अल-हिज्र · 91/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
الَّذِينَ جَعَلُوا الْقُرْآنَ عِضِينَ ۝٩١
Allazeena ja`alul Quraana`ideen
📖 हिंदी अर्थ
(बाज़ को माना बाज को नहीं) तो ऐ रसूल तुम्हारे ही परवरदिगार की (अपनी) क़सम

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عِضِينَ (इज़ीन): यह 'عضو' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है टुकड़े या हिस्से। अर्थात् क़ुरआन को टुकड़ों-टुकड़ों में बाँटना, कुछ हिस्सों पर ईमान लाना और कुछ को अस्वीकार करना, या उसके बारे में अलग-अलग झूठे आरोप लगाना।

विस्तृत व्याख्या:

इस आयत में उन लोगों की निंदा की गई है जिन्होंने क़ुरआन को टुकड़ों में बाँट दिया। उनका तरीक़ा यह था कि वे क़ुरआन की आयतों को अपनी इच्छा के अनुसार तोड़-मरोड़ कर पेश करते थे। उनमें से कुछ कहते थे कि यह जादू है, कुछ कहते थे कि यह कहानत (भविष्यवाणी) है, कुछ इसे शायरी (कविता) कहते थे, और कुछ अन्य झूठे आरोप लगाते थे। उनका उद्देश्य लोगों को सत्य के मार्ग से रोकना और क़ुरआन के प्रति लोगों के दिलों में संदेह पैदा करना था। उन्होंने क़ुरआन के कुछ हिस्सों को मानने और कुछ को अस्वीकार करने की रणनीति अपनाई, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके। यह उनका सबसे बड़ा अपराध था कि उन्होंने अल्लाह की इस पवित्र पुस्तक को अपनी मनमानी व्याख्याओं का शिकार बनाया और उसे खंडित करके पेश किया।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. क़ुरआन अल्लाह की ओर से उतारी गई एक अटूट और पूर्ण पुस्तक है। इसे टुकड़ों में बाँटना या उसके कुछ भागों को स्वीकार करना और कुछ को अस्वीकार करना बड़ा पाप है।
  2. क़ुरआन के बारे में झूठे आरोप लगाना (जैसे इसे जादू, कविता या कहानत कहना) कुफ़्र और गुमराही की निशानी है।
  3. सच्चे मुसलमान का कर्तव्य है कि वह क़ुरआन को समग्र रूप से स्वीकार करे, उसकी हर आयत पर ईमान लाए और उसे अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाए।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें क़ुरआन की आयतों को अपनी इच्छा के अनुसार नहीं बदलना चाहिए, बल्कि उसे वैसे ही स्वीकार करना चाहिए जैसे वह उतारी गई है।
  5. क़ुरआन के प्रति सम्मान और उसकी शिक्षाओं पर अमल करना ही सच्ची सफलता का मार्ग है, और यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुँचाता है।


📜 आयत 89-93 — सूरा अल-हिज्र

89وَقُلْ إِنِّي أَنَا النَّذِيرُ الْمُبِينُ
(ऐ रसूल) उन कुफ्फारों पर इस तरह अज़ाब नाज़िल करेगें जिस तरह हमने उन लोगों पर नाज़िल किया
90كَمَا أَنزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِمِينَ
जिन्होंने क़ुरान को बॉट कर टुकडे टुकड़े कर डाला
91الَّذِينَ جَعَلُوا الْقُرْآنَ عِضِينَ
(बाज़ को माना बाज को नहीं) तो ऐ रसूल तुम्हारे ही परवरदिगार की (अपनी) क़सम
92فَوَرَبِّكَ لَنَسْأَلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ
कि हम उनसे जो कुछ ये (दुनिया में) किया करते थे (बहुत सख्ती से) ज़रुर बाज़ पुर्स (पुछताछ) करेंगे
93عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
पस जिसका तुम्हें हुक्म दिया गया है उसे वाजेए करके सुना दो
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
91आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 91

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पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

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