Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رَبِّ — हे मेरे पालनहार!
- هَبْ لِي — मुझे प्रदान कर / मुझे दे।
- مِنَ الصَّالِحِينَ — नेक और सदाचारी लोगों में से (एक नेक संतान)।
व्याख्या:
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से हिजरत (प्रवास) करने का निर्णय लिया, क्योंकि उनकी क़ौम उन्हें ईमान की दावत से रोक रही थी और उन पर अत्याचार कर रही थी। जब वे अल्लाह की राह में अपने वतन को छोड़कर निकले, तो उन्होंने अपने रब से एक प्यारी और नेक संतान की दुआ माँगी। उन्होंने कहा: "ऐ मेरे रब! मुझे एक नेक और सदाचारी बेटा प्रदान कर।"
यह दुआ उन्होंने उस समय की जब वे एक नई ज़मीन पर पहुँचे थे, और उन्हें एक ऐसे सहायक और साथी की ज़रूरत महसूस हुई जो उनके साथ अल्लाह की इबादत में मदद करे, दावत के काम में सहारा बने, और अकेलेपन में उन्हें सुकून दे। उन्होंने सिर्फ़ संतान नहीं माँगी, बल्कि "الصَّالِحِينَ" (नेक लोगों में से) माँगा — यानी उन्होंने नेकी और परहेज़गारी को संतान की सबसे बड़ी खूबी ठहराया। यह हमें सिखाता है कि संतान की दुआ करते समय हमें सिर्फ़ औलाद की ख्वाहिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि नेक और अच्छी संतान की दुआ करनी चाहिए जो दीन और दुनिया दोनों में हमारे लिए सरमाया बने।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब भी हम किसी नई मंज़िल की ओर क़दम बढ़ाएँ, तो अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें अच्छे साथी, नेक संतान और सहायक प्रदान करे। हज़रत इब्राहीम की यह दुआ हमें यह भी बताती है कि अल्लाह से माँगने में कोई शर्म नहीं है — चाहे हम कितनी भी बड़ी मुसीबत में हों, अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। उन्होंने अपनी क़ौम छोड़ी, लेकिन अल्लाह ने उन्हें ऐसी नेक संतान दी जो आगे चलकर नबी हुए — हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) — और इस तरह अल्लाह ने उनकी दुआ को क़ुबूल करके उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त अता की।
यह दुआ हमारे लिए एक नमूना है कि हमें अपनी संतान के लिए हमेशा नेकी की दुआ करनी चाहिए, और याद रखना चाहिए कि असली कामयाबी दुनिया की दौलत में नहीं, बल्कि नेक संतान और अल्लाह की रज़ा में है।
📜 आयत 98-102 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 100
सूरा अस-साफ्फात आयत 100 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की)…सूरा आयत 100/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 98–102. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


