अन-नज्म · 46/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
مِن نُّطْفَةٍ إِذَا تُمْنَىٰ ۝٤٦
Min nutfatin izaa tumnaa
📖 हिंदी अर्थ
पैदा करता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نُّطْفَةٍ (नुत्फ़ा): पुरुष और स्त्री के वीर्य का वह तत्व जो गर्भाशय में पहुँचता है।
  • تَمْنَى (तुम्ना): जो (गर्भाशय में) डाला जाए, बहाया जाए या प्रवाहित किया जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी क़ुदरत (शक्ति) के अद्भुत नमूनों में से एक और नमूना बयान किया है। वह बताता है कि उसने नर और मादा के जोड़े कैसे बनाए — चाहे वह इंसान हों या जानवर — और इन दोनों की उत्पत्ति का आधार एक बहुत ही साधारण और कमज़ोर चीज़ है: नुत्फ़ा (वीर्य की एक बूंद)। यह नुत्फ़ा जब गर्भाशय में डाला जाता है, तो अल्लाह की इच्छा और उसकी रचनात्मक शक्ति से उसी से एक पूरा इंसान या जानवर बन जाता है — जिसमें शरीर, रूह (आत्मा), दिल, दिमाग़, आँखें, कान, हाथ-पैर — सब कुछ होता है।

यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जो अल्लाह एक छोटी सी बूंद से इतना बड़ा और जटिल इंसान बना सकता है, क्या वह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर (सक्षम) नहीं है? बेशक वह हर चीज़ पर पूरी तरह क़ादिर है।

दावती पहलू (प्रेरक संदेश):

इस आयत पर ग़ौर करने से हमारे दिल में अल्लाह के प्रति शुक्र और मुहब्बत पैदा होती है। जब हम सोचते हैं कि हमारी शुरुआत एक बेहद कमज़ोर और मामूली चीज़ से हुई, तो हमें अपने अंदर घमंड और अहंकार की जगह अल्लाह के सामने इन्क़िसार (विनम्रता) और आज्ञाकारिता अपनानी चाहिए। यही वह नुक्ता है जो हमें याद दिलाता है कि हमारा अस्तित्व हमारी अपनी ताक़त से नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और उसकी क़ुदरत से है। इसलिए हमें चाहिए कि अपने जीवन को अल्लाह की बताई हुई राह पर चलाएँ, उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। यही हमारी कामयाबी और नजात (मुक्ति) का ज़रिया है।



📜 आयत 44-48 — सूरा अन-नज्म

44وَأَنَّهُ هُوَ أَمَاتَ وَأَحْيَا
और ये कि वही मारता और जिलाता है
45وَأَنَّهُ خَلَقَ الزَّوْجَيْنِ الذَّكَرَ وَالْأُنثَىٰ
और ये कि वही नर और मादा दो किस्म (के हैवान) नुत्फे से जब (रहम में) डाला जाता है
46مِن نُّطْفَةٍ إِذَا تُمْنَىٰ
पैदा करता है
47وَأَنَّ عَلَيْهِ النَّشْأَةَ الْأُخْرَىٰ
और ये कि उसी पर (कयामत में) दोबारा उठाना लाज़िम है
48وَأَنَّهُ هُوَ أَغْنَىٰ وَأَقْنَىٰ
और ये कि वही मालदार बनाता है और सरमाया अता करता है,
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
46आयत

अनुवाद — अन-नज्म 46

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Wednesday, September 30, 2026

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