अस-साफ्फात · 104/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَنَادَيْنَاهُ أَن يَا إِبْرَاهِيمُ ۝١٠٤
Wa naadainaahu ai yaaaa Ibraheem
📖 हिंदी अर्थ
और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَنَادَيْنَاهُ: और हमने उसे पुकारा (अर्थात अल्लाह ने इब्राहीम अलैहिस्सलाम को पुकारा)
  • أَنْ يَا إِبْرَاهِيمُ: कि ऐ इब्राहीम!

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम अपने बेटे इस्माइल को अल्लाह के हुक्म की तामील के लिए ज़बह करने के लिए तैयार हुए, और दोनों ने अल्लाह के आदेश के सामने सर झुका दिया, तो उस नाज़ुक और कठिन घड़ी में अल्लाह तआला ने उन्हें पुकारा: "ऐ इब्राहीम!" यह पुकार रहमत और इनायत की पुकार थी, जो उनके सब्र और इताअत (आज्ञाकारिता) के इम्तिहान के बाद आई।

यह वह मौका था जब इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने का पूरा इरादा कर लिया था, और बेटे ने भी अपने पिता की बात मानकर अल्लाह के हुक्म के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया था। यही वह लम्हा था जब अल्लाह ने उन्हें आवाज़ दी—यह आवाज़ उनके लिए खुशखबरी और राहत लेकर आई, क्योंकि अल्लाह ने उनकी नीयत और उनके अमल को क़बूल कर लिया था।

इस पुकार में हमारे लिए बहुत बड़ा सबक है: जब इंसान अल्लाह की राह में अपनी सबसे प्यारी चीज़ को क़ुर्बान करने के लिए तैयार हो जाता है, तो अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता। अल्लाह अपने बंदे की नीयत देखता है और उसे उसके अमल का अज्र (बदला) देता है। इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे को क़ुर्बान करने का हुक्म पाकर झिझका नहीं, बल्कि पूरे सब्र और इत्मीनान के साथ उसे पूरा करने के लिए बढ़े, और अल्लाह ने उन्हें इसी लिए पुकारा—कि ऐ इब्राहीम! तूने अपने रब का हुक्म मान लिया और अपने ख्वाब (सपने) की तस्दीक कर दी।

यह पुकार सिर्फ इब्राहीम के लिए नहीं थी, बल्कि हर उस मोमिन के लिए एक पैगाम है जो अल्लाह की राह में मुश्किलों का सामना करता है। अल्लाह उसे अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि सही वक्त पर उसे राहत और कामयाबी अता करता है। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं और उसके हुक्म के सामने सर झुकाते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आखिरत में इज़्ज़त देता है।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह की राह में कुर्बानी देने वालों को अल्लाह कभी ज़ाया नहीं करता। इब्राहीम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी को अल्लाह ने क़बूल किया और उनके बेटे को बचा लिया, और यह सुन्नत क़यामत तक के लिए उनकी यादगार बन गई। यही वह महान त्याग है जिसे अल्लाह ने अपने कलाम में हमेशा के लिए अमर कर दिया।

आज भी जब हम इस आयत को पढ़ते हैं, तो हमें याद आता है कि अल्लाह अपने बंदों के साथ कितना मेहरबान है—वह उन्हें उनकी ताकत से ज्यादा बोझ नहीं डालता, और जब वे उसकी राह में सच्चे दिल से कदम बढ़ाते हैं, तो वह खुद उन्हें पुकारता है और उनकी मदद करता है।



📜 आयत 102-106 — अस-साफ्फात

102فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ السَّعْيَ قَالَ يَا بُنَيَّ إِنِّي أَرَىٰ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أَذْبَحُكَ فَانظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَا أَبَتِ افْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّابِرِينَ
फिर जब इस्माईल अपने बाप के साथ दौड़ धूप करने लगा तो (एक दफा) इबराहीम ने कहा बेटा खूब मैं (वही के ज़रिये क्या) देखता हूँ कि मैं तो खुद तुम्हें ज़िबाह कर रहा हूँ तो तुम भी ग़ौर करो तुम्हारी इसमें क्या राय है इसमाईल ने कहा अब्बा जान जो आपको हुक्म हुआ है उसको (बे तअम्मुल) कीजिए अगर खुदा ने चाहा तो मुझे आप सब्र करने वालों में से पाएगे
103فَلَمَّا أَسْلَمَا وَتَلَّهُ لِلْجَبِينِ
फिर जब दोनों ने ये ठान ली और बाप ने बेटे को (ज़िबाह करने के लिए) माथे के बल लिटाया
104وَنَادَيْنَاهُ أَن يَا إِبْرَاهِيمُ
और हमने (आमादा देखकर) आवाज़ दी ऐ इबराहीम
105قَدْ صَدَّقْتَ الرُّؤْيَا ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया अब तुम दोनों को बड़े मरतबे मिलेगें हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर देते हैं
106إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ الْبَلَاءُ الْمُبِينُ
इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी बड़ा सख्त और सरीही इम्तिहान था
अस-साफ्फातकुरान सूची
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104आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 104

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Tuesday, August 18, 2026

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