अल-हिज्र · 15/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
لَقَالُوا إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَارُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَّسْحُورُونَ ۝١٥
Laqaaloo innamaa sukkirat absaarunaa bal nahnu qawmum mashooroon
📖 हिंदी अर्थ
तब भी यहीं कहेगें कि हो न हो हमारी ऑंखें (नज़र बन्दी से) मतवाली कर दी गई हैं या नहीं तो हम लोगों पर जादू किया गया है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • سُكِّرَتْ: बंद कर दी गईं, अचेत कर दी गईं।
  • أَبْصَارُنَا: हमारी आँखें।
  • مَسْحُورُونَ: जिन पर जादू किया गया हो।

तफ़सीर:

यदि हम क़ुरैश के इनकार करने वालों पर आसमान का कोई दरवाज़ा खोल दें और वे उसमें चढ़ते हुए ऊपर चले जाएँ, यहाँ तक कि वे आसमान की अजीबों-ग़रीब चीज़ें और अल्लाह की कुदरत के नज़ारे अपनी आँखों से देख लें, तब भी वे ईमान नहीं लाएँगे। इसके विपरीत, वे यही कहेंगे कि हमारी आँखें बंद कर दी गई हैं या हमें धोखा दिया गया है, और हमने जो कुछ देखा वह सिर्फ़ एक धोखा था। वे यह भी कहेंगे कि हम पर जादू कर दिया गया है, और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने हमें अपने जादू से ऐसा भ्रमित कर दिया है कि हमें ये चीज़ें दिखाई दे रही हैं। उनका दिल अंधा है, इसलिए आँखों से चमत्कार देखकर भी वे हक़ को क़बूल नहीं करेंगे। उनकी यह हठधर्मिता और अंधेपन की हद है कि वे साफ़ सच्चाई को भी झूठ कहने से बाज़ नहीं आते।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान दिल का मामला है; जिसके दिल में अल्लाह की तरफ़ से अंधापन हो, उसके लिए कोई भी निशानी या चमत्कार फ़ायदा नहीं पहुँचा सकता। इसलिए हमें अपने दिल को साफ़ रखना चाहिए और हक़ को क़बूल करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
  2. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की कुदरत के नज़ारे और उसकी निशानियाँ हर जगह मौजूद हैं; जो सच्चे दिल से देखता है, वह ईमान ले आता है, और जो हठधर्म है, वह कभी हिदायत नहीं पाता।
  3. इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने अहंकार और ज़िद को छोड़कर अल्लाह की तरफ़ से आने वाली हर बात को खुले दिल से क़बूल करना चाहिए, क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है।
  4. यह आयत मुसलमानों को तसल्ली देती है कि अगर लोग आपकी बात न मानें, तो निराश न हों; क्योंकि हक़ की दावत का असर दिलों पर अल्लाह ही डालता है, और जिसे अल्लाह ने गुमराह किया, उसे कोई हिदायत नहीं दे सकता।


📜 आयत 13-17 — सूरा अल-हिज्र

13لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ الْأَوَّلِينَ
ये कुफ्फ़ार इस (क़ुरान) पर ईमान न लाएँगें और (ये कुछ अनोखी बात नहीं) अगलों के तरीक़े भी (ऐसे ही) रहें है
14وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا مِّنَ السَّمَاءِ فَظَلُّوا فِيهِ يَعْرُجُونَ
और अगर हम अपनी कुदरत से आसमान का एक दरवाज़ा भी खोल दें और ये लोग दिन दहाड़े उस दरवाज़े से (आसमान पर) चढ़ भी जाएँ
15لَقَالُوا إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَارُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَّسْحُورُونَ
तब भी यहीं कहेगें कि हो न हो हमारी ऑंखें (नज़र बन्दी से) मतवाली कर दी गई हैं या नहीं तो हम लोगों पर जादू किया गया है
16وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّاهَا لِلنَّاظِرِينَ
और हम ही ने आसमान में बुर्ज बनाए और देखने वालों के वास्ते उनके (सितारों से) आरास्ता (सजाया) किया
17وَحَفِظْنَاهَا مِن كُلِّ شَيْطَانٍ رَّجِيمٍ
और हर शैतान मरदूद की आमद रफत (आने जाने) से उन्हें महफूज़ रखा
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 15

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Friday, October 2, 2026

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