यूसुफ · 97/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالُوا يَا أَبَانَا اسْتَغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا إِنَّا كُنَّا خَاطِئِينَ ۝٩٧
Qaaloo yaaa abaanas taghfir lanaa zunoo =banaaa innaa kunnaa khaati`een
📖 हिंदी अर्थ
उन लोगों ने अर्ज़ की ऐ अब्बा हमारे गुनाहों की मग़फिरत की (ख़ुदा की बारगाह में) हमारे वास्ते दुआ मॉगिए हम बेशक अज़सरतापा गुनेहगार हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَغْفِرْ لَنَا: हमारे लिए क्षमा की प्रार्थना करो, अल्लाह से हमारी मगफिरत की दुआ माँगो।
  • ذُنُوبَنَا: हमारे गुनाह, हमारी ख़ताएँ।
  • خَاطِئِينَ: ग़लती करने वाले, गुनाहगार, जानबूझकर या अनजाने में पाप करने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

जब हज़रत याकूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों को माफ़ कर दिया और उनसे कहा कि "आज तुम पर कोई मलामत नहीं, अल्लाह तुम्हें माफ़ करे", तो बेटों को अपनी ग़लती का और अधिक एहसास हुआ और उन्होंने अपने पिता से विनम्रतापूर्वक कहा: "ऐ हमारे पिता! आप हमारे लिए अल्लाह से मगफिरत की दुआ कीजिए। हम सचमुच अपने किए पर शर्मिंदा हैं और हमें यक़ीन है कि हमने यूसुफ (अलैहिस्सलाम) और उनके भाई के साथ जो किया, वह बहुत बड़ी ग़लती और गुनाह था। हम ख़ुद को इस क़ाबिल नहीं समझते कि सीधे अल्लाह से माफ़ी माँगें, इसलिए आप ही हमारे लिए दुआ फ़रमाइए।"

यह उनका इक़रार था कि हम ग़लती पर थे, हमने जानबूझकर या भूल से बुरा काम किया, और अब हमें अपनी ग़लती का एहसास है। उन्होंने अपने पिता को अपना वसीला बनाया, क्योंकि नबी की दुआ क़ुबूल होती है और उनका दिल बेटों के लिए नरम था। यह उनकी तौबा और नदामत का इज़हार था, और साथ ही यह सबक़ था कि गुनाह के बाद सिर्फ़ माफ़ी माँगना ही काफ़ी नहीं, बल्कि अपनी ग़लती को मानना और उस पर शर्मिंदा होना भी ज़रूरी है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. गुनाह करने के बाद सबसे पहला क़दम अपनी ग़लती को स्वीकार करना है, क्योंकि अल्लाह उन्हीं की तौबा क़ुबूल करता है जो अपने गुनाह का इक़रार करते हैं।
  2. बुज़ुर्गों और नेक लोगों से दुआ की दरख़्वास्त करना जाइज़ है, ख़ासकर माता-पिता की दुआ बच्चों के लिए बहुत असरदार होती है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है, वह चाहता है कि उसके बंदे उसकी तरफ़ रुजू करें, चाहे गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों।
  4. माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के लिए दुआ करें, और बच्चों को चाहिए कि वे अपने माता-पिता से दुआ की दरख़्वास्त करें, यह रिश्तों को मज़बूत करता है और दिलों को जोड़ता है।
  5. इस्लाम सिखाता है कि निराशा नहीं करनी चाहिए, भले ही इंसान कितना ही गुनाहगार हो, अल्लाह की मगफिरत की राह हमेशा खुली है, बशर्ते दिल सच्चा हो और तौबा सच्ची हो।


📜 आयत 95-99 — यूसुफ

95قَالُوا تَاللَّهِ إِنَّكَ لَفِي ضَلَالِكَ الْقَدِيمِ
वह लोग कुनबे वाले (पोते वग़ैराह) कहने लगे आप यक़ीनन अपने पुराने ख़याल (मोहब्बत) में (पड़े हुए) हैं
96فَلَمَّا أَن جَاءَ الْبَشِيرُ أَلْقَاهُ عَلَىٰ وَجْهِهِ فَارْتَدَّ بَصِيرًا ۖ قَالَ أَلَمْ أَقُل لَّكُمْ إِنِّي أَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
फिर (यूसुफ की) खुशखबरी देने वाला आया और उनके कुर्ते को उनके चेहरे पर डाल दिया तो याक़ूब फौरन फिर दोबारा ऑंख वाले हो गए (तब याक़ूब ने बेटों से) कहा क्यों मै तुमसे न कहता था जो बातें खुदा की तरफ से मै जानता हूँ तुम नहीं जानते
97قَالُوا يَا أَبَانَا اسْتَغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا إِنَّا كُنَّا خَاطِئِينَ
उन लोगों ने अर्ज़ की ऐ अब्बा हमारे गुनाहों की मग़फिरत की (ख़ुदा की बारगाह में) हमारे वास्ते दुआ मॉगिए हम बेशक अज़सरतापा गुनेहगार हैं
98قَالَ سَوْفَ أَسْتَغْفِرُ لَكُمْ رَبِّي ۖ إِنَّهُ هُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
याक़ूब ने कहा मै बहुत जल्द अपने परवरदिगार से तुम्हारी मग़फिरत की दुआ करुगाँ बेशक वह बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
99فَلَمَّا دَخَلُوا عَلَىٰ يُوسُفَ آوَىٰ إِلَيْهِ أَبَوَيْهِ وَقَالَ ادْخُلُوا مِصْرَ إِن شَاءَ اللَّهُ آمِنِينَ
(ग़रज़) जब फिर ये लोग (मय याकूब के) चले और यूसुफ शहर के बाहर लेने आए तो जब ये लोग यूसुफ के पास पहुँचे तो यूसुफ ने अपने माँ बाप को अपने पास जगह दी और (उनसे) कहा कि अब इन्शा अल्लाह बड़े इत्मिनान से मिस्र में चलिए
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अनुवाद — यूसुफ 97

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Tuesday, August 18, 2026

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