अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- आबाउकुमुल-अक़्दमून: तुम्हारे पुराने बाप-दादा, जो पहले गुज़र चुके हैं।
तफ़सीर:
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से यह बात फ़रमाई कि क्या तुमने कभी ग़ौर-ओ-फ़िक्र से देखा कि आख़िर तुम किस चीज़ की इबादत कर रहे हो? क्या वह मूर्तियाँ, जिन्हें तुम पूजते हो—और न सिर्फ़ तुम, बल्कि तुमसे पहले तुम्हारे पुराने बाप-दादा भी इन्हीं की पूजा करते रहे—क्या उन्होंने तुम्हें कोई फ़ायदा पहुँचाया? क्या वे तुम्हारी सुनती हैं? क्या वे तुम्हें नुक़्सान से बचा सकती हैं? क्या वे तुम्हारी कोई मदद कर सकती हैं? हरगिज़ नहीं! वे तो बेजान हैं, न उनमें सुनने की ताक़त है, न देखने की, न किसी भलाई या बुराई की क़ुदरत।
यह एक बहुत बड़ी सीख है हमारे लिए। इंसान अक्सर अपने बाप-दादा की राह पर चलने को ही सही समझता है, बिना यह देखे कि वह राह सही है भी या नहीं। लेकिन हज़रत इब्राहीम ने अपनी क़ौम को जगाया कि अंधी परंपरा को छोड़ो, अपनी अक़्ल से काम लो, और देखो कि आख़िर सच्चाई क्या है। क्या वह चीज़ जो न सुन सके, न देख सके, न फ़ायदा पहुँचा सके, न नुक़्सान से बचा सके—वह इबादत के लायक़ है?
यही वह पैग़ाम है जो आज भी हर इंसान के लिए ज़िंदा है। हमें भी चाहिए कि हम अपने आस-पास देखें, ग़ौर करें कि हम किसे अपना रब मानते हैं, किससे मदद माँगते हैं, और किसके आगे सर झुकाते हैं। क्या वह सच में क़ाबिल-ए-इबादत है? सिर्फ़ वही अल्लाह इबादत के लायक़ है जिसने हमें पैदा किया, जो हमें रिज़्क़ देता है, जो बीमारी में शिफ़ा देता है, और जो हमें मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करेगा।
हज़रत इब्राहीम का यह अंदाज़-ए-बयान बहुत प्यारा है—वे अपनी क़ौम को डाँटते नहीं, बल्कि उन्हें सोचने की दावत देते हैं। वे कहते हैं: "ज़रा आँखें खोलकर देखो, दिल लगाकर सोचो।" यही दावत हमें भी देनी है—अपने घर, अपने समाज और अपने देश के लोगों को—कि आओ, सच्चाई को समझें, और उस रब की इबादत करें जो सच में सुनने वाला, देखने वाला और हर चीज़ पर क़ादिर है।
याद रखिए, अल्लाह तआला ही वह है जो हमें राह दिखाता है, हमें खिलाता-पिलाता है, बीमारी में शिफ़ा देता है, और आख़िरत में हमारी मदद करेगा। उसी की तरफ़ हमें रुजू करना है, और उसी से माफ़ी की उम्मीद रखनी है। यही वह रास्ता है जो हमें कामयाबी की तरफ़ ले जाता है—दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
📜 आयत 74-78 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 76
सूरा अश-शुआरा आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या तुम्हारे अगले बाप दादा (करते थे) ये सब मेरे…सूरा आयत 76/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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