ताहा · 17/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
وَمَا تِلْكَ بِيَمِينِكَ يَا مُوسَىٰ ۝١٧
Wa maa tilka bi yamee nika yaa Moosaa
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ मूसा ये तुम्हारे दाहिने हाथ में क्या चीज़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَمَا تِلْكَ – "और वह क्या है?" (यह प्रश्नवाचक वाक्य है)
  • بِيَمِينِكَ – "तेरे दाहिने हाथ में"
  • يَا مُوسَى – "ऐ मूसा!"

विस्तृत तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) से एक ऐसा प्रश्न किया जो उनके दिल को और अधिक जागरूक करने के लिए था। यह प्रश्न सिर्फ़ जानकारी हासिल करने के लिए नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य था कि मूसा (अलैहिस्सलाम) स्वयं अपनी आँखों से देखें और अपनी ज़ुबान से उस चीज़ को पहचानें जो उनके हाथ में थी।

अल्लाह ने पूछा: "ऐ मूसा! तेरे दाहिने हाथ में यह क्या है?" यह एक ऐसा प्रश्न था जिसका उत्तर मूसा (अलैहिस्सलाम) को अच्छी तरह मालूम था। यह अरब के लोगों की आदत के अनुसार था कि जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ को पहचानना चाहता है, तो वह पूछता है, भले ही वह उसे जानता हो। इसका उद्देश्य यह होता है कि सामने वाला अपनी ज़ुबान से उस चीज़ का नाम ले, ताकि बात स्पष्ट हो जाए और दिल को पूरी तसल्ली हो जाए।

इस प्रश्न का एक और गहरा हिकमत (रहस्य) यह था कि जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी लाठी को पहचानेंगे और फिर देखेंगे कि वही लाठी एक साँप में बदल गई, तो उन्हें यह अहसास होगा कि यह कोई जादू या इंसानी करतब नहीं, बल्कि अल्लाह की कुदरत का एक महान चमत्कार है। इस तरह उनका ईमान और अधिक मज़बूत होगा और वे इस बात को अच्छी तरह समझ पाएँगे कि अल्लाह की ताक़त किसी भी चीज़ से परे है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों से बड़ी मुहब्बत और शफ़्क़त (दया) से पेश आता है। वह हमें धीरे-धीरे समझाता है, ताकि हमारे दिल उसकी कुदरत के नज़ारों से भर जाएँ। जिस तरह अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को उनकी लाठी के ज़रिए एक बड़ा मो'जिज़ा दिखाया, उसी तरह आज भी अल्लाह हमारे आस-पास की हर चीज़ में अपनी निशानियाँ रखता है। हमें चाहिए कि हम इन निशानियों पर ग़ौर करें और अपने रब की तरफ़ रुजू करें। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह से बात करने का अंदाज़ बड़ा प्यारा और नर्म होता है, और वह अपने बंदों को हमेशा भलाई की तरफ़ बुलाता है। हमें भी अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के इस प्यार भरे अंदाज़ को महसूस करना चाहिए और उसकी हर बात को दिल से क़बूल करना चाहिए।



📜 आयत 15-19 — ताहा

15إِنَّ السَّاعَةَ آتِيَةٌ أَكَادُ أُخْفِيهَا لِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا تَسْعَىٰ
(क्योंकि) क़यामत ज़रूर आने वाली है और मैं उसे लामहौला छिपाए रखूँगा ताकि हर शख्स (उसके ख़ौफ से नेकी करे) और वैसी कोशिश की है उसका उसे बदला दिया जाए
16فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَن لَّا يُؤْمِنُ بِهَا وَاتَّبَعَ هَوَاهُ فَتَرْدَىٰ
तो (कहीं) ऐसा न हो कि जो शख्स उसे दिल से नहीं मानता और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पड़ा वह तुम्हें इस (फिक्र) से रोक दे तो तुम तबाह हो जाओगे
17وَمَا تِلْكَ بِيَمِينِكَ يَا مُوسَىٰ
और ऐ मूसा ये तुम्हारे दाहिने हाथ में क्या चीज़ है
18قَالَ هِيَ عَصَايَ أَتَوَكَّأُ عَلَيْهَا وَأَهُشُّ بِهَا عَلَىٰ غَنَمِي وَلِيَ فِيهَا مَآرِبُ أُخْرَىٰ
अर्ज़ की ये तो मेरी लाठी है मैं उस पर सहारा करता हूँ और इससे अपनी बकरियों पर (और दरख्तों की) पत्तियाँ झाड़ता हूँ और उसमें मेरे और भी मतलब हैं
19قَالَ أَلْقِهَا يَا مُوسَىٰ
फ़रमाया ऐ मूसा उसको ज़रा ज़मीन पर डाल तो दो मूसा ने उसे डाल दिया
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अनुवाद — ताहा 17

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सूरा आयत 17/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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