अल-हाक़्का · 34/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ ۝٣٤
wa laa yahuddu `alaa ta`aamil miskeen
📖 हिंदी अर्थ
तो आज न उसका कोई ग़मख्वार है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَحُضُّ: प्रोत्साहित करना, उकसाना, प्रेरित करना।
  • طَعَامِ الْمِسْكِينِ: मिस्कीन (निर्धन, ज़रूरतमंद) को खाना खिलाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस व्यक्ति के हाल का वर्णन कर रही है जो क़ियामत के दिन अपने कर्मों के कारण पकड़ा जाएगा और उसे जहन्नम में डाला जाएगा। उसके गुनाहों में से एक बड़ा गुनाह यह बताया गया है कि वह न केवल खुद मिस्कीनों को खाना नहीं खिलाता था, बल्कि दूसरों को भी इस नेक काम के लिए प्रोत्साहित नहीं करता था। यानी उसका दिल इतना सख्त और संकीर्ण था कि उसमें न तो खुद ग़रीबों की मदद करने का जज़्बा था और न ही वह दूसरों को इस पुण्य कार्य की तरफ राग़िब करता था।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इस्लाम में सिर्फ़ अपनी ज़ात के लिए नेकी करना काफी नहीं है, बल्कि हमें दूसरों को भी नेकी की तरफ बुलाना चाहिए। जिस तरह बुराई से रोकना (नही अनिल मुनकर) फर्ज़ है, उसी तरह भलाई की तरफ बुलाना (अम्र बिल मारूफ) भी हमारी ज़िम्मेदारी है। अगर हम किसी ग़रीब की मदद नहीं कर सकते, तो कम से कम किसी ऐसे व्यक्ति को तो प्रोत्साहित करें जो मदद कर सकता है। यह एक सामाजिक ज़िम्मेदारी है जो हर मुसलमान पर ईमान का हक़ है।

याद रखिए! अल्लाह तआला ने इस आयत में उस शख्स की मज़म्मत (निंदा) की है जो दूसरों को भलाई की तरफ नहीं बुलाता। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अपने आस-पास के लोगों की परवाह करें, उनकी मदद करें और उन्हें भी नेक कामों की तरफ राग़िब करें। इससे हमारा समाज मज़बूत होगा, आपसी मुहब्बत बढ़ेगी और अल्लाह की रहमत हम पर नाज़िल होगी।

🎧 सुनें

📜 आयत 32-36 — अल-हाक़्का

32ثُمَّ فِي سِلْسِلَةٍ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًا فَاسْلُكُوهُ
फिर एक ज़ंजीर में जिसकी नाप सत्तर गज़ की है उसे ख़ूब जकड़ दो
33إِنَّهُ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ
(क्यों कि) ये न तो बुज़ुर्ग ख़ुदा ही पर ईमान लाता था और न मोहताज के खिलाने पर आमादा (लोगों को) करता था
34وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ
तो आज न उसका कोई ग़मख्वार है
35فَلَيْسَ لَهُ الْيَوْمَ هَاهُنَا حَمِيمٌ
और न पीप के सिवा (उसके लिए) कुछ खाना है
36وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍ
जिसको गुनेहगारों के सिवा कोई नहीं खाएगा
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
34आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 34

सूरा अल-हाक़्का आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो आज न उसका कोई ग़मख्वार है

सूरा आयत 34/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए