अस-साफ्फात · 100/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ ۝١٠٠
Rabbi hab lee minas saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَبِّ — हे मेरे पालनहार!
  • هَبْ لِي — मुझे प्रदान कर / मुझे दे।
  • مِنَ الصَّالِحِينَ — नेक और सदाचारी लोगों में से (एक नेक संतान)।

व्याख्या:

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से हिजरत (प्रवास) करने का निर्णय लिया, क्योंकि उनकी क़ौम उन्हें ईमान की दावत से रोक रही थी और उन पर अत्याचार कर रही थी। जब वे अल्लाह की राह में अपने वतन को छोड़कर निकले, तो उन्होंने अपने रब से एक प्यारी और नेक संतान की दुआ माँगी। उन्होंने कहा: "ऐ मेरे रब! मुझे एक नेक और सदाचारी बेटा प्रदान कर।"

यह दुआ उन्होंने उस समय की जब वे एक नई ज़मीन पर पहुँचे थे, और उन्हें एक ऐसे सहायक और साथी की ज़रूरत महसूस हुई जो उनके साथ अल्लाह की इबादत में मदद करे, दावत के काम में सहारा बने, और अकेलेपन में उन्हें सुकून दे। उन्होंने सिर्फ़ संतान नहीं माँगी, बल्कि "الصَّالِحِينَ" (नेक लोगों में से) माँगा — यानी उन्होंने नेकी और परहेज़गारी को संतान की सबसे बड़ी खूबी ठहराया। यह हमें सिखाता है कि संतान की दुआ करते समय हमें सिर्फ़ औलाद की ख्वाहिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि नेक और अच्छी संतान की दुआ करनी चाहिए जो दीन और दुनिया दोनों में हमारे लिए सरमाया बने।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जब भी हम किसी नई मंज़िल की ओर क़दम बढ़ाएँ, तो अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें अच्छे साथी, नेक संतान और सहायक प्रदान करे। हज़रत इब्राहीम की यह दुआ हमें यह भी बताती है कि अल्लाह से माँगने में कोई शर्म नहीं है — चाहे हम कितनी भी बड़ी मुसीबत में हों, अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। उन्होंने अपनी क़ौम छोड़ी, लेकिन अल्लाह ने उन्हें ऐसी नेक संतान दी जो आगे चलकर नबी हुए — हज़रत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) — और इस तरह अल्लाह ने उनकी दुआ को क़ुबूल करके उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त अता की।

यह दुआ हमारे लिए एक नमूना है कि हमें अपनी संतान के लिए हमेशा नेकी की दुआ करनी चाहिए, और याद रखना चाहिए कि असली कामयाबी दुनिया की दौलत में नहीं, बल्कि नेक संतान और अल्लाह की रज़ा में है।



📜 आयत 98-102 — अस-साफ्फात

98فَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَسْفَلِينَ
और (उसमें आग सुलगा कर उसी दहकती हुई आग में इसको डाल दो) फिर उन लोगों ने इबराहीम के साथ मक्कारी करनी चाही
99وَقَالَ إِنِّي ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّي سَيَهْدِينِ
तो हमने (आग सर्द गुलज़ार करके) उन्हें नीचा दिखाया और जब (आज़र ने) इबराहीम को निकाल दिया तो बोले मैं अपने परवरदिगार की तरफ जाता हूँ
100رَبِّ هَبْ لِي مِنَ الصَّالِحِينَ
वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की) परवरदिगार मुझे एक नेको कार (फरज़न्द) इनायत फरमा
101فَبَشَّرْنَاهُ بِغُلَامٍ حَلِيمٍ
तो हमने उनको एक बड़े नरम दिले लड़के (के पैदा होने की) खुशख़बरी दी
102فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ
फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीRevelation
100आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 100

सूरा अस-साफ्फात आयत 100 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह अनक़रीब ही मुझे रूबरा कर देगा (फिर ग़रज की)…

सूरा आयत 100/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 98–102. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए