अश-शुआरा · 76/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
أَنتُمْ وَآبَاؤُكُمُ الْأَقْدَمُونَ ۝٧٦
Antum wa aabaaa`ukumul aqdamoon
📖 हिंदी अर्थ
या तुम्हारे अगले बाप दादा (करते थे) ये सब मेरे यक़ीनी दुश्मन हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • आबाउकुमुल-अक़्दमून: तुम्हारे पुराने बाप-दादा, जो पहले गुज़र चुके हैं।

तफ़सीर:

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम से यह बात फ़रमाई कि क्या तुमने कभी ग़ौर-ओ-फ़िक्र से देखा कि आख़िर तुम किस चीज़ की इबादत कर रहे हो? क्या वह मूर्तियाँ, जिन्हें तुम पूजते हो—और न सिर्फ़ तुम, बल्कि तुमसे पहले तुम्हारे पुराने बाप-दादा भी इन्हीं की पूजा करते रहे—क्या उन्होंने तुम्हें कोई फ़ायदा पहुँचाया? क्या वे तुम्हारी सुनती हैं? क्या वे तुम्हें नुक़्सान से बचा सकती हैं? क्या वे तुम्हारी कोई मदद कर सकती हैं? हरगिज़ नहीं! वे तो बेजान हैं, न उनमें सुनने की ताक़त है, न देखने की, न किसी भलाई या बुराई की क़ुदरत।

यह एक बहुत बड़ी सीख है हमारे लिए। इंसान अक्सर अपने बाप-दादा की राह पर चलने को ही सही समझता है, बिना यह देखे कि वह राह सही है भी या नहीं। लेकिन हज़रत इब्राहीम ने अपनी क़ौम को जगाया कि अंधी परंपरा को छोड़ो, अपनी अक़्ल से काम लो, और देखो कि आख़िर सच्चाई क्या है। क्या वह चीज़ जो न सुन सके, न देख सके, न फ़ायदा पहुँचा सके, न नुक़्सान से बचा सके—वह इबादत के लायक़ है?

यही वह पैग़ाम है जो आज भी हर इंसान के लिए ज़िंदा है। हमें भी चाहिए कि हम अपने आस-पास देखें, ग़ौर करें कि हम किसे अपना रब मानते हैं, किससे मदद माँगते हैं, और किसके आगे सर झुकाते हैं। क्या वह सच में क़ाबिल-ए-इबादत है? सिर्फ़ वही अल्लाह इबादत के लायक़ है जिसने हमें पैदा किया, जो हमें रिज़्क़ देता है, जो बीमारी में शिफ़ा देता है, और जो हमें मौत के बाद दोबारा ज़िंदा करेगा।

हज़रत इब्राहीम का यह अंदाज़-ए-बयान बहुत प्यारा है—वे अपनी क़ौम को डाँटते नहीं, बल्कि उन्हें सोचने की दावत देते हैं। वे कहते हैं: "ज़रा आँखें खोलकर देखो, दिल लगाकर सोचो।" यही दावत हमें भी देनी है—अपने घर, अपने समाज और अपने देश के लोगों को—कि आओ, सच्चाई को समझें, और उस रब की इबादत करें जो सच में सुनने वाला, देखने वाला और हर चीज़ पर क़ादिर है।

याद रखिए, अल्लाह तआला ही वह है जो हमें राह दिखाता है, हमें खिलाता-पिलाता है, बीमारी में शिफ़ा देता है, और आख़िरत में हमारी मदद करेगा। उसी की तरफ़ हमें रुजू करना है, और उसी से माफ़ी की उम्मीद रखनी है। यही वह रास्ता है जो हमें कामयाबी की तरफ़ ले जाता है—दुनिया में भी और आख़िरत में भी।



📜 आयत 74-78 — सूरा अश-शुआरा

74قَالُوا بَلْ وَجَدْنَا آبَاءَنَا كَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ
कहने लगे (कि ये सब तो कुछ नहीं) बल्कि हमने अपने बाप दादाओं को ऐसा ही करते पाया है
75قَالَ أَفَرَأَيْتُم مَّا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ
इबराहीम ने कहा क्या तुमने देखा भी कि जिन चीज़ों कीे तुम परसतिश करते हो
76أَنتُمْ وَآبَاؤُكُمُ الْأَقْدَمُونَ
या तुम्हारे अगले बाप दादा (करते थे) ये सब मेरे यक़ीनी दुश्मन हैं
77فَإِنَّهُمْ عَدُوٌّ لِّي إِلَّا رَبَّ الْعَالَمِينَ
मगर सारे जहाँ का पालने वाला जिसने मुझे पैदा किया (वही मेरा दोस्त है)
78الَّذِي خَلَقَنِي فَهُوَ يَهْدِينِ
फिर वही मेरी हिदायत करता है
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
76आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 76

सूरा अश-शुआरा आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या तुम्हारे अगले बाप दादा (करते थे) ये सब मेरे…

सूरा आयत 76/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए