अन-नज्म · 34/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰ ۝٣٤
Wa a`taa qaleelanw wa akdaa
📖 हिंदी अर्थ
और थोड़ा सा (ख़ुदा की राह में) दिया और फिर बन्द कर दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَأَعْطَىٰ: उसने दिया
  • قَلِيلًا: थोड़ा सा (माल)
  • وَأَكْدَىٰ: रुक गया, कंजूसी की, देना बंद कर दिया (यह शब्द उस कुएं से लिया गया है जिसका पानी सूख जाता है)

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति के हाल का वर्णन कर रही है जो अल्लाह की राह से मुँह मोड़ता है और अपने नफ्स (अहंकार) की पूजा करता है। ऐसा व्यक्ति जब कभी कुछ देता भी है तो बहुत थोड़ा देता है, और फिर जल्द ही अपना हाथ रोक लेता है। उसका दिल कंजूसी और बुख़्ल (कृपणता) से भरा होता है, इसलिए उसका दिया हुआ थोड़ा सा भी खैरात उसके दिल की सख्ती को नहीं बदल पाता।

यहाँ अल्लाह तआला उस व्यक्ति की मजाल (स्थिति) बयान कर रहा है जो अपने माल में से थोड़ा सा खर्च करता है, फिर अचानक बंद कर देता है — जैसे सूखा हुआ कुआँ जिसमें से पानी निकलना बंद हो जाए। यह उसकी नीयत की कमज़ोरी और उसके ईमान की कमी को दर्शाता है। वह अल्लाह की राह में खर्च करने को एक बोझ समझता है, न कि रिज़्क़ और बरकत का ज़रिया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में खर्च करना चाहिए, चाहे थोड़ा ही सही, लेकिन दिल खोलकर और लगातार। अल्लाह तआला उस बंदे से मुहब्बत करता है जो अपनी हैसियत के मुताबिक देता रहे, और उससे नफ़रत करता है जो देकर रुक जाए और कंजूसी करे। याद रखिए, जो अल्लाह की राह में खर्च करता है, अल्लाह उसे और देता है, और जो रोकता है, उसकी बरकत छीन ली जाती है।

इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने अंदर की कंजूसी को खत्म करना चाहिए और सखावत (उदारता) अपनानी चाहिए। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "सदक़ा (दान) माल को कम नहीं करता।" तो आइए, हम अपने रब की राह में खर्च करें, अपनी गुंजाइश के मुताबिक, और उस पर अड़े रहें — क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 32-36 — सूरा अन-नज्म

32الَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَائِرَ الْإِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ إِلَّا اللَّمَمَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ وَاسِعُ الْمَغْفِرَةِ ۚ هُوَ أَعْلَمُ بِكُمْ إِذْ أَنشَأَكُم مِّنَ الْأَرْضِ وَإِذْ أَنتُمْ أَجِنَّةٌ فِي بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ ۖ فَلَا تُزَكُّوا أَنفُسَكُمْ ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ اتَّقَىٰ
जो सग़ीरा गुनाहों के सिवा कबीरा गुनाहों से और बेहयाई की बातों से बचे रहते हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार बड़ी बख्यिश वाला है वही तुमको ख़ूब जानता है जब उसने तुमको मिटटी से पैदा किया और जब तुम अपनी माँ के पेट में बच्चे थे तो (तकब्बुर) से अपने नफ्स की पाकीज़गी न जताया करो जो परहेज़गार है उसको वह ख़ूब जानता है
33أَفَرَأَيْتَ الَّذِي تَوَلَّىٰ
भला (ऐ रसूल) तुमने उस शख़्श को भी देखा जिसने रदगिरदानी की
34وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰ
और थोड़ा सा (ख़ुदा की राह में) दिया और फिर बन्द कर दिया
35أَعِندَهُ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰ
क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है
36أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِي صُحُفِ مُوسَىٰ
क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है
अन-नज्मकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
34आयत

अनुवाद — अन-नज्म 34

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Thursday, October 1, 2026

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