Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَمَا تِلْكَ – "और वह क्या है?" (यह प्रश्नवाचक वाक्य है)
- بِيَمِينِكَ – "तेरे दाहिने हाथ में"
- يَا مُوسَى – "ऐ मूसा!"
विस्तृत तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) से एक ऐसा प्रश्न किया जो उनके दिल को और अधिक जागरूक करने के लिए था। यह प्रश्न सिर्फ़ जानकारी हासिल करने के लिए नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य था कि मूसा (अलैहिस्सलाम) स्वयं अपनी आँखों से देखें और अपनी ज़ुबान से उस चीज़ को पहचानें जो उनके हाथ में थी।
अल्लाह ने पूछा: "ऐ मूसा! तेरे दाहिने हाथ में यह क्या है?" यह एक ऐसा प्रश्न था जिसका उत्तर मूसा (अलैहिस्सलाम) को अच्छी तरह मालूम था। यह अरब के लोगों की आदत के अनुसार था कि जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ को पहचानना चाहता है, तो वह पूछता है, भले ही वह उसे जानता हो। इसका उद्देश्य यह होता है कि सामने वाला अपनी ज़ुबान से उस चीज़ का नाम ले, ताकि बात स्पष्ट हो जाए और दिल को पूरी तसल्ली हो जाए।
इस प्रश्न का एक और गहरा हिकमत (रहस्य) यह था कि जब मूसा (अलैहिस्सलाम) अपनी लाठी को पहचानेंगे और फिर देखेंगे कि वही लाठी एक साँप में बदल गई, तो उन्हें यह अहसास होगा कि यह कोई जादू या इंसानी करतब नहीं, बल्कि अल्लाह की कुदरत का एक महान चमत्कार है। इस तरह उनका ईमान और अधिक मज़बूत होगा और वे इस बात को अच्छी तरह समझ पाएँगे कि अल्लाह की ताक़त किसी भी चीज़ से परे है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों से बड़ी मुहब्बत और शफ़्क़त (दया) से पेश आता है। वह हमें धीरे-धीरे समझाता है, ताकि हमारे दिल उसकी कुदरत के नज़ारों से भर जाएँ। जिस तरह अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को उनकी लाठी के ज़रिए एक बड़ा मो'जिज़ा दिखाया, उसी तरह आज भी अल्लाह हमारे आस-पास की हर चीज़ में अपनी निशानियाँ रखता है। हमें चाहिए कि हम इन निशानियों पर ग़ौर करें और अपने रब की तरफ़ रुजू करें। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह से बात करने का अंदाज़ बड़ा प्यारा और नर्म होता है, और वह अपने बंदों को हमेशा भलाई की तरफ़ बुलाता है। हमें भी अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के इस प्यार भरे अंदाज़ को महसूस करना चाहिए और उसकी हर बात को दिल से क़बूल करना चाहिए।
📜 आयत 15-19 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 17
सूरा ताहा आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ मूसा ये तुम्हारे दाहिने हाथ में क्या चीज़…सूरा आयत 17/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


