आल-इमरान · 67/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
مَا كَانَ إِبْرَاهِيمُ يَهُودِيًّا وَلَا نَصْرَانِيًّا وَلَٰكِن كَانَ حَنِيفًا مُّسْلِمًا وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ ۝٦٧
Maa kaana Ibraaheemu Yahoodiyyanw wa laa Nasraa niyyanw wa laakin kaana Haneefam Muslimanw wa maa kaana minal mushrikeen
📖 हिंदी अर्थ
इबराहीम न तो यहूदी थे और न नसरानी बल्कि निरे खरे हक़ पर थे (और) फ़रमाबरदार (बन्दे) थे और मुशरिकों से भी न थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَنِيفًا (हनीफ़न): सभी बातिल (झूठे) धर्मों से हटकर सीधे और सच्चे धर्म (एकेश्वरवाद) की ओर झुकने वाला।
  • مُسْلِمًا (मुस्लिमन): अल्लाह के आगे पूर्ण रूप से सिर झुकाने वाला और उसकी आज्ञा का पालन करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को उन झूठे आरोपों से पाक साफ़ बताता है जो यहूदियों, ईसाइयों और मुशरिकीन (बुतपरस्त) अरबों ने लगाए थे। यहूदी दावा करते थे कि इब्राहीम यहूदी थे, ईसाई कहते थे कि वे ईसाई थे, और मक्का के मुशरिकीन कहते थे कि वे उन्हीं के धर्म (बुतपरस्ती) पर थे। अल्लाह ने इन सब झूठे दावों का खंडन करते हुए फ़रमाया कि इब्राहीम न तो यहूदी थे और न ही ईसाई, क्योंकि यहूदी धर्म (तौरात) और ईसाई धर्म (इंजील) तो उनके बाद आए। वे तो "हनीफ़" थे, यानी हर बातिल और झूठे धर्म से मुँह मोड़कर सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा पर चलने वाले थे। वे अल्लाह के पूर्ण आज्ञाकारी (मुस्लिम) थे और किसी भी तरह के शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाने) से बिल्कुल दूर थे। यह स्पष्ट कर दिया गया कि इब्राहीम का असली धर्म इस्लाम (अल्लाह के आगे समर्पण) था, जो सभी पैग़म्बरों का धर्म रहा है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि नस्ल, जाति या किसी गिरोह से जुड़े होने का दावा करना सच्चा धर्म नहीं है, बल्कि सच्चा धर्म अल्लाह के आगे पूर्ण समर्पण (इस्लाम) है।
  2. हज़रत इब्राहीम की पवित्रता से पता चलता है कि इस्लाम ही वह सच्चा और मौलिक धर्म है जो आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर आख़िरी पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक सभी पैग़म्बरों का धर्म रहा है।
  3. यह आयत हमें शिर्क (बुतपरस्ती) से बचने और अल्लाह की एकता (तौहीद) पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देती है, क्योंकि इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अकेले दुनिया भर के झूठे धर्मों के सामने सच्चाई का झंडा बुलंद किया।
  4. यह यहूदियों और ईसाइयों के झूठे दावों की वास्तविकता उजागर करती है और बताती है कि सच्ची नजात (मुक्ति) सिर्फ़ अल्लाह के बताए रास्ते (इस्लाम) पर चलने में है, न कि किसी व्यक्ति या गिरोह से मुहब्बत के दावे में।


📜 आयत 65-69 — सूरा आल-इमरान

65يَا أَهْلَ الْكِتَابِ لِمَ تُحَاجُّونَ فِي إِبْرَاهِيمَ وَمَا أُنزِلَتِ التَّوْرَاةُ وَالْإِنجِيلُ إِلَّا مِن بَعْدِهِ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
ऐ अहले किताब तुम इबराहीम के बारे में (ख्वाह मा ख्वाह) क्यों झगड़ते हो कि कोई उनको नसरानी कहता है कोई यहूदी हालॉकि तौरेत व इन्जील (जिनसे यहूद व नसारा की इब्तेदा है वह) तो उनके बाद ही नाज़िल हुई
66هَا أَنتُمْ هَٰؤُلَاءِ حَاجَجْتُمْ فِيمَا لَكُم بِهِ عِلْمٌ فَلِمَ تُحَاجُّونَ فِيمَا لَيْسَ لَكُم بِهِ عِلْمٌ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते? (ऐ लो अरे) तुम वही एहमक़ लोग हो कि जिस का तुम्हें कुछ इल्म था उसमें तो झगड़ा कर चुके (खैर) फिर तब उसमें क्या (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़ने बैठे हो जिसकी (सिरे से) तुम्हें कुछ ख़बर नहीं और (हकॣक़ते हाल तो) खुदा जानता है और तुम नहीं जानते
67مَا كَانَ إِبْرَاهِيمُ يَهُودِيًّا وَلَا نَصْرَانِيًّا وَلَٰكِن كَانَ حَنِيفًا مُّسْلِمًا وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشْرِكِينَ
इबराहीम न तो यहूदी थे और न नसरानी बल्कि निरे खरे हक़ पर थे (और) फ़रमाबरदार (बन्दे) थे और मुशरिकों से भी न थे
68إِنَّ أَوْلَى النَّاسِ بِإِبْرَاهِيمَ لَلَّذِينَ اتَّبَعُوهُ وَهَٰذَا النَّبِيُّ وَالَّذِينَ آمَنُوا ۗ وَاللَّهُ وَلِيُّ الْمُؤْمِنِينَ
इबराहीम से ज्यादा ख़ुसूसियत तो उन लोगों को थी जो ख़ास उनकी पैरवी करते थे और उस पैग़म्बर और ईमानदारों को (भी) है और मोमिनीन का ख़ुदा मालिक है
69وَدَّت طَّائِفَةٌ مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ لَوْ يُضِلُّونَكُمْ وَمَا يُضِلُّونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَ
(मुसलमानो) अहले किताब से एक गिरोह ने बहुत चाहा कि किसी तरह तुमको राहेरास्त से भटका दे हालॉकि वह (अपनी तदबीरों से तुमको तो नहीं मगर) अपने ही को भटकाते हैं
आल-इमरानकुरान सूची
200आयत
मदनीअवतरण स्थान
67आयत

अनुवाद — आल-इमरान 67

सूरा आल-इमरान आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इबराहीम न तो यहूदी थे और न नसरानी बल्कि निरे…

सूरा आयत 67/200 — सूरा आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा आल-इमरान सुनें, सूरा आल-इमरान अनुवाद, सूरा आल-इमरान mp3, सूरा आल-इमरान pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए