अश-शुआरा · 64/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ الْآخَرِينَ ۝٦٤
Wa azlafnaa sammal aakhareen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उसी जगह दूसरे फरीक (फिरऔन के साथी) को क़रीब कर दिया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَزْلَفْنَا: हमने निकट किया या पास ले आए।
  • ثَمَّ: वहाँ, उस स्थान पर।
  • الْآخَرِينَ: दूसरों को, अर्थात फ़िरऔन और उसकी क़ौम को।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को और उनकी क़ौम को समुद्र पार कराकर नजात दी, तो फ़िरऔन और उसकी सेना ने उनका पीछा किया। वे उसी रास्ते पर चल पड़े जो समुद्र में बन गया था। अल्लाह तआला ने फ़रमाया: "और हमने वहाँ दूसरों को (यानी फ़िरऔन और उसके साथियों को) निकट कर दिया।" यानी हमने उन्हें उसी स्थान पर पहुँचा दिया जहाँ समुद्र फटा हुआ था, और उन्हें उसी रास्ते में दाखिल कर दिया, जिससे वे मूसा (अलैहिस्सलाम) का पीछा करते हुए समुद्र के अंदर चले गए। उन्होंने समझा कि रास्ता सुरक्षित है, लेकिन यह अल्लाह की योजना थी कि वे सब वहाँ इकट्ठे हों और फिर समुद्र उन पर बंद हो जाए, ताकि वे डूबकर हलाक हों।

यह अल्लाह तआला का कमाल का इंतज़ाम था—मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनकी क़ौम को सलामती के साथ पार कराना और फ़िरऔनियों को उसी रास्ते में ले जाकर ग़रक़ कर देना। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी इबरत (नसीहत) है जो अल्लाह के नबियों के खिलाफ़ सरकशी और ज़ुल्म करते हैं। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और ज़ालिमों को उनकी सज़ा देता है, चाहे वे कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह तआला पर भरोसा रखें, क्योंकि वही सबसे बड़ा मददगार है। जब मूसा (अलैहिस्सलाम) समुद्र के किनारे खड़े थे और उनके साथी घबरा रहे थे, तो अल्लाह ने समुद्र को चीरकर रास्ता बना दिया। यह अल्लाह की क़ुदरत है कि वह हर मुश्किल से निकलने का रास्ता बनाता है। हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह पर यक़ीन रखें और उसकी रहमत से कभी मायूस न हों। यह क़िस्सा हमें बताता है कि सच्चाई और ईमान हमेशा बुलंद होता है, और झूठ और ज़ुल्म का अंजाम तबाही है।



📜 आयत 62-66 — सूरा अश-शुआरा

62قَالَ كَلَّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهْدِينِ
कि अब तो पकड़े गए मूसा ने कहा हरगिज़ नहीं क्योंकि मेरे साथ मेरा परवरदिगार है
63فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِب بِّعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ
वह फौरन मुझे कोई (मुखलिसी का) रास्ता बता देगा तो हमने मूसा के पास वही भेजी कि अपनी छड़ी दरिया पर मारो (मारना था कि) फौरन दरिया फुट के टुकड़े टुकड़े हो गया तो गोया हर टुकड़ा एक बड़ा ऊँचा पहाड़ था
64وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ الْآخَرِينَ
और हमने उसी जगह दूसरे फरीक (फिरऔन के साथी) को क़रीब कर दिया
65وَأَنجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُ أَجْمَعِينَ
और मूसा और उसके साथियों को हमने (डूबने से) बचा लिया
66ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ
फिर दूसरे फरीक़ (फिरऔन और उसके साथियों) को डुबोकर हलाक़ कर दिया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
64आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 64

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Friday, October 2, 2026

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