अश-शुआरा · 129/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ ۝١٢٩
Wa tattakhizoona masaani`a la`allakum takhludoon
📖 हिंदी अर्थ
और बड़े बड़े महल तामीर करते हो गोया तुम हमेशा (यहीं) रहोगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَصَانِعَ: इसका अर्थ है मज़बूत किले, ऊँची इमारतें, या पानी के हौज़ (जलाशय) जो ज़मीन के नीचे बनाए जाते थे।
  • لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ: गोया कि तुम हमेशा इस दुनिया में रहोगे और कभी मरोगे नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला हज़रत हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम 'आद' के उन कुकर्मों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनमें वे डूबे हुए थे। वे लोग हर ऊँची जगह पर बेकार की इमारतें और ऊँचे-ऊँचे किले बनाते थे, और पानी के हौज़ भी बनाते थे, गोया वे इस दुनिया में हमेशा रहने वाले हैं और उन्हें कभी मौत नहीं आएगी। उन्होंने अपनी ताक़त और सामर्थ्य पर इतना घमंड कर लिया था कि उन्हें अल्लाह की याद ही भूल गई थी। वे ये सब कुछ इसलिए करते थे कि मानो वे हमेशा यहीं रहेंगे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि मौत का फ़रिश्ता उनका इंतज़ार कर रहा है और उनकी ये ऊँची इमारतें उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकतीं।

ये आयत हमारे लिए एक बड़ी सीख है। आज हम भी दुनिया की इमारतों, दौलत और आराम की चीज़ों में इस कदर मशगूल हो गए हैं कि मौत और आख़िरत को भूल बैठे हैं। हम सोचते हैं कि ये दुनिया हमेशा रहेगी, लेकिन ये दुनिया तो एक दिन ख़त्म होनी है। अल्लाह तआला हमें यही सिखाता है कि दुनिया की चीज़ों के पीछे भागने के साथ-साथ हमें अपनी आख़िरत भी संवारनी चाहिए। हमें अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की इबादत, नेक काम और दूसरों की मदद को भी जगह देनी चाहिए। याद रखिए, ये दुनिया की इमारतें और दौलत किसी को भी मौत से नहीं बचा सकतीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और नेक अमल ही हमें आख़िरत में काम आएंगे। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की बताई हुई राह पर चलाएँ और दुनिया की मोहब्बत को अपने दिल से निकालकर अल्लाह की मोहब्बत को बसाएँ।



📜 आयत 127-131 — सूरा अश-शुआरा

127وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
मै तो तुम से इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी उजरत तो बस सारी ख़ुदायी के पालने वाले (ख़ुदा) पर है
128أَتَبْنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ آيَةً تَعْبَثُونَ
तो क्या तुम ऊँची जगह पर बेकार यादगारे बनाते फिरते हो
129وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ
और बड़े बड़े महल तामीर करते हो गोया तुम हमेशा (यहीं) रहोगे
130وَإِذَا بَطَشْتُم بَطَشْتُمْ جَبَّارِينَ
और जब तुम (किसी पर) हाथ डालते हो तो सरकशी से हाथ डालते हो
131فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो तुम ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
129आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 129

सूरा अश-शुआरा आयत 129 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बड़े बड़े महल तामीर करते हो गोया तुम हमेशा…

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Friday, October 2, 2026

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