَ – झूठ नहीं बोला, धोखा नहीं दिया।
  • الْفُؤَادُ – दिल (यहाँ अर्थ है: नबी ﷺ का दिल)।
  • مَا رَأَى – जो (उन्होंने) देखा।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी मुहम्मद ﷺ की सच्चाई और उनके दिल के विश्वास को बयान कर रहे हैं। जब नबी ﷺ को मेराज (आसमान की यात्रा) में अल्लाह की बड़ी-बड़ी निशानियाँ दिखाई गईं, और उन्होंने जिब्रील अमीन को उनके असली रूप में देखा, तो उनके दिल ने उस दृश्य को पूरी तरह सच माना और उसमें कोई संदेह या झूठ नहीं मिलाया। उनकी आँखों ने जो देखा, उनके दिल ने उसे बिल्कुल सच और सही समझा — न कोई कमी की, न कोई बढ़ोतरी की, न कोई झूठ बोला।

यह आयत नबी ﷺ की सिद्दीक़त (सच्चाई) और अमानत (विश्वसनीयता) की गवाही है। यहाँ अल्लाह तआला खुद फरमा रहे हैं कि मुहम्मद ﷺ का दिल और उनकी आँख एक दूसरे के साथ पूरी तरह मुताबिक़त रखते थे — जो देखा, उसे दिल ने बिना किसी शक के कबूल किया। यह उनकी नबुव्वत की सबसे बड़ी दलील है कि वे न तो धोखेबाज़ थे और न ही उन्होंने कभी कोई झूठी बात कही।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि नबी ﷺ की हर बात सच्ची है, क्योंकि अल्लाह ने खुद उनके दिल की गवाही दी है। जब हमारे प्यारे नबी ﷺ ने मेराज की रात जो कुछ देखा और सुनाया, वह सब हक़ और सच है। हमें उनकी हर बात पर बिना किसी संदेह के ईमान लाना चाहिए। यह हमारे लिए नबी ﷺ की मुहब्बत और उनके बताए रास्ते पर चलने की सबसे बड़ी दावत है। जिस दिल में नबी ﷺ की सच्चाई का यक़ीन हो, वह दिल कभी गुमराह नहीं हो सकता। आइए, हम अपने दिलों को नबी ﷺ की सच्चाई पर मज़बूत ईमान के साथ सजाएँ और उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर दुनिया और आख़िरत की कामयाबी हासिल करें।



📜 आयत 9-13 — सूरा अन-नज्म

9فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ
बल्कि इससे भी क़रीब था
10فَأَوْحَىٰ إِلَىٰ عَبْدِهِ مَا أَوْحَىٰ
ख़ुदा ने अपने बन्दे की तरफ जो 'वही' भेजी सो भेजी
11مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَىٰ
तो जो कुछ उन्होने देखा उनके दिल ने झूठ न जाना
12أَفَتُمَارُونَهُ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ
तो क्या वह (रसूल) जो कुछ देखता है तुम लोग उसमें झगड़ते हो
13وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ
और उन्होने तो उस (जिबरील) को एक बार (शबे मेराज) और देखा है
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
11आयत

अनुवाद — अन-नज्म 11

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Thursday, October 1, 2026

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